Samastipur news : एचआईवी से नहीं मानी हार, 373 महिलाएं बनीं स्वस्थ बच्चों की मां, ऐसे हुआ संभव
समस्तीपुर में आधुनिक चिकित्सा पद्धति से एचआईवी संक्रमित 373 महिलाओं ने स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया है। पिछले नौ वर्षों में 8,000 लोगों की एचआईवी जांच हुई, जिनमें से 240 गर्भवती महिलाओं ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। गर्भवती महिलाओं का इलाज तुरंत शुरू किया जाता है, जिससे बच्चे पर संक्रमण का असर नहीं होता। सरकार एड्स पीड़ितों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करती है।

इस खबर में प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
प्रकाश कुमार, समस्तीपुर । आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने महिलाओं के एचआईवी संक्रमित होने के बाद भी उनके गर्भस्थ शिशु का बचाव संभव किया है। संक्रमण अब मातृत्व के लिए अभिशाप नहीं रह गया है। समस्तीपुर में एचआईवी संक्रमित 373 महिलाओं ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है।
जिले में पिछले नौ वर्षों के दौरान जनवरी, 2016 से मार्च, 2025 तक आठ हजार लोगों की एचआईवी जांच और काउंसिलिंग की गई। इनमें 1918 पुरुष और 1680 महिलाओं का एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर में उपचार चल रहा है। इनमें से 240 गर्भवती ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में 37, 2017-18 में 36, 2018-19 में 30, 2019-20 में 29, 2020-21 में 27, 2021-22 में 44 और 2022-23 में 37, 2023-24 में 53, 2024-25 में 44 और 2025-26 में अप्रैल से नवंबर तक 36 गर्भवती एचआईवी संक्रमित मिलीं।
रिपोर्ट आते ही शुरू कर दिया जाता है इलाज
गर्भवती महिला का रिपोर्ट पाजिटिव आते ही उपचार शुरू कर दिया गया। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे पर संक्रमण का असर नहीं पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के तहत एआरटी सेंटर में एचआइवी संक्रमित गर्भवती महिला का विशेष ख्याल रखा गया। इसके बाद दवा खाने के लिए विशेष रूप से निर्देशित किया जाता है। उनकी दिनचर्या नए सिरे से तय की जाती है। साथ ही क्या करें या क्या न करें, जैसे तमाम निर्देश दिए जाते हैं। इससे गर्भस्थ शिशु पर बीमारी का असर नहीं पड़ता है। समय पूरा होने पर पीड़ित गर्भवती का सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में सुरक्षित प्रसव कराया जाता है।
गर्भवती का उपचार ससमय होने पर मासूम को बचाने की मुहिम
जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डा. विशाल कुमार ने बताया कि यह बीमारी सिर्फ जागरूकता से ही रोकी जा सकती है। जितनी भी गर्भवती माताएं होती है, उन्हें गर्भावस्था के दौरान एआरटी में उपचार देकर होने वाले बच्चों को एचआइवी संक्रमित होने से बचाया जा रहा है। इसलिए सभी गर्भवती माताओं को आकर समय पर चेकअप कराते रहना चाहिए, ताकि मासूम एचआइवी के शिकार न हो सकें। सरकार एड्स पीड़ित मरीज को बिहार शताब्दी एड्स योजना के तहत प्रतिमाह 1500 रुपये देती है।
जागरूकता ही एड्स से बचा सकती है। जागरूकता के कारण ही बच्चों को बचाया जा सका। सदर अस्पताल के एआरटी सेंटर में एचआइवी पीड़ितों के इलाज के लिए सभी सुविधाएं, जांच एवं दवाइयां उपलब्ध है।
डा. विशाल कुमार, जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी, समस्तीपुर।

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