रोहतास। सोन नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए नदी में जाना खतरे से खाली नहीं है। इसका कारण नदी के सुरक्षित क्षेत्र में प्रशासन के नाक के नीचे से अवैध बालू खनन का कार्य लगातार जारी रहना है। इसके चलते लोग लगातार असमय मौत के मुंह में जा रहे हैं। प्रशासन इन घटनाओं के बावजूद लगातार चुप्पी साधे हुए है।

बताते चलें कि जेसीबी मशीन से बालू निकालने के चलते सोन नदी में बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं, जिनकी गहराई का अंदाजा नहाने के वक्त नहीं मिल पाता है और गहरे पानी में डूबने से लोगों की लगातार जान जा रही है। दो दिन पहले इसी कारण डालमियानगर थाना क्षेत्र के मकराइन गांव की दो किशोरियों की मौत हो गई। कभी-कभार प्रशासनिक अधिकारी खनन विभाग के साथ मिलकर अवैध खनन को रोकने का प्रयास करते हैं, लेकिन अबतक इसपर पूरी तरह रोकथाम लगाने में नाकामी हासिल हुई है। डेंजर जोन बन गया है सोन का किनारा:

अनियमित व अवैध खनन के चलते सोन नदी का किनारा डेंजर जोन बन गया है। खनन क्षेत्र के अलावा पूरी नदी में जेसीबी मशीन से गड्ढा खोद कर कुआं बना दिया गया है। जहां आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती है। गत दिनों दो किशोरियों की मौत के पहले भी इसी वर्ष एक मार्च को नदी किनारे गए गांधीनगर निवासी दो बच्चों की मौत डूबने से हो गई थी। इनमें से सात वर्षीय आकाश का शव तीन दिन बाद दूसरे थाना क्षेत्र से बरामद किया गया था। गत वर्ष तीन नवंबर को पत्रकार पुत्र अनूप कुमार की मौत भी सोन में डूबने से हो गई थी। इसके अलावा आठ जून 2019 को सासाराम का फिरदौस आलम इंद्रपुरी में व 25 अप्रैल 2019 को स्थानीय टाल बांस क्षेत्र में तीन बच्चों की मौत भी सोन में डूबने के कारण गई थी। सभी मौतों का कारण जेसीबी मशीन से अवैध तरीके से सोन में बालू खनन के दौरान किया गड्ढा ही रहा है।

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समय समय पर अवैध खनन रोकने के लिए अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। अब तक इस कार्य में अवैध रूप से लगे दर्जनों जेसीबी, ट्रक व ट्रैक्टर जब्त किए जा चुके हैं। रुटीन छापेमारी के अलावा शिकायत मिलने भी तत्काल कार्रवाई की जाती है।

मो. रियाजुद्दीन, खनन निरीक्षक

Posted By: Jagran

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