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    Vivah Panchami 2024: राम-सिया के व्रत-पूजन से सुखद होगा वैवाहिक जीवन, जानें विवाह पंचमी का पौराणिक महत्व

    Updated: Fri, 06 Dec 2024 04:04 PM (IST)

    सीताराम विवाहोत्सव के दिन रामचरितमानस राम रक्षास्त्रोत का पाठ व स्तुति करने से पारिवारिक अड़चनें दूर होती हैं और आपसी प्रेम प्रगाढ़ होते हैं। विवाह पंचमी पर रामचरितमानस का नवाह्ण परायण कथा की भी परंपरा है। माता जानकी के प्राकट्य स्थल सीतामढ़ी के धनुषा में इस मौके पर भव्य मेला लगता है। इस दिन वहां स्थित बरगद के पेड़ में महिलाएं सूत बांधती हैं।

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    राम-सिया के व्रत-पूजन से सुखद होगा वैवाहिक जीवन

    जागरण संवाददाता, पटना। अगहन शुक्ल पंचमी शुक्रवार को श्रवणा व धनिष्ठा नक्षत्र के युग्म संयोग में प्रभु श्रीराम और जनक नंदनी माता सीता का विवाह उत्सव मनाया जा रहा है। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, इस दिन अतिशुभकारी सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रवियोग का भी उत्तम संयोग रहेगा। मान्यता है कि विवाह पंचमी के दिन सीताराम भगवान की पूजा एवं दर्शन करने से सारी अभिलाषा पूर्ण होती है।

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    इस दिन सभी राम मंदिरों व ठाकुरबाड़ी में षोडशोपचार से विधिवत पूजा-आराधना की जाएगी। मंदिरों में इसके लिए विशेष सजावट की गई है। भव्य शृंगार कर भगवान की आरती उतारी जाएगी।

    ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया की सीताराम विवाहोत्सव के दिन रामचरितमानस, राम रक्षास्त्रोत का पाठ व स्तुति करने से पारिवारिक अड़चनें दूर होती हैं और आपसी प्रेम प्रगाढ़ होते हैं। विवाह पंचमी पर रामचरितमानस का नवाह्ण परायण कथा की भी परंपरा है। माता जानकी के प्राकट्य स्थल सीतामढ़ी के धनुषा में इस मौके पर भव्य मेला लगता है। इस दिन वहां स्थित बरगद के पेड़ में महिलाएं सूत बांधती हैं।

    विवाहोत्सव पंचमी पर श्री दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्त्रोत एवं दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ करने से वैवाहिक लग्न, स्वास्थ्य तथा दांपत्य जीवन की बाधाएं नष्ट हो जाती है। तुलसी माला से सीताराम नाम का जाप करने से मनोकामना पूर्ति का वरदान मिलता है। विवाह पंचमी पर ग्रह-गोचरों का शुभ संयोग बनने से राम-जानकी विवाह और पूजा-अर्चना करना अति पुण्य फलदायी होगा। सुहागिन महिलाओं को सीता राम की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी। कुंवारी कन्या को सीताराम की पूजा से मनचाहा वर की प्राप्ति होगी।

    ब्रह्माजी ने लिखी थी विवाह की लग्न पत्रिका:

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,  स्वयंवर में धनुष तोड़ने के बाद विवाह की सूचना मिलते ही राजा दशरथ भरत, शत्रुघ्न व अपने मंत्रियों के साथ जनकपुर आ गए। ग्रह, तिथि, नक्षत्र योग आदि देखकर ब्रह्माजी ने उस पर विचार कर लग्न पत्रिका बनाकर नारदजी के हाथों राजा जनक को भिजवाया था। शुभ मुहूर्त में श्रीराम की बरात का आगमन हुआ था। सीताराम का विवाह संपन्न होने पर राजा जनक और राजा दशरथ ने एक दूसरे को प्रसन्नता पूर्वक गले लगाया था।

    विवाह पंचमी का क्या है पौराणिक महत्व:

    श्रीरामचरितमानस के अनुसार अगहन शुक्ल पंचमी को भगवान राम और जनकपुत्री जानकी का विवाह हुआ था। इस कारण इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। भगवान राम को चेतना और मां सीता को प्रकृति का प्रतीक माना गया है। ऐसे में दोनों का मिलन इस सृष्टि के लिए अति उत्तम माना गया है। ऐसी मान्यता है कि विवाह पंचमी के दिन भगवान राम और सीता का विवाह कराने से ऐसे जातकों की समस्याएं दूर हो जाती हैं, जिनकी शादी में अड़चनें आ रही हैं।

    विवाह पंचमी के दिन भगवान श्री राम और मां सीता के संयुक्त रूप की उपासनी की जाती है। इस दिन रामचरित मानस और बालकांड में भगवान राम और सीता के विवाह प्रसंग का पाठ करना शुभ माना जाता है। इससे परिवार में सुख का वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

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