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पीएमसीएच टीबी-चेस्ट विभाग में शिक्षकों की कमी, डिग्री की मान्यता पर संकट

Published: Mon, 19 Oct 2026 08:17 AM (IST)

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के टीबी एवं चेस्ट विभाग में प्राध्यापकों के पद रिक्त होने से एमडी और डीटीसीडी डिग्री की मान्यता पर संकट मंडरा रहा है।

PMCH। फाइल फोटो

PMCH। फाइल फोटो

HighLights

  1. पीएमसीएच टीबी-चेस्ट विभाग में प्राध्यापकों के पद रिक्त।

  2. एमडी और डीटीसीडी डिग्री की मान्यता पर संकट।

  3. स्वास्थ्य सचिव को स्थिति से अवगत कराया गया।

डॉ. नलिनी रंजन, पटना। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के टीबी एवं चेस्ट विभाग में प्राध्यापकों के पद रिक्त होने से मेडिकल की पढ़ाई और डिग्री की मान्यता पर संकट गहराने लगा है।

विभाग के एक प्राध्यापक डॉ. पीके अग्रवाल पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि विभागाध्यक्ष डॉ. बीके चौधरी इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

ऐसे में विभाग में प्राध्यापकों के पद खाली होने की स्थिति बन रही है। इससे राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मानकों के अनुसार, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के संचालन और मान्यता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

टीबी एवं चेस्ट विभाग में प्रत्येक वर्ष एमडी की दो और डिप्लोमा इन टीबी एंड चेस्ट डिजीज (डीटीसीडी) की दो डिग्रियां प्रदान करने की व्यवस्था है।

इन पाठ्यक्रमों में पढ़ाई, प्रशिक्षण और चिकित्सकीय मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त योग्य शिक्षकों की उपलब्धता आवश्यक है। प्राध्यापकों के पद रिक्त होने से विभाग के सामने शिक्षण और प्रशिक्षण व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

स्वास्थ्य सचिव को कराया गया अवगत

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने इस पूरे मामले से स्वास्थ्य सचिव को अवगत करा दिया है। प्राध्यापकों की कमी और उससे पाठ्यक्रमों की मान्यता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की जानकारी विभागीय स्तर पर दी गई है।

अब शिक्षकों की उपलब्धता और रिक्त पदों को भरने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

मानकों के अनुरूप शिक्षकों की उपलब्धता जरूरी

मेडिकल कॉलेज में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए एनएमसी के निर्धारित मानकों के अनुसार योग्य शिक्षकों और जरूरी शैक्षणिक सुविधाओं का होना आवश्यक है।

टीबी एवं चेस्ट विभाग में दोनों प्राध्यापकों के पद रिक्त होने की स्थिति में इन मानकों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

यदि समय रहते पर्याप्त योग्य शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई, तो एमडी और डीटीसीडी पाठ्यक्रमों की मान्यता तथा भविष्य के नामांकन पर असर पड़ने की आशंका है।

विभाग में शिक्षकों की कमी का समाधान करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सैद्धांतिक शिक्षा के साथ मरीजों के उपचार और प्रशिक्षण का अनुभव भी दिया जाता है। ऐसे में रिक्त पदों पर नियुक्ति या नियमानुसार वैकल्पिक व्यवस्था करना संस्थान के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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