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    युगावतार थे ठाकुर अनुकूल चन्द्र जी

    By Edited By:
    Updated: Wed, 23 Sep 2015 08:32 AM (IST)

    समस्तीपुर। श्रीविग्रह मंदिर बान्दे में युगपुरुषोत्तम भगवान अनुकूल का 128 वां महाअमृत महोत्सव समारोह

    समस्तीपुर। श्रीविग्रह मंदिर बान्दे में युगपुरुषोत्तम भगवान अनुकूल का 128 वां महाअमृत महोत्सव समारोह को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने उन्हें युगावतार बताया। कहा जब-जब धरती अत्याचार से त्रस्त होती है। तब भगवान अवतार लेकर मानवता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जब भारत माता गुलामी की जंजीर में जकड़ी थी। चारों ओर अराकता फैली थी। उसी समय तत्कालीन बंग्लादेश के पावना जिला हिमायतपुर गांव में भाद्र ताल नवमी 1885 ई. में उनका आविर्भाव हुआ। भगवान श्रीकृष्ण की तरह उन्हें भी बचपन में मारने का प्रयास किया गया। लेकिन, काल भला महाकाल के महाकाल भगवान को भला कौन मार सकता है। भगवत साधना की सघनता से भगवान अनुकूल बाल्यकाल से ही ठाकुर के रूप में पूूज्य हो गए। भगवान के सानिघ्य में महात्मा गांधी के गुरु देशबंधु चितरंजन दास, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के पिता जानकीनाथ बोस आदि महापुरुषों ने अपने जीवन को धन्य बनाया। श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र जी के सतसंग से किशोरीमोहन जैसे हजारों कुख्यात अंगुलीमाल अनंतनाथ जैसे महापुरूष में परिणत हो गए। भगवान अनुकूल विरचित 'सत्यानुसरण' को देखकरनोबल पुरस्कार विजेजा विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने जब जाना कि इसे मात्र 23 साल के अनुकूलचन्द्र जी ने लिखा है। तो उन्होंने कहा था कि इसे कोई 23 लाख साल का प्राणी भी नहीं लिख सकता है। आलोचना प्रसंग, इस्लाम प्रसंगअनुश्रुति, दि मैसेज सहित दर्जनों ग्रंथों की रचनाकर भगवान अनुकूल ने विश्व के समक्ष महामानव बनने की राह बताई। समारोह को प्रवीण कुमार झा, डा. राजकुमार ठाकुर, राजकुमार ¨सह ऋत्विक शशिकान्त चौधरी, गोपाल झा, द्रव्येश्वर ठाकुर, प्रो. अशोक कुमार पाण्डेय, गोपाल प्रसाद राय, मुकेश आदि ने सम्बोधित किया।

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