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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Purnia News: तांत्रिक के कहने पर 5 लोगों को जिंदा जलाया... 40 हजार भाड़ा देकर ट्रैक्टर से ले गए लाश

Published: Tue, 08 Jul 2025 05:45 AM (IST)Updated: Tue, 08 Jul 2025 07:00 AM (IST)

Purnia News बिहार के पूर्णिया में 5 लोगों के जिंदा जलाने की दिल दहला देने वाले हत्याकांड के पीछे एक ...और पढ़ें

Purnia News: जिंदा जलाए गए 5 लोगों के शवों को ठिकाने लगाने के लिए ट्रैक्ट्रर भाड़ा 40 हजार दिया गया।
Purnia News: जिंदा जलाए गए 5 लोगों के शवों को ठिकाने लगाने के लिए ट्रैक्ट्रर भाड़ा 40 हजार दिया गया।

संवाद सूत्र, पूर्णिया। Purnia News पूर्णिया पूर्व इलाके के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रजीगंज पंचायत के टेटगामा आदिवासी टोला में रविवार की देर रात्रि डायन के आरोप में एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा जला कर मार देने की घटना में पुलिस की जांच तेज हो गई है। लगातर छनकर नयी बातें भी सामने आ रही है। पुलिस ने जिस नकुल उरांव को गिरफ्तार किया है, उसने 40 हजार किराया देकर पांचों शव को ठिकाना लगाने के लिए ट्रैक्टर ट्राली किराये पर मंगाया था।

घटना के पीछे एक तांत्रिक ने जहर का काम किया है। तांत्रिक के कहने पर ग्रामीणों ने 70 वर्षीय कातो देवी को डायन मान लिया था और इसी आक्रोश में उसके परिवार के पांच सदस्यों को जिंदा जलाकर मार डाला था। आधा दर्जन थानों की पुलिस व दो डीएसपी की अगुवाई में श्वान दस्ते की मदद से शवों को बरामद किया था।

बताया जाता है कि गांव के ही मिट्टी माफिया नकुल उरांव ने अपने सहयोगी मु सनाउल्ला से 40 हजार में ट्रैक्टर भाड़े पर मंगवा कर उसी ट्रैक्टर पर पांचो अधजले शव को लोड कर लगभग एक किलोमीटर दूर एक ईंट भट्ठे के समीप एक पोखर के पास जेसीबी से गड्ढा खोदकर उसे दफना दिया था। इसके बाद टेटगामा गांव के लोग फरार हो गए।

पूरा गांव वीरान पड़ा है। मृतक बाबूलाल उरांव का पुत्र व चश्मदीद सोनू कुमार को पुलिस ने हर जानकारी ली है और उस दिशा में कार्रवाई भी हो रही है। उन्होंने बताया कि लगभग 50 से 60 लोग जो गांव के ही थे वह सब अचानक घर में घुसकर मेरे पिता, माता, दादी, भैया और भाभी को बांधकर पीटते हुए घसीटकर लेकर चला गया।

रेणु ने भी नहीं लिखी ऐसी कलंक कथा

जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित पटेगामा आदिवासी टोला में अंधविश्वास में पांच लोगों को जिंदा जलाकर मारने की घटना ने हर किसी को दहला दिया है। यह इसलिए भी पूर्णिया के इतिहास में अंधविश्वास की यह सबसे क्रूर घटना है। इस घटना ने लोगों के जेहन में कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु के समय के समाज को जिंदा कर दिया है।

रेणु की रचनाओं में यह दिखाया गया है कि यहां का समाज किस तरह भूत-प्रेत, डायन जैसे अंधविश्वास को जी रहा था। रेणु के किसी रचना में ऐसी किसी बड़ी घटना का कहीं चर्चा नहीं है। एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा मारने की यह कलंक कथा उस पूर्णिया के समझ पर सवाल है, जो अब हवाई उड़ान भरने की दहलीज पर है।

रेणु की रचनाओं में जी रहा निरक्षर गांव अभी भी पूर्णिया में है। चंद फीसद साक्षरता अभी के लिए बड़ा सवाल है। पूरा का पूरा गांव अंधविश्वास में डूबा हुआ है। पूर्णिया में डायन कह दो लोगों की एक साथ हत्या की घटना पूर्व में हुई है। इसके अलावा प्रताड़ना की घटनाएं भी सामने आती रही है, लेेकिन पांच लोगों को एक साथ जिंदा फूंक देने की यह पहली घटना है।

खासकर शहर के समीप ही घटी इस घटना की गूंज दूर-दूर तक पहुंची है। पूर्णिया के प्रति दूसरे जिलों का नजरिया बदलने का बड़ा खतरा भी है। इस गांव में लोग खाने भर कमाने को ही जीवन समझ रखा है। बच्चे विद्यालय नहीं जाते हैं, इससे अभिभावकों को भी एतराज नहीं है। आसपास के गांव की स्थिति ऐसी नहीं है। कई गांव ने उंची छलांग भी भरी है।

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