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    मनसा, वाचा कर्मणा के सिद्धांत पर जीना वास्तविक धर्म

    By JagranEdited By:
    Updated: Sun, 09 Feb 2020 06:16 AM (IST)

    पूर्णिया। मनुष्य अपनी कामनाओं का परित्याग कर जीवन में निस्वार्थ भाव को जगह देते हुए शाति को प्र

    मनसा, वाचा कर्मणा के सिद्धांत पर जीना वास्तविक धर्म

    पूर्णिया। मनुष्य अपनी कामनाओं का परित्याग कर जीवन में निस्वार्थ भाव को जगह देते हुए शाति को प्राप्त कर सकता है। मनसा, वाचा कर्मणा के सिद्धात पर नीतियों का पालन करते हुए जीवन जीना ही वास्तविक धर्म है। उक्त बातें शनिवार को मधुबन पंचायत की झालीघाट गाव में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग समारोह के समापन सत्र में योगानंद बाबा ने कही।

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    संत-महात्माओं के आगमन पर गुरु महाराज की जय और सब संतन की बलि बलिहारी के जयकारे से गाव गूंज उठा। जनार्दन यादव के आवास पर आयोजित सत्संग के दौरान श्रृद्धालुओं की भीड़ लगी रही। दो अलग-अलग सत्रों में संपन्न समारोह के दौरान धीरेंद्र बाबा, राजकिशोर बाबा, विष्णु बाबा और कैलाश बाबा ने अपने प्रवचन से लोगों को लाभान्वित किया। संतों ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरु महाराज ने सभी पंथों के साथ को एक जगह एकत्रित कर परमात्मा को पाने का मार्ग प्रशस्त किया है। आयोजन समिति के विजेंद्र यादव, विलास यादव, सुरेश यादव ने बताया कि यहा विगत 25 वषरें से सत्संग समारोह का आयोजन हो रहा है। आयोजन की सफलता में राजीव कुमार, मिथुन कुमार, सुबोध कुमार, सोनू कुमार, विट्टू और बाबुल सहित स्थानीय श्रद्धालु तत्पर दिखे।