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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 27, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब तेज प्रताप ने RJD कार्यालय में बना दिया अखाड़ा, दंगल में आजमाए गए दांव

By Amit AlokEdited By:
Published: Sun, 27 Jan 2019 12:24 PM (IST)Updated: Mon, 28 Jan 2019 09:29 PM (IST)

गणतंत्र दिवस के अवसर पर जब तेज प्रताप यादव राजद कार्यालय गए, वह बंद मिला। इस कारण वे वहां जनता ...और पढ़ें

अब तेज प्रताप ने RJD कार्यालय में बना दिया अखाड़ा, दंगल में आजमाए गए दांव
अब तेज प्रताप ने RJD कार्यालय में बना दिया अखाड़ा, दंगल में आजमाए गए दांव

पटना [अमित आलोक]। राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव जनता से जुड़ने व अपनी बात कहने के लालू फॉर्मूला पर चल रहे हैं। राजद कार्यालय में जनता दरबार नहीं लगा सके तो वहां दंगल करा दिया। घबराइए नहीं, बात लड़ाई-झगड़े की नहीं, पहलवानी के दांव की हो रही है। तेज प्रताप यादव के जनता दरबार में अखाड़ा बना पहलवानी के दांव आजमाए गए। तेज प्रताप यादव भी इसका खूब मजा लेते दिखे।

यह है मामला
विदित हो कि गणतंत्र दिवस पर जनता दरबार के लिए राजद कार्यालय गए तेज प्रताप को मेन गेट बंद मिला।  इसके बाद किसी तरह ताला खुलवाकर जब वे अंदर गए तो कार्यालय बंद मिला। इस कारण वे अपना रोजाना लगने वाला जनता दरबार नहीं लगा पाए। भड़ककर उन्‍होंने प्रदेश राजद अध्‍यक्ष रामचंद पूर्वे को खूब खरी-खोटी सुनाई तथा औकात में रहने तक की नसीहत दे डाली। फिर, तेज प्रताप यादव ने राजद कार्यालय परिसर में पहलवानों का अखाड़ा सजा दिया।
उक्‍त दोनों घटनाओं को जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, कुछ राजद नेताओं ने बताया कि तेज प्रताप का पहलवानी का यह अखाड़ा पहले से निर्धारित था।

पहलवानों ने खूब दिखाए दांव
जो भी हो, राजद कार्यालय में सजे तेज प्रताप के अखाड़ा में पहलवानों ने खूब दांव आजमाए। पहलवान मो. निसार के नेतृत्‍व में मोतिहारी व दरभंगा के आधा दर्जन से अधिक पहलवानों ने करतब दिखाए। इस अवसर पर तेज प्रताप ने पहलवानों काे पुरस्‍कार भी दिए तथा कहा कि लालू यादव के दरबार में भी पहलवान करतब दिखाने आते थे।

लालू की राह पर तेज प्रताप
दरअसल, यह तेज प्रताप का अपनी बात कहने व मीडिया में बने रहने का अंदाज है। इसके लिए वे मिठाई छानने व घुड़सवारी करने से लेकर बांसुरी व शंख बजाते तक कई अंदाज में नजर आ चुके हैं। वे नेता के बाद अभिनेता तो बन ही चुके हैं, अब पहलवानी के दांव का भी मजा लेते दिखे हैं। ठीक उसी तरह, जैसे उनके पिता लालू यादव कभी बीच सड़क पर हेलीकॉप्‍टर उतार रिक्‍शा से सभा स्‍थल जाते थे।

बाप-बेटे में मन-मिजाज का कुछ फर्क
हां, बाप-बेटे में मन-मिजाज का कुछ फर्क जरूर है। तेज प्रताप की तरह लालू की भी फिल्‍मों में रुचि रही। उनकी महफिल में भी कलाकार जलवे बिखेरते थे। लेकिन लालू को लौंडा नाच खास पसंद था, जबकि तेज प्रताप कृष्‍ण भक्ति व भजन-प्रवचन के लिए जाने जाते हैं।

बोले तेज प्रताप: लालू के दरबार में भी आते थे पहलवान
तेज प्रताप यादव का पहलवानी दरबार इसी की कड़ी माना जा रहा है। तेज प्रताप कहते भी हैं कि उनके पिता के दरबार में भी पहलवान आते थे।