अनपढ़ नीलम की जुबां तक पहुंची कर्नल सोफिया और विंग कमांडर व्योमिका, गांव की महिलाएं गदगद
पूर्णिया के सतकोदरिया गांव की महिलाएं भले ही अनपढ़ हों भारत-पाक तनाव के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी और कमांडर व्योमिका सिंह से प्रेरित हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मक्का काट रही इन महिलाओं तक भी सोफिया और व्योमिका के पराक्रम की चर्चा पहुंची। वे मानती हैं कि बेटियों को उचित सम्मान मिल रहा है और ये महिलाएं उनकी आदर्श बन गई हैं।

प्रकाश वत्स, पूर्णिया। जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर केनगर प्रखंड का सतकोदरिया गांव बसा है। इस गांव की जीविका का आधार कृषि है। नयी पीढ़ी तो शिक्षा की ओर तेजी से अग्रसर हुई है, लेकिन मां व दादी की भूमिका वाली साक्षर महिलाओं की संख्या कम है। जीने की जद्दोजहद भी है।
काफी संख्या में महिलाएं मजदूरी भी करती है और ऐसे महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है, जो मजदूरी तो नहीं करती, लेकिन अपने खेतों में खूब पसीना बहाती है। अब भी जिंदगी की इस दौर को जी रहे लोगों में भी राष्ट्रभक्ति की कमी कहीं से नहीं है। भारत-पाक तनाव के दौरान मक्का कटाई की व्यस्तता के बीच भी लोग पल-पल की जानकारी लेती रहे।
लोगों को रहता सोफिया और व्योमिका का इंतजार
बॉर्डर पर तनाव की जानकारी के लिए कर्नल सोफिया कुरैशी व विंग कमांडर व्योमिका सिंह के सामने आने का इंतजार लोगों को रहता था। मजदूरी, किसानी में पस्त महिलाओं को भले ही पूरी स्थिति समझ में नहीं आ रही थी, लेकिन सोफिया कुरैशी व व्योमिका सिंह का नाम उनके कानों तक पहुंच रहा था।
यही कारण था कि अपनी बेटियों से सोफिया व व्योमिका की कहानी सुन दोनों का नाम 50 वर्षीय अनपढ़ नीलम देवी की जुबां तक पहुंच गई थी। इसी गांव की मसोमात पिंकी देवी व रिश्ता देवी भी उसी कड़ी की महिला है। अक्षर ज्ञान प्राप्त करने की दोनों की जिज्ञासा जटिल पारिवारिक स्थिति के चलते बचपन में ही बेमौत मर गई थी।
दोनों अपने-अपने बच्चों को अक्षर ज्ञान दिलाने के लिए खूब मिहनत कर रही है। उन बच्चों के माध्यम वे देश-दुनिया की उन गतिविधियों की जानकारी लेने की इच्छुक रहती है, जो बच्चों या फिर समाज में विशेष चर्चा में आता है। भारत-पाक युद्ध की चर्चा गली-गली में पहुंच गई थी इस चलते ही बहियारों से भी सरहद का हाल जानने की बेताबी रही।
बहियारों में महिलाओं की झुंड के बीच भी यह चर्चा पहुंचने से अछूती नहीं रही। धमदाहा प्रखंड के सुंदर धरमपुर गांव में सीमांचल के अन्य गांवों की तरह मक्का की कटाई व तैयारी की धुन सिर चढ़कर बोल रहा था। गांव में महिलाओं मजदूरों की अलग टीम काम कर रही है। किसानों के बीच ऐसे दल का डिमांड भी खूब है।
महिला मजदूरों की टीम मक्का कटाई ठेका पर कर रही है। इसी गांव के बड़की बाड़ी बहियार में मक्का कटाई के दौरान गर्मी के चलते एक पेड़ के नीचे सुस्ता रही प्रमिला, देवी, सुरखी देवी, झिलिया देवी सहित अन्य के बीच भी यह चर्चा चल रही थी। बात भारत-पाक तनाव के दौरान बम धमाकों में मरने की बात हास्य रंग में उठी थी और फिर सोफिया व व्योमिका सिंह की चर्चा पर गंभीर मोड़ भी ले रही थी।
छात्राओं में भी चर्चा
छात्राओं की बात ही अलग है। सेना की तैयारी करने वाली खूशबू कुमारी, हेमलता कुमारी, ज्योति कुमारी व आरती कुमार मनू तो सोफिया कुरैशी व व्योमिका सिंह को इस तनाव में मिली भूमिका से गदगद है। इसके लिए वे प्रधानमंत्री मोदी को भी धन्यवाद देती है।
उन्होंने कहा कि पहली बार बेटियों की काबिलियत को उचित सम्मान मिल रहा है। वे हमारी आदर्श बन चुकी हैं। हम बेटियां दुर्गा व काली भी हैं, यह संदेश विश्व को मिल चुका है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।