indian railway : ट्रेन किराये की अंतर-राशि की लड़ाई में कर्नल से पड़े पाले को रेलवे शायद ही भूल पाए
ट्रेन किराये की अंतर-राशि की इस लड़ाई में कर्नल कुमार आनंद से पड़े पाले को रेलवे शायद ही भूल पाए। रेलवे अब कर्नल को ब्याज जोड़कर अंतर-राशि (3050 रुपये) तो वापस करेगा ही साथ में 60000 रुपये हर्जाना भी देगा।यह मामला 2019 में ही आयोग के समक्ष आ गया था।

राज्य ब्यूरो,पटना। ट्रेन किराये की अंतर-राशि की इस लड़ाई में कर्नल कुमार आनंद से पड़े पाले को रेलवे शायद ही भूल पाए। रेलवे अब कर्नल को ब्याज जोड़कर अंतर-राशि (3050 रुपये) तो वापस करेगा ही, साथ में 60000 रुपये हर्जाना भी देगा। भुगतान में देरी हुई तो 10000 रुपये अतिरिक्त और हीलाहवाली पर आगे की कार्रवाई के लिए रास्ता खुला है।
कर्नल आनंद रांची जिला में हटिया थाना अंतर्गत धुरवा के मूल निवासी हैं। इस प्रकरण के समय उनकी पोस्टिंग पंजाब में थी। रेलवे वारंट के आधार पर उन्होंने नई दिल्ली से पटना के लिए एसी फर्स्ट क्लास का टिकट कराया था। रेलवे ने बिना सूचना दिए उनका टिकट एसी सेकेंड क्लास में डाउन-ग्रेड कर दिया। इसकी जानकारी भी उन्हें तब हुई, जब वे यात्रा के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे।
वारंट 08 दिसंबर, 2014 को जारी हुआ था। किराये में अंतर-राशि की वापसी के लिए उनके आवेदन पर रेलवे ने ध्यान नहीं दिया। रेलवे के अधिकारी एक-दूसरे पर मामले को टालते रहे। अंतत: 04 जुलाई, 2019 को कर्नल ने पटना जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की।
उत्तर रेलवे, पूर्व-मध्य रेलवे सहित रेलवे बोर्ड के पांच अधिकारियों को उन्होंने प्रतिवादी बनाया। आयोग के समक्ष सभी प्रस्तुत हुए। 29 मई, 2024 को उत्तर रेलवे ने अंतर-राशि वापस करने का आश्वासन दिया, जबकि यह मामला 2019 में ही आयोग के समक्ष आ गया था।
आयोग के अध्यक्ष प्रेमरंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार ने माना कि रेलवे की आनाकानी से कर्नल मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न के साथ ही भुगतान पाने के लिए कानूनी खर्च की प्रक्रिया में व्यय करना पड़ा। इससे रेलवे की सेवा में कमी का आरोप सिद्ध होता है।
विद्वान निर्णयकर्ताओं ने निर्देश दिया कि 12 प्रतिशत ब्याज जोड़ते हुए रेलवे अंतर-राशि वापस करेगा। मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न के मुआवजा में 50000 रुपये और कानूनी व्यय के लिए 10000 रुपये देने होंगे। 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होने पर निष्पादन लागत के रूप में 10000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
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