कारगिल युद्ध से लिया संकल्प और रचा इतिहास, समस्तीपुर की बेटी मॉस्को में बनीं पहली सैन्य राजनयिक
Indian Air Force Women Officers Bihar: समस्तीपुर की विंग कमांडर अंजलि सिंह ने कारगिल युद्ध से प्रेरणा लेकर वायुसेना में ...और पढ़ें

विंग कमांडर अंजलि सिंह
HighLights
विंग कमांडर अंजलि सिंह समस्तीपुर की पहली महिला सैन्य राजनयिक।
कारगिल युद्ध से प्रेरित होकर वायुसेना में शामिल हुईं अंजलि।
मॉस्को में भारतीय दूतावास में डिप्टी एयर अटैचे के रूप में सेवा दी।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। Wing Commander Anjali Singh Samastipur: 21वीं सदी के शुरुआती वर्षों में जब समस्तीपुर जैसे पारंपरिक और सामाजिक रूप से रूढ़िवादी इलाके से किसी लड़की का घर से बाहर निकलना भी बड़ी बात मानी जाती थी।
तब एक बेटी ने नीले आसमान में अपनी राह चुनी। समस्तीपुर के वारिसनगर प्रखंड स्थित छोटे से गांव मकसूदपुर से निकली विंग कमांडर अंजलि सिंह (डिंपल) ने न केवल वायुसेना को अपना करियर चुना, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिख दिया।
कारगिल युद्ध से मिला संकल्प
मिग-29 लड़ाकू विमान की इंजीनियर अंजलि के नाम किसी भी भारतीय मिशन के तहत विदेश में तैनात होने वाली देश की पहली महिला सैन्य राजनयिक होने की ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज है।
44 वर्षीय अंजलि के पिता मदन प्रसाद सिंह स्वयं वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जिन्हें वे अपना रोल मॉडल मानती हैं।
वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध का टीवी पर प्रसारण देखने के बाद उन्होंने ठान लिया था कि वे हर हाल में एयर फोर्स ही ज्वाइन करेंगी।

स्वजन के साथ विंग कमांडर अंजलि सिंह। सौ : डा. मनीष
2002 में हुआ था चयन
अंजलि ने जालंधर से शुरुआती पढ़ाई और नासिक से इंटरमीडिएट करने के बाद पुणे यूनिवर्सिटी से टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद दो साल तक उत्तर प्रदेश के कोटद्वार में प्राइवेट नौकरी की, लेकिन उनका मन हमेशा वर्दी की ओर ही रहा।
आखिरकार वर्ष 2002 में उनका चयन भारतीय वायुसेना में हो गया और पिछले 24 सालों के सैन्य सफर में उन्होंने लड़ाकू स्क्वाड्रन के साथ देश की उत्कृष्ट सेवा की है।
मॉस्को में रची नई इतिहास
वर्ष 2019 में विंग कमांडर अंजलि की तैनाती मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में बतौर डिप्टी एयर अटैचे हुई, जो किसी भी भारतीय महिला अधिकारी के लिए पहला अवसर था।
वर्ष 2023 में मॉस्को से लौटने के बाद वे फिलहाल अपने परिवार (पति राजकुमार और आठ साल के बेटे सक्षम) के साथ दिल्ली में कार्यरत हैं।
उनकी यह कामयाबी समस्तीपुर ही नहीं, बल्कि देश की उन तमाम बेटियों के लिए एक मजबूत पथ-प्रदर्शक बनी है जो सेना में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।
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