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    Bihar Teacher Salary: शिक्षकों का वेतन सत्यापन कराना अनिवार्य, वरना रुक जाएगी सैलरी; पढ़ें विभाग का नया आदेश

    बिहार में विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। ऐसे शिक्षकों के लिए वेतन सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने कहा है कि जो भी शिक्षक वेतन सत्यापन नहीं कराएंगे उनके वेतन पर रोक लगा दी जाएगी। विभाग ने 15 सितंबर तक ऐसे शिक्षकों की सूची मांगी है जिन्होंने अभी तक वेतन सत्यापन नहीं कराया है।

    By Dina Nath Sahani Edited By: Rajat Mourya Updated: Mon, 09 Sep 2024 07:37 PM (IST)
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    बिहार में शिक्षकों का वेतन सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का वेतन सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों के अधिकारियों को आगाह किया कि जिन शिक्षकों और कर्मचारियों ने वेतन सत्यापित नहीं कराया है, वे वेतन सत्यापित करा लें, अन्यथा उनके वेतन पर रोक लगाई जाएगी।

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    साथ ही विश्वविद्यालयों से 15 सितंबर तक यह जानकारी मांगी गई कि अभी तक कितने शिक्षकों और कर्मचारियों ने वेतन सत्यापन कराया है।

    शिक्षा विभाग ने अपने पूर्व के दिशा-निर्देश का स्मरण कराते हुए विश्वविद्यालयों ये कहा है कि नये वेतनमान में किये जाने वाले वेतन निर्धारण पर वेतन सत्यापन कोषांग की सहमति जरूरी है। इसके लिए वेतन सत्यापन कोषांग में वैसे शिक्षक और कर्मचारी आवेदन करें जिन्होंने अभी तक वेतन सत्यापन नहीं कराया है।

    छठा और सातवां वेतनमान में वेतन निर्धारण का सत्यापन नहीं हुआ

    शिक्षा विभाग के मुताबिक, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में ऐसे शिक्षकों की संख्या मांगी गई जिन शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों का छठा एवं सातवां दोनों वेतनमान में वेतन निर्धारण का सत्यापन नहीं हुआ है।

    जिन शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन निर्धारण पर वेतन सत्यापन कोषांग द्वारा आपत्ति जतायी गयी है, उन आपत्तियों का निराकरण विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा।

    इससे पहले भी कुलसचिवों की बैठक में वेतन सत्यापन कोषांग द्वारा कहा गया कि गैर शिक्षकों के मामले में वेतन निर्धारण में ज्यादा परेशानी होती है। वेतन सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय से विहित प्रपत्र में आवेदन प्राप्त नहीं होते हैं। उस पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर भी नहीं होते। इससे दिक्कत होती है।

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