बिहार में सरकारी सेवकों की विदेश यात्रा के नियम हुए सख्त, देनी होंगी ये 10 जानकारियां
सरकारी सेवकों को अब विदेश यात्रा पर जाने से पहले यह बताना होगा कि इस पर होने वाले खर्च का स्रोत क्या है। इससे पहले निजी यात्रा के लिए इजाजत लेने से पहले खर्च का स्रोत बताने की बाध्यता नहीं थी।

राज्य ब्यूरो, पटना: सरकारी सेवकों को अब विदेश यात्रा पर जाने से पहले यह बताना होगा कि इस पर होने वाले खर्च का स्रोत क्या है। इससे पहले निजी यात्रा के लिए इजाजत लेने से पहले खर्च का स्रोत बताने की बाध्यता नहीं थी। सामान्य प्रशासन विभाग के हालिया आदेश में इसे अनिवार्य कर दिया गया है। समझा जाता है कि यह जानकारी इन आरोपों से बचने के लिए ली जा रही है, जिसमें कहा जाता है कि उपकृत होने वाले लोग या एजेंसियां सरकारी सेवकों को विदेश की सैर कराती हैं। बदले में अनुचित लाभ लेती हैं। चर्चित पशुपालन घोटाला के दौरान इस तरह के आरोप कई अधिकारियों और राजनेताओं पर लगे थे।
निजी विदेश यात्रा के लिए लेनी पड़ती है इजाजत
मालूम हो कि सरकारी सेवकों को निजी विदेश यात्रा के लिए सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है। सरकारी सेवक प्राय: सैर, इलाज, स्वजनों से मुलाकात अथवा बच्चों की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के नए आदेश के तहत उन्हें आवेदन के साथ पांच बिन्दुओं की जानकारी देनी होगी। यात्रा का उद्देश्य और प्रस्तावित देशों के बारे में जानकारी सामान्य है। लेकिन, अब यह भी बताना होगा कि यात्रा के दौरान आवागमन, आवासन, वीजा आदि पर अनुमानित कितना खर्च होगा। पांचवी अनिवार्य जानकारी यह देनी होगी कि खर्च का स्रोत क्या है।
इन पर रहेगी खास नजर
विदेश यात्रा वाले आवेदन में कुछ अधिकारियों पर खास नजर है। आवेदन में इसका जिक्र करना होगा कि क्या आवेदक ऐसे पद पर हैं, जिन्हें बड़ी मात्रा में सरकारी राशि के संचालन की जिम्मेवारी है। क्या वे गोपनीय अथवा अति गोपनीय विषयों का निष्पादन करते हैं। अगर कोई गंभीर आरोप है तो उसका विवरण कागजातों के साथ देना होगा। सेवाकाल में निलंबित हैं तो उसका भी जिक्र करना होगा। पांचवी जानकारी अनुशासनिक कार्रवाई और आपराधिक मामलों के बारे में मांगी गई है। इन दोनों का विवरण भी कागजात के साथ देना होगा।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।