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एक सीट, दो दौर और 30 साल का अंतराल; पटना शिक्षक सीट के चुनाव में फिर बदला इतिहास

Published: Wed, 28 Oct 2026 08:12 PM (IST)

Bihar MLC Chunav: राजद के डॉ. संजीव कुमार ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के नवल किशोर यादव को ...और पढ़ें

जीत के बाद विक्ट्री साइन दिखाते राजद के डाॅ. संजीव कुमार। जागरण

जीत के बाद विक्ट्री साइन दिखाते राजद के डाॅ. संजीव कुमार। जागरण

HighLights

  1. डॉ. संजीव कुमार ने नवल किशोर यादव को 1057 मतों से हराया।

  2. नवल किशोर यादव का 30 साल पुराना चुनावी वर्चस्व समाप्त।

  3. द्वितीय वरीयता के वोटों ने संजीव कुमार को दिलाई जीत।

जागरण संवाददाता, पटना। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम ने भाजपा के 30 वर्षों के गढ़ को ढाह द‍िया। राजद के प्रत्याशी डाॅ. संजीव कुमार ने भाजपा के नवल किशोर यादव को 1057 मतों से पराजित किया।

इस परिणाम के साथ ही नवल किशोर यादव के तीन दशक पुराने चुनावी वर्चस्व का अंत हो गया। वह लगातार पांच बार इस सीट से चुनाव जीत चुके थे।

यह महज संयाेग ही है कि जिस सीट पर नवल क‍िशोर यादव का 30 वर्षों से राज था, उसी सीट पर पीएन शर्मा भी 30 वर्षों तक विधान पार्षद रहे थे।  

4487 मत लाकर संजीव बने विजेता 

चुनाव परिणाम के अनुसार राजद के डाॅ. संजीव कुमार को कुल 4487 मत मिले, जबकि नवल किशोर यादव को 3430 मत प्राप्त हुए।

दोनों प्रत्याशियों के बीच मतों का अंतर 1057 रहा। वहीं जनसुराज की प्रत्याशी डाॅ. दिव्या ज्योति तीसरे स्थान पर रहीं। इन्हें 1571 मत मिले। 

मतगणना के शुरुआती दौर में मुकाबला करीबी दिख रहा था। प्रथम वरीयता के मतों की गिनती के बाद भाजपा के नवल किशोर यादव 3199 मतों के साथ आगे थे, जबकि राजद के डाॅ. संजीव कुमार को 3149 मत मिले थे।

उस समय भाजपा प्रत्याशी 50 मतों से आगे चल रहे थे। हालांकि, मतगणना आगे बढ़ने के साथ तस्वीर बदल गई। दूसरे वरीयता के मतों की गिनती में डाॅ. संजीव कुमार ने 4487 मत हासिल कर जीत दर्ज की।

जबकि नवल किशोर यादव को 3430 मत मिले। शुरुआती बढ़त के बाद भाजपा प्रत्याशी का पीछे रह जाना मतगणना के दौरान चर्चा का विषय बना रहा।

द्वितीय वरीयता के वोटों ने संजीव को दी संजीवनी

खगड़िया जिले के पलबत्ता से विधायक रहे राजद प्रत्याशी डाॅ. संजीव कुमार प्रथम वरीयता में 50 मतों से पिछड़ गए।  द्वितीय वरीयता के मतों ने उनके लिए संजीवनी का काम किया।

खास कर जिन मतदाताओं की पहली पसंद जनसुराज की प्रत्याशी दिव्या ज्योति थीं उनके अधिकतर मतदाताओं ने दूसरी वरीयता में डाॅ. संजीव को पसंद किया।

यही पसंद ने भाजपा के नवल किशोर यादव के 30 साल से चले आ रहे विजय रथ का पहिया थाम दिया। दिव्या के साथ ही कुछ और निर्दलीय प्रत्याशियों के दूसरे वरीयता के मत भी इन्हें मिले।

पांच बार की जीत के बाद नवल किशोर यादव को झटका

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नवल किशोर यादव लंबे समय से चुनावी राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे थे। लगातार पांच बार जीत दर्ज करने के कारण इस सीट पर उनका मजबूत प्रभाव माना जाता था।

लेकिन इस बार परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा। डाॅ. संजीव कुमार ने उन्हें पराजित कर सीट पर अपना कब्जा जमाया। यह हार नवल किशोर यादव के लिए इसलिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है।

क्योंकि उनका चुनावी दबदबा करीब 30 वर्षों से जुड़ा रहा था। इस परिणाम ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना पैदा कर दी है।

1996 में नवल किशोर ने डाॅ. पी एन शर्मा को दी थी श‍िकस्‍त 

वर्ष 1996 में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में तब डा. पी एन शर्मा की तूती बोलती थी। लंदन स्कूल ऑफ इकोनाॅमिक्स से पढ़ कर राजनीति को गले लगाने वाले पी एन शर्मा का पूरा नाम पद्मदेव नारायण शर्मा था।

30 वर्षों से लगातार जीत रहे ऐसे पीएन शर्मा का विजय रथ रोकने को लालू प्रसाद यादव ने तब युवा नेता नवल किशोर को राजद से चुनावी जंग में उतार कर वह करिश्मा कर डाला, जिस पर सहज रूप से विश्वास नहीं किया जा सकता था।

7 मई 1966 से जिस पी एन शर्मा ने 1996 तक अधिपत्य जमा रखा था, वह तिलिस्म 1996 में टूटा। साल 1996 में तब राजद उम्मीदवार के तौर पर नवल किशोर यादव ने पी एन शर्मा को 870 वोट से हराया था। तब नवल किशोर यादव को 3414 वोट मिले थे और पी एन शर्मा को 2554 मत मिले थे।

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