समस्तीपुर ने दवा उपलब्धता में लगाई लंबी छलांग, 31वें से पहुंचा 12वें स्थान पर
समस्तीपुर जिले ने सरकारी अस्पतालों में दवा उपलब्धता में बड़ी प्रगति की है, 31वें से 12वें स्थान पर पहुंच गया ...और पढ़ें
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समय कम है?
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जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। सरकारी अस्पतालों में दवा उपलब्धता के मामले में समस्तीपुर जिले ने राज्य स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। दिसंबर 2025 में जिला 31वें स्थान पर था, जो अब 12वें पायदान पर पहुंच गया है। यह रिपोर्ट 10 मार्च को जारी की गई है। इस उपलब्धि से न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के संकेत मिले हैं, बल्कि सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का भरोसा भी बढ़ा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दवा उपलब्धता में सुधार का सीधा असर ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या पर भी पड़ा है। पहले मरीजों को दवा के अभाव में निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ता था, अब अस्पतालों में ही अधिकांश दवाएं उपलब्ध हो रही हैं। इस सुधार के पीछे विभाग की सुदृढ़ मानिटरिंग और आपूर्ति प्रणाली को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
दवाओं के स्टाक की आनलाइन निगरानी, समय पर इंडेंट भेजने और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने से यह परिणाम संभव हो सका है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा, ताकि जिला टॉप-10 में अपनी जगह बना सके।
दवा उपलब्धता का औसत 84.29 प्रतिशत दर्ज
रिपोर्ट के अनुसार, समस्तीपुर जिले में दवा उपलब्धता का औसत 84.29 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसमें सदर अस्पताल में 85.97 प्रतिशत, अनुमंडलीय अस्पतालों में 90.98 प्रतिशत और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 89.15 प्रतिशत उपलब्धता रही। इसके अलावा रेफरल अस्पतालों में 88.05 प्रतिशत, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 84.27 प्रतिशत और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 88.51 प्रतिशत दवाएं उपलब्ध पाई गईं।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्तर पर 78.12 प्रतिशत, शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में 79.45 प्रतिशत, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 76.34 प्रतिशत तथा स्वास्थ्य उपकेंद्र स्तर पर 86.93 प्रतिशत उपलब्धता दर्ज की गई है।
प्रथम स्थान पर मुंगेर
राज्य स्तर की रैंकिंग में मुंगेर जिला 92.09 प्रतिशत के साथ पहले, वैशाली 91.60 प्रतिशत के साथ दूसरे और नालंदा 89.87 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं, दरभंगा और मुजफ्फरपुर रेड श्रेणी में निचले पायदान पर बने हुए हैं। समस्तीपुर की इस प्रगति को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में और बेहतर परिणाम की उम्मीद जताई जा रही है।
