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    पंगास मछली पालिए, अच्छा लाभ कमाइएं

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    Updated: Thu, 03 Nov 2011 05:38 PM (IST)

    समस्तीपुर, संवाद सूत्र : आज कल बाजार में आंध्र प्रदेश की पंगास मछली धड़ल्ले से बिक रही है। पंगास मछली का वैज्ञानिक नाम पंगेशियस है। इसके शरीर का पाश्‌र्र्व भाग चांदी के समान चमकीला होता है। स्थानीय बाजार में इसे जासर नाम से पुकारा जाता है। यह वायु श्वांसी मछली है। इस कारण इसे कम आक्सीजन, धुलित व जल वाले तालाबों में भी पाला जा सकता है। यह कैटफिस है और सामान्यतया इसका एकल पालन करना ही ठीक है। इसके वृद्धि दर अधिक होने के कारण पश्चिम बंगाल तथा आंध्र प्रदेश में मत्स्य कृषक इसका पालन कर रहे है। राज्य सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा इसके पालन के लिए मत्स्य पालकों को प्रेरित करने का कार्य शुरू किया गया है। ऋण की सुविधा तथा अनुदान राशि का प्रावधान किया गया है। प्रति हेक्टेयर 5 लाख रूपये के ऋण पर 3 लाख रूपए अनुदान देने का प्रावधान है। यह सर्व भक्षी मछली है अस कारण इसके लिए सामान्य परिपूरक आहार पर्याप्त है। समुचित आहार देने पर 5-6 महीने में इसका वजन 1.0 से 1.5 किलोग्राम तक हो जा सकता है।

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    फोटो ::: 3 एसएएम 11

    मत्स्य वैज्ञानिक डा. आनंद मोहन वर्मा का कहना है -

    - पंगास पालन के लिए 1.0 से 1.5 मीटर गहरा पानी चाहिए।

    - पानी का पी.एच. 7 से 7.5 हो एवं जल का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस ठीक है।

    - धुलित आक्सीजन का मान 4 मी. ग्रा. प्रति लीटर से कम होने पर भी कोई कठिनाई नहीं है।

    - अंगुलिकाओं का संचयन 3 से 15 प्रति वर्ग मीटर की दर से करना चाहिए।

    - परिपूरक आहार की मात्रा का निर्धारण मछली के शारीरिक वजन का 2.5 प्रतिशत की दर से करना चाहिए।

    - आहार रूपान्तर दर 1.5 : 1 इस मछली के लिए होता है।

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