Health Tips: गर्मी में इस बीमारी के चपेट पर आ रहे बच्चे, लक्षण दिखने पर तुरंत कराएं इलाज
समस्तीपुर जिले में भीषण गर्मी के कारण बच्चे हाइपरथर्मिया के शिकार हो रहे हैं। सदर अस्पताल में रोजाना कई मामले आ रहे हैं। गर्मी में बच्चों का तापमान 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना चाहिए। हाइपरथर्मिया से बचने के लिए बच्चों को ठंडे वातावरण में रखें पर्याप्त पानी पिलाएं और सीधे धूप से बचाएं। हीट स्ट्रोक से बचने के लिए लक्षणों को पहचानकर तुरंत इलाज कराएं।

जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी व तीखी धूप के कारण बच्चे हाइपरथर्मिया के शिकार होने लगे हैं।
सदर अस्पताल में औसत तीन से पांच बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में बच्चों के इलाज की संख्या में वृद्धि हुई है।
भीषण गर्मी व तेज धूप के कारण बच्चे हाइपरथर्मिया बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। बच्चे के शरीर के तापमान को तत्काल सामान्य नहीं किया गया तो यह रोग जानलेवा बन सकता है।
इन दिनों गर्मी में नवजात के शरीर का तापमान 36.5 डिग्री से 37.5 डिग्री रहना चाहिए। इससे कम रहने पर शरीर की सभी क्रियाएं शिथिल होने लगती हैं, जिससे बच्चा अधिक रोता है और पूरा दूध भी नहीं पी पाता है।
इस कारण वह सुस्त हो जाता है। जिस कमरे में बच्चों को रखें, उसका दरवाजा व खिड़की बंद रखें ताकि बच्चा गर्म हवा व गर्मी का शिकार न हो सके।
गर्मी में अपना ध्यान रखना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि हाइपरथर्मिया घातक भी हो सकता है।
क्या है हाइपरथर्मिया
शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और इससे बच्चे की सेहत को खतरा होने की आशंका रहती है, तो इस स्थिति को हाइपरथर्मिया कहा जाता है।
कई स्थितियों के कारण हाइपरथर्मिया हो सकता है। बच्चों से लेकर बड़ों और महिलाओं को यह दिक्कत हो सकती है।
गर्मी और चिलचिलाती धूप बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को बीमार कर देती है। इस मौसम में तेज धूप और गर्मी के कारण आने वाला फीवर हाइपरथर्मिया भी हो सकता है, जिसकी चपेट में सबसे अधिक बच्चे व बुजुर्ग होते हैं।
हाइपरथर्मिया के लक्षण
हाइपरथर्मिया के कई चरण हैं, जिसमें सबसे गंभीर हीट स्ट्रोक है। यह घातक हो सकता है। यदि हीट से संबंधित स्थितियों का प्रभावी ढंग से व जल्दी इलाज नहीं किया गया तो हीट स्ट्रोक हो सकता है। हीट स्ट्रोक अक्सर तब होता है जब शरीर का तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है।
बचाव में क्या करें
हाइपरथर्मिया से बचाव के लिए ठंडे वातावरण में रहने की कोशिश करनी चाहिए। पानी या इलेक्ट्रोलाइट से युक्त पेय पदार्थ पीना चाहिए। जल्दी से ठीक होने के लिए ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए।
शरीर के अधिक गर्म होने से हाइपरथर्मिया जैसे गंभीर मामले आते हैं। इसमें रोगी की धड़कन अचानक से तेज हो जाती है। चक्कर आने लगता है। त्वचा लाल होने लगता है। बच्चे चिड़चिड़ा हो जाते हैं। इसको लेकर सीधे धूप के संपर्क में आने से बचने की जरूरत है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना चाहिए। ताकि, शरीर में निर्लजीकरण जैसी परेशानी न हो। छोटे बच्चों को दाल का पानी, फलों का जूस नमक के साथ देनी चाहिए। ताकि, उनके शरीर में पानी के साथ ही पोटेशियम, सोडियम, क्लोराइड व अन्य लवणों का स्तर मेंटेन रहेगा।- डॉ. निशांत, युवा एवं शिशु रोग विशेषज्ञ।
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