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    फ्लाई ऐश ब्रिक निगल रही लाल ईंट का बाजार, प्रति ट्राली तीन हजार रुपये पड़ रही सस्ती

    By Akshay PandeyEdited By:
    Updated: Sat, 16 Apr 2022 04:52 PM (IST)

    कोयला और डीजल की कीमत बढ़ने से दाम तो बढ़े ही थे एक अप्रैल से छह प्रतिशत जीएसटी लगने से भाव और तेज हो गया है। लाल ईंट पर एक प्रतिशत जीएसटी था जो एक अप्रैल से बढ़कर छह प्रतिशत हो गया है।

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    लाल ईंट के मुकाबले फ्लाई ऐश ब्रिक सस्ती पड़ रही है। सांकेतिक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, पटना : लाल ईंट के बाजार को महंगाई फीका कर दी है। कोयला और डीजल की कीमत बढ़ने से दाम तो बढ़े ही थे, एक अप्रैल से छह प्रतिशत जीएसटी लगने से भाव और तेज हो गया है। असर यह कि लोग फ्लाई ऐश ब्रिक की ओर बढ़ चले हैं। जनवरी में लाल ईंट की कीमत 15,000 रुपये प्रति ट्राली थी। एक ट्राली में 1500 ईंट आती है। अब इसकी कीमत 17,000 रुपये ट्राली हो गई है। लाल ईंट के महंगा होने की वजहें भी हैं। जनवरी की तुलना में कोयला का भाव 10 रुपये से बढ़कर 26 रुपये किलो हो गया है। इसी अवधि में डीजल करीब 12 रुपये लीटर महंगा हुआ है। लाल ईंट पर एक प्रतिशत जीएसटी था जो एक अप्रैल से बढ़कर छह प्रतिशत हो गया है।

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    बिहार ईंट निर्माता संघ के अध्यक्ष मुरारी प्रसाद मन्नू का कहना है कि मिट्टी और मजदूरी भी महंगी हुई है। इसलिए लाल ईंट की कीमत जनवरी की तुलना में 2000 रुपये प्रति ट्राली महंगी हो गई है। खरीदार कम हो गए हैं क्योंकि एसी ब्लाक्स, फ्लाई ऐश ब्रिक, फेवर ब्लाक का विकल्प मिल गया है। इनकी कीमत भी कम है। फ्लाई ऐश ब्रिक 14,000 रुपये प्रति ट्राली है। यानी लाल ईंट से यह तीन हजार रुपये ट्राली सस्ती है। दूसरी ओर सरकारी योजनाओं में लाल ईंट का प्रयोग बंद कर दिया गया है। इस तरह से लाल ईंट का बाजार खत्म होता जा रहा है और फ्लाई ऐश ब्रिक का बाजार बढ़ रहा है। करीब 30 प्रतिशत लाल ईंट के बाजार पर फ्लाई ऐश ब्रिक का कब्जा हो चुका है। 

    लाल ईंट की गैर कानूनी बिक्री भी बढ़ी

    मुरारी प्रसाद का कहना है कि जो विक्रेता जीएसटी चुका हैं, उनपर बोझ बढ़ गया है। दूसरी ओर बगैर जीएसटी भुगतान करने वाले ईंट व्यापारी कीमत घटाकर ईंट बेच रहे हैं। इससे सरकार को भी राजस्व का घाटा हो रहा है जबकि जीएसटी भुगतान करने वाले व्यापारियों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। बगैर जीएसटी व्यापार करने वाले छह प्रतिशत सस्ता लाल ईंट बेच रहे हैं। ग्राहक इस बात समझ नहीं रहे हैं इसलिए जो सस्ता दे रहा है, उनसे लाल ईंट खरीद रहे हैं। इन असमान्य स्थितियों के कारण लाल ईंट का बाजार खत्म होता जा रहा है। 

    एएसी ब्लाक और फ्लाई ऐश ब्रिक का बढ़ा दायरा

    लाल ईंट के विकल्प के रूप में वर्ष 2016-17 में फ्लाई ऐश ब्रिक का उपयोग शुरू हुआ। अनुमान है कि बिहार में अब 150 यूनिटें काम कर रही हैं। इसके बाद एएसी ब्लाक की शुरुआत हुई। ब्लाक ईंट से छह गुना तक बड़ा होते हैं। इससे जोड़ाई में बालू व सीमेंट की बड़ी बचत होती है। ईटुका ब्लाक्स एलएलपी के निदेशक मुकेश कुमार भारद्वाज ने कहा कि ये ब्लाक ईंट से 33 प्रतिशत हल्का हैं तो इनके उपयोग से करीब 28 प्रतिशत कम खर्च बैठता है। पटना जिले में ब्लाक बनाने वाली भी चार यूनिटें लग चुकी हैं। आवासीय और कामर्शियल प्रोजेक्ट में ब्लाक का ही उपयोग हो रहा है।