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    नए खतियान में रैयत के नाम के साथ दर्ज होगी ये बात, बिहार सरकार करने जा रही है विशेष व्‍यवस्‍था

    By Vyas ChandraEdited By:
    Updated: Fri, 28 Jan 2022 07:45 AM (IST)

    जमीनी बातें श्रृंखला के तहत गाेवा और बिहार के अधिकारियों की बुधवार को वर्चुअल बैठक हुई। उन्होंने कहा कि खतियान को डिजिटल फार्मेट में डाला जाएगा। यह रैयत के मोबाइल से भी जुड़ा रहेगा। ताकि कोई मैसेज तुरंत जा सके।

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    अब खतियान में होगा रैयत का पता। सांकेतिक तस्‍वीर

    पटना, राज्‍य ब्‍यूरो।  विशेष भूमि सर्वेक्षण के आधार पर बन रहे खतियान में अब रैयत के नाम के साथ डाक का पता भी दर्ज होगा। फिलहाल नाम के साथ सिर्फ गांव का जिक्र रहता है। पता नहीं रहता है, जिसके जरिए पत्राचार किया जा सके। यह जानकारी सर्वे निदेशक जय सिंह ने दी। वे बुधवार को गोवा के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों के साथ अनुभव साझा कर रहे थे। जमीनी बातें श्रृंखला के तहत दोनों राज्यों के अधिकारियों की बुधवार को वर्चुअल बैठक हुई। उन्होंने कहा कि खतियान को डिजिटल फार्मेट में डाला जाएगा। यह रैयत के मोबाइल से भी जुड़ा रहेगा। ताकि कोई मैसेज तुरंत जा सके। गोवा के राजस्व सचिव संजय कुमार का कहना था कि नोटिस तामिला की सही व्यवस्था होनी चाहिए। 

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    अफ्रीकी देश को सर्वे के मामले में माना जाता है मॉडल

    अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने अधिकारियों को निबंधन को बाहरी एजेंसी से कराने, निबंधन के दौरान हरेक प्लाट का यूनिक नंबर और उस प्लाट का पूरा इतिहास दर्ज करने, विभाग के वेबसाइट के जरिए नोटिस का तामिला एवं भूमि सर्वे के रवांडा माडल का अध्ययन करने की सलाह दी। मालूम हो कि अफ्रीकी देश रवांडा ने सिर्फ चार साल में भूमि सर्वेक्षण कर लिया था। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों सर्वे के मामले में इसे माडल मानती हैं।  

    गोवा के राजस्‍व सचिव के साथ वर्चुअल बैठक

    गोवा के राजस्व सचिव संजय कुमार ने कहा कि उनके राज्य में नक्शे का इस्तेमाल सिर्फ संदर्भ के तौर पर किया जाता है। व्यवहार में जमीन की नापी के लिए मापक-सर्वेयर का आकलन ही मान्य होता है। गोवा में सरकार के नियंत्रण में अधिक भूमि नहीं है। बड़ा इलाका जंगलों से आच्छादित है। जमीन के बड़े हिस्से का स्वामित्व कुछ लोगों के पास है। उनका कहना था कि अधिकार अभिलेख बनाने के लिए सर्वे की जरूरत नहीं है। संपत्ति का डाटा बेस, निबंधन के समय म्यूटेशन और दस्तावेजों की सूची बनाने से भी यह काम हो सकता है। उन्होंने कई विकसित देशों का उदाहरण दिया, जहां भूमि सर्वेक्षण नहीं हुआ है। यहां तक कि ब्रिटेन में भी यह नहीं हुआ। जबकि ब्रिटिश  शासकों ने भारत में पहले भूमि सर्वेक्षण कराया, जिसे कैडेस्टल सर्वे कहा जाता है।