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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है- सुशील मोदी, राय बोले- कवि दिनकर होते तो नीतीश को कविता से जरूर देते चेतावनी

By Raman ShuklaEdited By: Yogesh Sahu
Published: Sun, 23 Apr 2023 10:03 PM (IST)

सुशील मोदी रविवार को गांधी मैदान के पास बापू सभागार में दिनकर शोध संस्थान की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर ...और पढ़ें

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है- सुशील मोदी, राय बोले- कवि दिनकर होते तो नीतीश को जरूर देते चेतावनी
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है- सुशील मोदी, राय बोले- कवि दिनकर होते तो नीतीश को जरूर देते चेतावनी

राज्य ब्यूरो, पटना। राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी ने कहा कि दिनकर की कविताओं की एक-एक पंक्ति व्यक्ति को झकझोर देती है।

जेपी के आंदोलन में उनकी एक पंक्ति सिंहासन खाली करो कि जनता आती है... ने इंदिरा गांधी सरकार को झकझोर दिया था।

मोदी रविवार को गांधी मैदान के पास बापू सभागार में दिनकर शोध संस्थान की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

बिहार भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि हम दिनकर जैसे महापुरुष को याद कर रहे हैं। उन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से देश में जब-जब आंदोलन हुआ तब तब जनता को जगाने का कार्य किया।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि दिनकर ने देश की एकता और समानता को अपने साहित्य के माध्यम से जगाने का कार्य किया है।

आज दिनकर जीवित होते तो वह नीतीश सरकार को अपराध और भ्रष्टाचार के लिए अपनी कविता के माध्यम से जरूर चेतावनी देते।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. संजय जयसवाल ने कहा कि दिनकर को पढ़कर हमारा बचपन बीता है। उनकी कविताओं में कई समस्याओं के बारे में बताया गया है, वह आज भी उपस्थित हैं।

आज बिहार में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। कार्यक्रम संयोजन दिनकर शोध संस्थान के संयोजक कुमार राघवेंद्र ने किया।

पुण्यतिथि कार्यक्रम में प्रमुख रूप से केंद्रीय मंत्री आरके सिंह, अश्विनी चौबे, भाजपा विधान मंडल दल के नेता विजय सिन्हा, पूर्व मंत्री मंगल पांडेय, नितिन नवीन, एमएलसी अनिल शर्मा, भाजपा राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा और भाजयुमो प्रदेश मीडिया प्रभारी सूरज पांडेय के अलावा कई सांसद, विधायक और भाजापा के प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित थे। मंच का संचालन राकेश ओझा और विकास सिन्हा ने किया।