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    Bihar Politics: वह चुनावी महासमर जिसमें एक सीट जीतने को तरस गई RJD; क्या इस 'खेल' कर पाएंगे लालू यादव?

    Bihar Political News in Hindi लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। सभी दल अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बिहार का सियासी पारा दिन प्रति दिन हाई होता जा रहा है। ऐसे में 2019 का लोकसभा चुनाव के परिणाम भी लोगों के जेहन में हैं जब राजद एक सीट जीतने के लिए तरस गई थी।

    By Vikash Chandra Pandey Edited By: Mohit Tripathi Updated: Sun, 31 Mar 2024 07:31 PM (IST)
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    वह चुनावी महासमर जिसमें एक सीट जीतने को तरस गई RJD। (फाइल फोटो)

    सुनील राज, पटना। Lok Sabha Elections 2024 । लोकसभा चुनाव 2024 कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रहा है। एक ओर जहां एनडीए 2019 के लोकसभा चुनाव को दोहराने की चुनौती से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर महागठबंधन के सामने भी बीते चुनाव में मिली बड़ी पराजय से बाहर आने की अकुलाहट में है।

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    2019 में मोदी लहर के बीच कांग्रेस ने कम से कम एक सीट जीतकर अपनी प्रतिष्ठा किसी तरह बचाए रखी, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) शून्य पर बोल्ड हुआ था। वह पहला मौका था जब राजद किसी चुनाव में बुरी तरह से पराजित हुआ था। लिहाजा राजद को हार के उस अपमान से बाहर आने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।

    आसान नहीं होगी राह

    लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले राजद ने सहयोगियों को विश्वास में लेकर 26 सीटें प्राप्त तो जरूर कर ली हैं, लेकिन आगे की राह उतनी ही मुश्किल भरी है। इसकी वजह है पार्टी का चुनाव में स्ट्राइक रेट। राजद ने 2019 में सहयोगियों से 20 सीटें बंटवारे में ली थी। उनमें से आरा उसने भाकपा माले को दी थी, जबकि शेष 19 सीटों पर खुद लड़ा।

    इन सीटों पर उतारे थे उम्मीदवार, एक जीत भी नहीं हुई नसीब

    राजद ने गोपालगंज, सिवान, महाराजगंज, सारण, पाटलिपुत्र, बक्सर, जहानाबाद, नवादा, जमुई के साथ ही मधेपुरा, अररिया, झंझारपुर, दरभंगा, शिवहर, सीतामढ़ी, हाजीपुर, वैशाली के अलावा बेगूसराय और बांका में प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन पार्टी एक भी सीट जीत नहीं पाई।

    वोट प्रतिशत में भी दिखी थी बड़ी गिरावट

    उक्त लोकसभा चुनाव में राजद का वोट प्रतिशत 15.68 प्रतिशत था। राजद की सहयोगी कांग्रेस ने नौ सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उसे एक सीट पर सफलता मिली। कांग्रेस का वोट प्रतिशत 7.7 प्रतिशत रहा। रालोसपा ने पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, वोट प्रतिशत था 3.66 प्रतिशत।

    अन्य सहयोगी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने तीन सीटों पर उम्मीदवार दिए और पार्टी को 2.39 प्रतिशत वोट मिले। विकासशील इंसान पार्टी भी उक्त चुनाव में राजद के साथ थी। उसे तीन सीटें मिली, परंतु पार्टी सभी सीटों पर पराजित रही, हालांकि पार्टी को करीब 1.66 प्रतिशत वोट जरूर मिले।

    एनडीए के दलों के वोट प्रति में दिखी थी बड़ी उछाल

    दूसरी ओर एनडीए गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे करीब 23.6 प्रतिशत वोट मिले। सहयोगी जदयू को 21.86 प्रतिशत और लोक जनशक्ति पार्टी को 7.86 प्रतिशत वोट मिले।

    क्या है राजद का दावा?

    वोट प्रतिशत में एनडीए के मुकाबले महागठबंधन का प्रदर्शन काफी खराब रहा। हालांकि राजद का दावा है कि महागठबंधन की 17 महीने चली सरकार में जो काम हुए हैं, उनका असर इस चुनाव में जरूर पड़ेगा।

    पार्टी का वोट प्रतिशत भी बढ़ेगा और अधिसंख्य सीटों पर जीत भी होगी। दावों के बीच हकीकत यह है कि राजद 26 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। उसे रणनीति बनाकर मैदान में उतरना होगा, क्योंकि उसके सामने भाजपा-जदयू के 22 उम्मीदवार होंगे।