संवाद सूत्र, सहरसा: कोसी प्रमंडल के एकमात्र रविनंदन मिश्र स्मारक विधि महाविद्यालय पर पटना हाईकोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अनुमोदन पर संबद्धता समाप्त करते हुए नामांकन पर रोक लगा दी है। इसके कारण कालेज का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। हजारों कानून की पढ़ाई करने वाले छात्रों का भविष्य अंधकार मय हो गया है। यह जानकारी देते हुए नवनिर्माण मंच के संस्थापक एवं पूर्व विधायक किशोर कुमार ने कहा कि कि सत्र 1972-73 से 2018-19 तक में हजारों छात्र-छात्राओं ने विधि का ज्ञान अर्जन कर न्यायिक सेवा से लेकर विधि पेशा से अपना जीविकोपार्जन कर रहे है।

इस महाविद्यालय को पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र के कार्यकाल में अप्रैल 1981 में अंगीभूत हुआ था। यह कालेज यूजीसीटूएफ के तहत निबंधित है। विश्वविद्यालय की अकर्मण्यता एवं साजिश के कारण इसके भौतिक संरचना एवं मानव संसाधन की वृद्ध नहीं की गई। शुक्रवार को स्थानीय परिसदन में उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय द्वारा कालेज की संबद्धता समाप्त कर दिया गया है। साथ ही नामांकन पर रोक लगा दी गयी है।

पूर्व विधायक ने कहा कि सुनियोजित साजिश के तहत पूर्णकालिक प्राचार्यों की बहाली नहीं की गई। अंशकालिक शिक्षकों की बहाली का विज्ञापन मार्च 2019 में निकाला गया, जो ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कोर्ट ने अगले सत्र 22-23 में नामांकन प्रक्रिया शुरू करने के लिए बीसीआई से कालेज का निरीक्षण करने का आदेश दिया है। बीसीआई से अनुमति मिलने के बाद ही इस कालेज में छात्र-छात्राएं नामांकन ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि विधि महाविद्यालय की समस्या के समाधान के लिए अतिशीघ्र कदम उठाया जाए अन्यथा लोग जनांदोलन करने पर बाध्य होंगे। पूर्व विधायक के साथ त्रिभुवन प्रसाद सिंह, डा. नवनीत सिंह, अभिजीत सिंह, दीपक पोद्दार, अमन सिंह, सूरज प्रजापति मौजूद थे।

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