कैंसर जागरूकता फैलाने में जुटे ओंको सर्जन डॉ. वीपी सिंह के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़ दिया जाए तो देश में बिहार में सर्वाधिक तम्बाकू का इस्तेमाल होता है। यहां के 53.5 प्रतिशत लोग तम्बाकू सेवन करते हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 35 है।

चिकित्सकों की माने तो तम्बाकू सबसे खतरनाक पोटेशियम सायनाइड जहर से भी घातक है क्योंकि इससे मरने वाले अधिकांश लोग उत्पादन क्षमता वाले अर्थात 25 से 65 वर्ष के होते हैं। साथ ही साइनाइड जिसके शरीर में जाता है, उसी की जान जाती है। तम्बाकू धुएं के रूप में तो आसपास रहने वालों को भी खतरनाक रोगों को तोहफा देती है।

एनएफएचएस -4 के सर्वे के अनुसार बिहार में दो तिहाई पुरुष तथा 8 प्रतिशत महिलाएं इसमें भी 5 प्रतिशत गर्भवती तथा 10.8 फीसद बच्चों को दूध पिलाने वालीं महिलाएं किसी न किसी रूप में तम्बाकू सेवन करती हैं। प्रदेश के हाईस्कूल में पढऩे वाले 61.4 प्रतिशत छात्र तथा 51.2 फीसद छात्राएं और 70 प्रतिशत से अधिक शिक्षक किसी न किसी रूप में तम्बाकू सेवन करते हैं।

पटना [जेएनएन]। पहली बार जब घोड़े के पेट में कीड़ों को मारने के लिए तम्बाकू का प्रयोग किया गया था तब किसी ने सोचा भी नहीं था एक दिन यह मनुष्यों की जान की सबसे बड़ी दुश्मन होगी।

आज देश के 27 करोड़ लोग घातक परिणामों को जानते हुए भी इसका सेवन कर रहे हैं। केवल तम्बाकूजनित बीमारियों से देश में हर वर्ष करीब 15 लोगों की मौत होती है। सबसे खतरनाक पहलू यह कि छात्रों में इसके सेवन की ललक बढ़ रही है। प्रदेश के आंकड़े तो और भी चौंकाने वाले हैं।

यहां हर वर्ष 80 हजार लोग और प्रतिदिन औसतन 280 लोग तम्बाकूजनित रोगों से असमय काल के गाल में जा रहे हैं।

कैंसर जागरूकता फैलाने में जुटे ओंको सर्जन डॉ. वीपी सिंह के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़ दिया जाए तो देश में बिहार में सर्वाधिक तम्बाकू का इस्तेमाल होता है। यहां के 53.5 प्रतिशत लोग तम्बाकू सेवन करते हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 35 है।

चिकित्सकों की माने तो तम्बाकू सबसे खतरनाक पोटेशियम सायनाइड जहर से भी घातक है क्योंकि इससे मरने वाले अधिकांश लोग उत्पादन क्षमता वाले अर्थात 25 से 65 वर्ष के होते हैं। साथ ही साइनाइड जिसके शरीर में जाता है, उसी की जान जाती है। तम्बाकू धुएं के रूप में तो आसपास रहने वालों को भी खतरनाक रोगों को तोहफा देती है।

एनएफएचएस -4 के सर्वे के अनुसार बिहार में दो तिहाई पुरुष तथा 8 प्रतिशत महिलाएं इसमें भी 5 प्रतिशत गर्भवती तथा 10.8 फीसद बच्चों को दूध पिलाने वालीं महिलाएं किसी न किसी रूप में तम्बाकू सेवन करती हैं। प्रदेश के हाईस्कूल में पढऩे वाले 61.4 प्रतिशत छात्र तथा 51.2 फीसद छात्राएं और 70 प्रतिशत से अधिक शिक्षक किसी न किसी रूप में तम्बाकू सेवन करते हैं।

23 को सुप्रीम कोर्ट में होगी चबाने वाली तम्बाकू पर प्रतिबंध की सुनवाई :

गुटखा के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2014 में पान मसाला, सुगंधित जर्दा, सुगंधित सुपारी की बिक्री, निर्माण, भंडारण व प्रदर्शन प्रतिबंधित कर दिया था। ऐसा करने वाला बिहार देश का नौवां राज्य था। हालांकि, प्रतिबंध के बाद भी कार्रवाई की खानापूर्ति कर व्यापारी गुपचुप ढंग से अपना कारोबार करते रहे।

पांच का सामान 12 रुपये में बेचा गया। इसी बीच हाईकोर्ट ने जर्दा को खाद्य पदार्थ नहीं मानते हुए खाद्य संरक्षा आयुक्त के प्रतिबंध के अधिकारी को गलत करार दिया। इसके साथ ही प्रतिबंध खत्म कर दिया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

वहां भी अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि प्रतिबंध गुटखा की बिक्री पर है। कंपनियां पान मसाला व जर्दा अलग-अलग बना कर बेच रहे हैं, जिन पर प्रतिबंध नहीं है। राज्य सरकारों ने फिर अपना पक्ष रखा है, 23 जनवरी 2017 को इसकी सुनवाई होनी है।

दो वर्ष से प्रतिबंध, बिल्कुल बेअसर :

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने पान मसाला, सुगंधित तम्बाकू व सुगंधित सुपारी के क्रय-विक्रय, निर्माण, भंडारण व प्रदर्शन को प्रतिबंधित किया था। शुरुआती दौर में खाद्य संरक्षा विभाग ने कार्रवाई की और बाद में मिलीभगत से छिप-छिपाकर बिक्री होती रही।

हाईकोर्ट में मामला जाने पर कार्रवाई रोक दी गई और अंत में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस से उसे जोड़ दिया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय आने तक प्रतिबंध बरकरार रखने की छूट दी हुई है। लेकिन, खाद्य संरक्षा विभाग में मानव संसाधन संकट के कारण पटना में हुई छिटपुट कार्रवाइयों के अलावा प्रदेश में कहीं कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बताते चलें कि प्रदेश में 62 प्रतिशत पुरुष व 40 प्रतिशत महिलाएं चबाने वाली तम्बाकू का सेवन करते हैं। महाराष्ट्र, मिजोरम, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, असम, गोवा के बाद गत माह कर्नाटक भी इस पर प्रतिबंध लगा चुका है। बिहार प्रतिबंध लगाने वाला देश का नौवां राज्य था।

तम्बाकू से होने वाले रोग :

- मुंह, गला, फेफड़े, कंठ खाद्य नली, मूत्राशय, गुर्दा, पैनक्रियाज, सेरेविक्स कैंसर

- तम्बाकू सेवन से ब्रोंकाइटिस व इम्फीसिया जैसी सांस में तकलीफ की समस्याएं होती हैं।

- हृदय व रक्त संबंधी रोग तेजी से बढ़ते हैं। तम्बाकू के शौकीनों की जान अधिकतर हृदयाघात से जाती है।

- पुरुषों में नपुंसकता, महिलाओं में जनन क्षमता में कमी व अन्य प्रजनन समस्याएं होती हैं।

- सांस में बदबू, मुंह-आंखों के आसपास झुर्रियां

- धूम्रपान करने वालों के आसपास रहने वालों में बढ़ जाती रोग की आशंका

- घर में धूम्रपान से बच्चों को निमोनिया, श्वांस रोग, अस्थमा, फेफड़े की गति धीमी जैसे रोग।

- हर सिगरेट के साथ 14 मिनट उम्र घट जाती है।

इतने गुना बढ़ जाती आशंका : हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एके झा ::

- फेफड़े कैंसर की आशंका 20-25 गुना ज्यादा

- दिल का दौरा पडऩे का खतरा 2 से तीन गुना अधिक

- अचानक मौत होने का खतरा 3 गुना अधिक

- सामान्य व्यक्ति की तुलना में वह व्यक्ति 30 से 60 गुना अधिक बीमार रहता है।

तम्बाकू बंद फिर दुष्प्रभाव बाकी :

एम्स पटना की रेडिएशन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रितांजलि सिंह के अनुसार प्रदेश में कुछ हद तक तम्बाकू के शौकीनों की संख्या घटी है। बावजूद इसके तम्बाकू से होने वाले कैंसर रोगियों की संख्या में कमी आने के बजाय यह बढ़ी ही है। इनमें से अधिसंख्य लोगों ने कहा कि वह लंबे समय से तम्बाकू का इस्तेमाल छोड़ चुके हैं।

इसका कारण यह है कि एक बार तम्बाकू की गिरफ्त में आए शरीर को पूरी तरह से शुद्ध होने में करीब 15 वर्ष लगते हैं। इस बीच कभी भी तम्बाकूजनित कोई रोग शिकंजा कस सकता है।

मुंह के कैंसर की तुरंत पहचान को हर छह माह में मिलें दंत चिकित्सक से :

कैंसर व फेस कॉस्मेटिक्स जैसी दंत चिकित्सा की नई विधाओं पर काम कर रही डॉ. ज्योति प्रकाश के अनुसार जो लोग किसी भी रूप में कम या ज्यादा चबाने या दबाने वाली तम्बाकू का सेवन कर रहे हैं, वे आवश्यक रूप से हर छह माह में अपने दंत चिकित्सक से जांच जरूर करवाते रहें।

तम्बाकू सेवन के दुष्प्रभाव सबसे पहले मुंंह के अंदर प्रकट होते हैं, जिन्हें दंत चिकित्सक ही पकड़ सकता है। यदि मुंह के कैंसर को पहले चरण में पकड़ लिया गया तो 80 प्रतिशत, दूसरी स्टेज में 70 प्रतिशत, तीसरे चरण में 50 तथा चौथे चरण में 40 प्रतिशत तक जान बचने की संभावना होती है।

इसके अलावा तंबाकू सेवन से लार कम बनती है तथा मसूड़े क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। दांत काले होने के साथ टूटने की आशंका बढ़ जाती है। सांस से बैक्टीरिया व वायरस मुंह से अंदर जा कर गंभीर रोगों को जन्म देते हैं।

लत छुड़ाने की नहीं कोई व्यवस्था :

राजधानी समेत प्रदेश में तम्बाकू की लत छुड़ाने के लिए कोई सेंटर नहीं है। कुछ नशा मुक्ति केंद्र तम्बाकू छोडऩे के इच्छुक लोगों की काउंसिलिंग कर इसमें सहायता देते हैं। ऐसे ही चिकित्सकों के कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं।

तम्बाकू छोडऩे में उपयोगी टिप्स :

- आसपास से तम्बाकू की सभी चीजें हटा दें।

- एक दिन तय कर उस दिन बिल्कुल तम्बाकू सेवन न करें।

- तम्बाकू छोडऩे के बाद शरीर के जहरीले व रासायनिक पदार्थों से मुक्त होने के अच्छे प्रभाव पर गौर करें।

- तलब लगे तो उसे थोड़ी देर के लिए भुला दें। धीरे-धीरे घूंट लेकर पानी पिएं, गहरी सांस लें व ध्यान हटाने के लिए दूसरा कार्य करें।

- सामान्य दिनचर्या बदलें, सुबह टहलने जाएं।

- ऐसी जगह न जाएं जहां तलब तेज हो।

- तम्बाकू की तलब घटाने को सौंप, मिश्री, लौंग या दालचीनी का प्रयोग करें।

- ऐसे दोस्तों के साथ रहें जो तम्बाकू सेवन से दूर रहने को प्रेरित करें।

- तम्बाकू सेवन न करने से होने वाली बचत को ध्यान कर अपने फैसले को मजबूत बनाएं।

- यदि तम्बाकू छोड़ देंगे तो लोग आपके नक्शे-कदम पर चलेंगे।

तम्बाकू के घातक रसायन :

- निकोटिन : कीड़े मारने में इस्तेमाल की जाने वाली दवा

- अमोनिया :फर्श की सफाई में इस्तेमाल होने वाला पदार्थ

- आर्सेनिक : चींटी मारने वाला जहरीला पदार्थ

- कार्बन मोनो ऑक्साइड : कार से निकलने वाली खतरनाक गैस

- हाइड्रोजन साइनाइड : गैस चैंबर में इस्तेमाल की जाने वाली जहरीली गैस

- नेप्थालीन : इससे मोथबॉल्स बनाए जाते हैं।

- तारकोल : सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला पदार्थ

- रेडियोएक्टिव पदार्थ : परमाणु हथियार में इस्तेमाल होने वाला पदार्थ

शरीर के हर अंग पर दुष्प्रभाव :

मस्तिष्क पर :

- ब्रेन हैमरेज (लकवा) का जोखिम अधिक, जो महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करती है उन्हें लकवा का खतरा ज्यादा होता है।

मुंह-होंठ संबंधी रोग :

मुंह व स्वर ग्रंथि में कैंसर के साथ स्वरयंत्र में सूजन से आवाज भारी हो जाती है।

रक्त संचार प्रणाली संबंधी रोग :

- हृदय संबंधी रोग जैसे हृदयाघात आदि के अलावा उच्च रक्ताचाप, हृदय की धमनियों की बीमारी के कारण पैरों में खून का ठीक से प्रवाहीत नहीं होना से कई बार पैर काटने तक का जोखिम।

पेट व आंत पर :

पेट के भीतर की परत नाजुक हो जाती है। इससे रक्तस्त्राव की आशंका बढ़ जाती है। आंत के घाव (अल्सर) देर से ठीक होते हैं। कैंसर भी हो सकता है।

- अग्नाशय, गुर्दे और मूत्राशय का कैंसर होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

युवकों-युवतियों को बना रही बांझ :

पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या व उनकी सक्रियता कम हो जाती है। वहीं महिलाओं में अंडे क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, मासिक अनियमित और हार्मोन स्तर असंतुलित हो जाता है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति जल्द हो जाती है और स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही तम्बाकू सेवन से स्त्री व पुरुष दोनों की ही यौनेच्छा कम हो जाती है।

श्वास प्रणाली : ब्रांकाइटिस, क्रानिक ऑब्सट्रेक्टिव पल्मोनरी डिजीजी (सीओपीडी) व फेफड़े का कैंसर होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

गर्भस्थ शिशु के लिए भी खतरा :

- यदि कोई महिला तम्बाकू उत्पादों का सेवन करती है तो शिशु का वजन औसत से कम होने के साथ अचानक मौत होने की आशंका ज्यादा होती है। तम्बाकू सेवन से अक्सर समय पूर्व प्रसूति का जोखिम रहता है। गर्भपात के साथ मृत शिशु के जन्म लेने की आशंका कई गुना ज्यादा होती है। शिशु का शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होता है और मां के दूध से शिशु के शरीर में निकोटिन पहुंचने की आशंका होती है।

हड्डियां व इम्यून सिस्टम होता कमजोर :

तम्बाकू इस्तेमाल से जहां हड्डियां कमजोर होने से आस्टियोपोरेसिस रोग हो जाता है वहीं रोगों से लडऩे की प्रतिरोधक शक्ति कम होने से बार-बार संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

-------------------

नन स्मोकिंग पार्टनर की मांग बढ़ी :

इस बीच एक खुशखबरी है कि महिलाएं इसके खतरों के प्रति सचेत हुई हैं। एक मैट्रीमोनियल पोर्टल के सर्वे की माने तो धूम्रपान के आदी लोगों के आस-पास रहने से स्वास्थ्य पर पडऩे वाले बुरे असर को देखते हुए लड़कियां 'नान स्मोकिंग लाइफ पार्टनर को प्रमुखता दे रही हैं।

तम्बाकू से भंग हो रहा मोह :

जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के 8 जनवरी 2014 के अंक में प्रकाशित सर्वेक्षण रपट के अनुसार, भारत में 1980 से 2012 के बीच सिगरेट पीने वाले पुरुषों की संख्या 33.8 प्रतिशत से घटकर 23 प्रतिशत रह गई है।

वहीं भारतीय महिलाएं धूम्रपान के मामले में अमेरिकी महिलाओं के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर आ गई हैं। यहां अब 1.21 करोड़ से अधिक महिलाएं बीड़ी सिगरेट पीती हैं। धुआंरहित तम्बाकू जैसे-जर्दा, खैनी और गुटखा का सेवन करने वाले 70 प्रतिशत लोग भी भारत में ही हैं। बीड़ी पर कर नहीं होने से गरीबों इसकी खपत बहुत अधिक है।

धूम्रपान के लिए दंड का विधान :

-धूम्रपान के घातक दुष्प्रभावों को देखते हुए कई बार दण्ड विधान बनाए गए।

-भारत में जहांगीर बादशाह ने तंबाकू का प्रयोग करने वालों का मुंह काला करके गधे पर बिठा पूरे नगर में घुमाने का विधान बनाया था।

- तुर्की में जो लोग धूम्रपान करते थे, उनके होंठ काट दिए जाते थे। जो तंबाकू सूंघते थे उनकी नाक काट दी जाती थी।

- ईरान में भी तंबाकू का प्रयोग करने वालों के लिए कड़े शारीरिक दंड की व्यवस्था थी।

हुक्का-चिलम भी है सेहत के लिए अत्यन्त घातक :

हरियाणा समेत देश के कई राज्यों के लोगों का मानना है कि हुक्के में पानी के जरिए तंबाकू का धुंआ ठंडा होकर शरीर में पहुंचता है। इसलिए हुक्के से तंबाकू पीने पर नुकसान नहीं होता है। हाल ही में जयपुर में हुए एक शोध में पता चला है कि परंपरागत हुक्के का सेवन सिगरेट से दस गुना अधिक हानिकारक है।

जयपुर एसएमएस अस्पताल मेडिकल कॉलेज और अस्थमा भवन की टीम ने शोध में पाया कि हुक्के में कार्बन मोनो ऑक्साइड सिगरेट की तुलना में ज्यादा घातक है, इसलिए इसे छोडऩे में ही भलाई है।

डरावने हैं आंकड़े :

- देश में 50 प्रतिशत पुरुष और 20 प्रतिशत महिलाएं कैंसर की शिकार हैं।

- इनमें से 90 प्रतिशत मुंह के कैंसर, 90 प्रतिशत फेफड़े के कैंसर और 77 प्रतिशत नली के कैंसर का कारण धूम्रपान है।

- धूम्रपान जनित रोगों से निपटने में भारत सरकार लगभग 27 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च करती है।

-चीन और ब्राजील के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा तम्बाकू उत्पादक देश है।

- 20 फीसद तम्बाकू का इस्तेमाल सिगरेट में होता है।

- तंबाकू उद्योग से 50 हजार करोड़ मुनाफा होता है।

- 20 करोड़ लोग देश में धूम्रपान के चंगुल में हैं।

-45 लाख लोग दिल की बीमारी से ग्रसित हैं।

-विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार चीन में 30 प्रतिशत, भारत में 11 प्रतिशत, रूस में 5.5 प्रतिशत, अमेरिका में 5 प्रतिशत और जर्मनी में 2.5 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं।

- विश्व में हर 6 सेकेंड में धूम्रपान की वजह से एक मौत होती है।

तम्बाकू का तत्व, होने वाला रोग

- निकोटिन : कैंसर, ब्लड प्रेशर

-कार्बन मोनोक्साइड हृदय रोग, दमा, अंधापन

-मार्श गैस शक्तिहीनता, नपुंसकता

-अमोनिया पाचन शक्ति मंद, पित्ताशय विकृति

-कोलोडन स्नायु दुर्बलता, सिरदर्द

-पापरीडिन आंखों में सूखापन, अजीर्ण

- कॉर्बोलिक एसिड निद्रा, चिड़चिड़ापन, भूलने का रोग

- परफैरोल : दांत पीले, मैले व कमजोर

- ऐजालिन सायनोजन : रक्त विकार

- फॉस्फोरल प्रोटिक एसिड: उदासी, टीबी, खांसी एवं थकान

तंबाकू तथा उसके धुएं में पाए जाने वाले 400 केमिकल में से 60 से भी अधिक का कैंसर से सीधा संबंध होता है।

धूम्रपान से प्रतिवर्ष छह लाख नये लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विश्व में धूम्रपान करने वालों में दस प्रतिशत लोग भारत में रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार धूम्रपान करने वाले के सम्पर्क में रहने से 80 लाख लोग प्रति वर्ष मौत के मुंह में समा जाते हैं।

379000 लोग हृदय रोगों से, 36900 लोग अस्थमा से व 214000 फेफड़े के कैंसर का शिकार होते हैं। जिन बच्चों के मां-बाप या परिजन स्मोकिंग के आदी होते हैं उनमें नीमोनिया, अस्थमा व फेफड़ों का विकास धीमी गति से होने की संभावना ज्यादा बनी रहती है।

कुछ वर्ष पूर्व ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे बिहार द्वारा स्कूलों में सर्वेक्षण कराया गया था। जिसमें 45.8 फीसदी छात्रों द्वारा सिगरेट, तंबाकू या पान मसाला के प्रयोग की बातें सामने आई थीं। जिसमें 19.8 छात्रों ने कभी ना कभी सिगरेट पी थी जबकि 13.7 फीसदी सिगरेट का सेवन करते हैं।

जिसमें 16.5 छात्र तो 4.6 छात्राएं हैं। राज्य के ग्रामीण इलाकों में सिगरेट, बीड़ी पीने वालों की भी दर 30 फीसद से ऊपर है।

धूम्रपान का जीन (डीएनए) पर बहुत तेजी से असर डाल कर लोगों को नपुंसक बना रहा है। प्रति सिगरेट के साथ सात मिनट की दर से आयु कम हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में प्रतिदिन 80000 बच्चे धूम्रपान की शुरुआत करते हैं।

धूम्रपान करने वालों में फेफड़े का कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। देश में धूम्रपान से होने वाला कैंसर 76 फीसद पुरुषों में तथा 24 प्रतिशत महिलाओं में पाया गया है। सर्वे की माने तो मुंह केकैंसर से पीडि़त लोगों में से 91 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं।

ये हैं सिगरेट रूपी तम्बाकू के घातक रसायन :

निकोटिन : कीड़े मारने में इस्तेमाल की जाने वाली दवा। यह काफी तेजी से सक्रिय होता है। इसी से लत लगती है।

बेंजीन : इसमें कोयला और पेट्रोलियम जैसे ज्वलनशील पदार्थों के गण होते हैं। यह सिगरेट के जले रहने में मदद करता है। इसकी वजह से (ल्यूकेमिया) खून का कैंसर हो सकता है।

फॉर्मेल्डिहाइड : जहरीला रसायन, इसका इस्तेमाल सडऩे से बचाने के लिए किया जाता है। इससे कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।

अमोनिया : टॉयलेट क्लीनर और ड्रायक्लिनिंग में इस्तेमाल होता है। यह तंबाकू से निकोटिन को अलग कर गैस में बदलता है।

एसिटोन : इसका इस्तेमाल नेल पॉलिश हटाने में होता है। इसमें च्वलनशील गुण होता है जो फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है।

टार : स्मोकिंग के समय धुएं के रूप में यह फेफड़े में जमा होता है। स्मोकिंग के दौरान जितनी टार बनती है, उसका 70 फीसद फेफड़ों में जमा होता है।

-आर्सेनिक : (चूहे मारने का जहर) - हाइड्रोजन साइनाइड : गैस चैंबर में इस्तेमाल किया जाने वाला रसायन।

- रेडियोएक्टिव पदार्थ : परमाणु हथियार में इस्तेमाल होने वाला पदार्थ

धूम्रपान से खतरे :

-एक सिगरेट में 9 मिली ग्राम निकोटीन होता है, जो जलकर 1 मिली ग्राम रह जाता है। निकोटीन सीधे नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन यह सैकड़ों केमिकल के साथ रिएक्शन कर टार बनाता है जो फेफड़ों के ऊपर परत के रूप में चढ़ कर उन्हें खत्म कर देता है। सूखे हुए एक ग्राम तंबाकू में निकोटीन का स्तर 13.7 से 23.2 मिलीग्राम तक होता है।

धूम्रपान से होने वाले रोग :

- फेफड़ों का कैंसर :

सबसे अधिक असर मनुष्य के फेफड़ों पर पड़ता है। 90 प्रतिशत फेफड़ों का कैंसर पुरुषों में और 80 प्रतिशत महिलाओं में होता है।

- मुंह का कैंसर : भारत में कैंसर के मरीजों की कुल संख्या में 40 प्रतिशत मरीज मुंह के कैंसर से पीडि़त हैं। इसका एकमात्र कारण धूम्रपान एवं तंबाकू सेवन है।

- बर्जर डीजीज : अधिक धूम्रपान से पांव की नसों में बीमारी हो जाती है। कभी-कभी पांव काटना पड़ता है।

- हृदय रोग : आइजीआइसी के उप निदेशक डॉ. एके झा के अनुसार स्ट्रोक व हार्टअटैक की अधिक आशंका कई संभावना रहती है। धूम्रपान से उच्च रक्तचाप व कार्डियोवैस्कुलर रोग अधिक होते हैं। इससे दिल का दौरा पडऩे का खतरा 2 से तीन गुना अधिक, अचानक मौत होने का खतरा 3 गुना अधिक होता है। साथ ही सामान्य व्यक्ति की तुलना में व्यक्ति 30 से 60 गुना अधिक बीमार रहता है।

- मोतियाबिंद : धूम्रपान करने वालों में मोतियाबिंद होने की 40 प्रतिशत अधिक आशंका रहती है।

- बहरापन : धूम्रपान करने वाले की सुनने की शक्ति कम हो जाती है। बहरेपन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

- पेट की बीमारी : पेट में छाले हो जाते हैं, स्मोकर्स अल्सर का इलाज कठिन है एवं ये छाले बार-बार होते हैं।

- हड्डियों के रोग : आस्टियोपोरोसिस होने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

टूटने पर हड्डी जुडऩे में 80 प्रतिशत अधिक समय लगता है।

- चेहरे पर झुर्रियां : धूम्रपान करने वाले की त्वचा का लचीलापन कम हो जाता है और व्यक्ति जल्दी बूढ़ा दिखने लगता है।

कहा था महात्मा गांधी ने

- महात्मा गांधी ने कहा है, 'अब तक मैं यह नहीं समझ पाया कि तंबाकू पीने का इतना जबरदस्त शौक लोगों को क्यों है? नशा हमारे धन को ही नष्ट नहीं करता, वरन स्वास्थ्य और परलोक को भी बिगाड़ता है।

महात्मा गांधी

कहा था मार्गरेट चान ने

- तम्बाकू एक मात्र उद्योग है जो एक ही समय में भारी मुनाफा भी कमाता है और अपने उपभोक्ताओं की सेहत खऱाब कर उनकी जान तक ले लेता है।

मार्गरेट चान

जान लेने में है अव्वल :

असंक्रामक रोगों में सर्वाधिक जाने अब हृदयाघात के बजाय कैंसर से जा रही हैं। देश में करीब 70 प्रतिशत कैंसर तम्बाकू से की वजह से होता है। दुनिया में करीब 50 लाख लोगों की मौत हर वर्ष तम्बाकूजनित रोगों से होती है। वर्ष 2020 में यह आंकड़ा 1 करोड़ पार करने जाने की आशंका है। भारत में वर्ष 2020 तक करीब 15 लाख लोगों की जान हर साल तम्बाकूजनित रोगों से होगी। प्रदेश में तो हालात और भयावह हैं।

यहां हर वर्ष 80 हजार लोग और प्रतिदिन औसतन 280 लोग तम्बाकूजनित रोगों से असमय काल के गाल में जा रहे हैं। आइजीआइएमएस व पीएमसीएच समेत किसी भी सरकारी अस्पताल में कैंसर सर्जरी की सुविधा नहीं होने के कारण एक व्यक्ति की मौत के साथ पूरा परिवार आर्थिक संकट में आ जाता है।

- करीब 27 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तम्बाकू सेवन करते हैं देश में

- 55 हजार नए बच्चे हर साल हो रहे इसके लती

- 15 लाख लोग तम्बाकूजनित रोगों से मरते हैं हर साल

- 20 प्रतिशत लोग सिगरेट

- 40 प्रतिशत लोग बीड़ी

- 40 प्रतिशत लाग पान, खैनी, गुटखा के रूप में करते हैं सेवन

सभी आंकड़े आइसीएमआर के

54 प्रतिशत : नार्थ ईस्ट के 8 राज्यों, बिहार, गोवा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु व पश्चिम बंगाल के बच्चे दस वर्ष से पहले पीते जीवन की पहली सिगरेट

87.8 प्रतिशत बच्चे मणिपुर के पीते हैं दस वर्ष से पहले जीवन की पहली सिगरेट

तम्बाकू या सुपारी दोनों प्राकृतिक उत्पाद हैं, लेकिन इससे इसकी घातकता कम नहीं होती है। डॉक्टरों ने शोध के बाद एक पंक्ति में बोलचाल की भाषा में निष्कर्ष दिया है, उससे ही घातकता साफ पता चलती है। डॉक्टरों के अनुसार यह दुनिया के सबसे जहरीले पदार्थ पोटेशियम सायनाइड या सबसे खतरनाक माने जाने वाले नागिन के बदले से भी कई गुना ज्यादा खतरनाक है।

यदि आपने तीन साल तक ठीकठाक मात्रा में इसका सेवन कर लिया तो इसका दुष्प्रभाव खत्म होने में करीब 15 वर्ष लगते हैं। इस बीच आपको कभी भी तम्बाकूजनित गंभीर रोग हो सकते हैं। ये रोग इतने चुपचाप तरीके से हमला करते हैं कि सामान्यत: अंतिम क्षणों में ही इसका पता चलता है।

Indian T20 League

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

kumbh-mela-2021