Bihar MLC Chunav: 3 सीटों पर जीत, पटना शिक्षक सीट पर हार; गढ़ गंवाने के बावजूद कैसे लाभ में रही भाजपा?
बिहार विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने चार में से तीन सीटें जीतकर कुल दो सीटों का लाभ प्राप्त किया। ...और पढ़ें

विधान परिषद चुनाव में भाजपा के लिए दोहरा संदेश।
HighLights
भाजपा ने MLC चुनाव में चार में से तीन सीटें जीतीं।
पटना शिक्षक सीट पर तीन दशक बाद भाजपा को हार मिली।
पार्टी को कुल मिलाकर दो सीटों का राजनीतिक लाभ हुआ।
राज्य ब्यूरो, पटना। विधान परिषद की चार शिक्षक एवं चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र समेत आठ सीटों पर हुए चुनाव में पटना शिक्षक सीट गंवाने के बावजूद भाजपा के लिए नतीजे पूरी तरह निराशाजनक नहीं रहे।
चुनाव परिणामों के आकलन में पार्टी सीधे तौर पर दो सीटों पर लाभ हुआ। चार सीटों पर मैदान में उतरी पार्टी तीन सीट पर विजय प्राप्त करने में सफल रही।
राजनीतिक आधार के लिहाज से दो सीटों का लाभ हुआ। हालांकि, पटना शिक्षक सीट पर हार ने पार्टी को शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी रणनीति की समीक्षा करने का संकेत भी दिया है।
पटना शिक्षक सीट पर तीन दशक बाद भाजपा की हुई पराजय
इसके साथ यह संकेत भी है कि एनडीए के घटक दलों के वोट इस चुनाव में ट्रांसफर नहीं हुए। संभव है इस कारण ही सारण एवं पटना शिक्षक व तिरहुत स्नातक सीट पर जदयू-भाजपा प्रत्याशियों की हार हुई।
दूसरी ओर, चुनाव परिणामों ने राजग एवं विपक्ष के बीच विधान परिषद में राजनीतिक प्रभाव को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है।
इन सीटों पर जीत केवल संबंधित प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य से नहीं जुड़ी है, बल्कि इससे विभिन्न दलों के संगठनात्मक प्रभाव, स्थानीय समीकरण एवं मतदाता समूहों के बीच उनकी स्वीकार्यता का भी आकलन किया जा रहा है।
तिरहुत शिक्षक एवं दरभंगा स्नातक सीट पार्टी की झोली में आई
भाजपा के लिए इस चुनाव का महत्व इसलिए भी अधिक था कि राज्य में सत्ता दायित्व संभालने के बाद पार्टी को अपने संगठनात्मक आधार की परीक्षा देनी थी।
शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में आम चुनावों से अलग तरह के मुद्दे व समीकरण प्रभावी रहते हैं। पटना शिक्षक सीट पर हार भाजपा के लिए विचार करने का विषय है।
बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव में भाजपा की करारी हार के छह महीने के अंदर पटना शिक्षक सीट राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षक मतदाताओं के बीच पार्टी की ढीली होती पकड़ का संकेत देती है।
भाजपा के लिए चुनौती अब चुनाव परिणामों से मिले संकेतों को सत्ता संतुलन एवं संगठनात्मक मजबूती में बदलने की होगी।
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