बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न रचनाकार थे धर्मवीर भारती
पद्मश्री धर्मवीर भारती का रचना संसार न सिर्फ विचार संपन्न है, बल्कि पाठकों को तनावमुक्त करते हैं।
पटना। पद्मश्री धर्मवीर भारती का रचना संसार न सिर्फ विचार संपन्न है, बल्कि पाठकों को तनावमुक्त कर रुमानियत से भर देता है। वे सफल उपन्यासकार, कथाकार, सहृदय कवि और सजग संपादक थे। एक कड़क संपादक का सरस साहित्य कुछ यूं है, जैसे साहित्य में विरुद्धों का सामंजस्य। वे पाठकों को एक रुमानी संसार में ले जाते हैं।
पत्रकार के रूप में भारतीजी :
लघु पत्रिका आंदोलन के पुरोधाओं रघुवीर सहाय, कमलेश्वर के साथ धर्मवीर भारती का नाम भी आदर से लिया जाता है। दिनमान, रविवार, सारिका के साथ धर्मयुग की जो चौकड़ी बनती उसकी कमान भारतीजी के हाथों में ही थी। एक सफल पत्रकार के रूप में उन्होंने खुद को स्थापित किया था। बांग्लादेश बनने के समय भारत-पाक युद्ध की रिपोर्टिग और उसके परिप्रेक्ष्य में रची गई उनकी कविता 'मुनादी' को भला कौन भूल सकता है?
सुधा-चंदर की अमर प्रेमकहानी :
धर्मवीर भारती अपने उपन्यास 'गुनाहों का देवता' को लेकर काफी चर्चित रहे। युवा पाठकों का साहित्य के प्रति रुझान बढ़ाने में इस उपन्यास की बड़ी भूमिका रही। सच कहें तो गुलेरी जी के 'चन्द्रकांता' के बाद 'गुनाहों का देवता' संभवत: एक महत्वपूर्ण उपन्यास रहा है, जिसने ¨हदी साहित्य को एक बड़ा पाठक वर्ग प्रदान किया। सुधा, चंदर और विनती के माध्यम से प्रेम का 'नौस्टालजिक' रूप और निश्छल प्रेम की बानगी पेश की है। इस उपन्यास में इलाहाबाद का सिविल लाइन जीवंत हो उठा है।
इसके अलावा सूरज का सातवां घोड़ा भी उल्लेखनीय है। 'अंधा युग' जैसे नाटक में भारतीजी ने स्पष्ट किया है कि युद्ध किसी भी स्थिति में ठीक नहीं होता। साथ ही गंधारी के माध्यम से तटस्थता को अपनाना और भयावहता को अनदेखी करने पर सवाल उठाया है। महाभारत और द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका को एक करके जो कथानक भारतीजी ने बुना है, उसमें शांति की वकालत की है। वहीं कनुप्रिया में राधा-कृष्ण के प्रेम के माध्यम से प्रेम को एक नया धरातल प्रदान करने का प्रयास किया है।
भारतीजी का रचना संसार :
उपन्यास - गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, ग्यारह सपनों का देश, प्रारम्भ और समापन
कविता संग्रह - कनुप्रिया, ठंडा लोहा, सात गीत वर्ष, सपना अभी भी
नाटक - अंधा युग
कहानी संग्रह - द्रो का गांव, स्वर्ग और पृथ्वी, चांद और टूटे हुए लोग, बंद गली का आखिरी मकान, सास की कलम से, समस्त कहानियां (एक साथ)
निबंध - ढेले पर हिमालय, पश्यंती कहानियां अनकही, नीली झील, नदी प्यासी थी, मानव मूल्य और साहित्य ठंडा लोहा
बाक्स :
सम्मान : पद्मश्री - 1972 में
- भारत भारती सम्मान
- राजेन्द्र प्रसाद शिखा सम्मान
- महाराष्ट्र गौरव, 1994 में
- व्यास सम्मान
- 1999 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान
जन्म
25 दिसम्बर, 1926
इलाहाबाद में
पुण्यतिथि
4 सितंबर, 1997
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।