विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिहार MLC चुनाव: सीटें 8, प्रत्याशी 15 और जीत सिर्फ एक की; महागठबंधन के चुनावी गणित में कहां हुई गड़बड़ी?

Published: Wed, 28 Oct 2026 07:08 PM (IST)

बिहार विधान परिषद चुनाव में महागठबंधन को करारी हार मिली है, जहाँ 8 सीटों के लिए 15 प्रत्याशी उतारे गए लेकिन जीत सिर्फ एक पर मिली।

एकजुटता की कमी और आंतरिक कलह से भी महागठबंधन को लगा आघात।

एकजुटता की कमी और आंतरिक कलह से भी महागठबंधन को लगा आघात।

HighLights

  1. महागठबंधन ने 8 में से केवल एक सीट जीती।

  2. सीट-बंटवारे में तालमेल की कमी बनी हार की वजह।

  3. आंतरिक कलह और वोटों का बिखराव प्रमुख कारण।

विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। विधान परिषद चुनाव में राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) को बेशक एक सीट का लाभ हुआ है, लेकिन समग्रता में महागठबंधन को तगड़ा आघात लगा है।

अपनी सिटिंग दो सीटों के साथ वह कुल आठ सीटों की जीतने की ललक से मैदान में उतरा था। परिणाम आया तो दोनों सिटिंग सीटें हाथ से निकल चुकी थीं।

संभवत: परिणाम इतना विपरीत नहीं होता, अगर कि महागठबंधन एकजुट होता। इसके बजाय खींचतान हुई, लिहाजा पांच सीटों पर दोस्ताना संघर्ष की नौबत बन आई।

शिक्षक कोटे की अपनी दोनों सिटिंग सीटें गंवाईं, एक नई सीट जीती

बहरहाल कांग्रेस और भाकपा को एक-एक सीट का नुकसान हुआ है। दरभंगा (शिक्षक) सीट पर कांग्रेस के डाॅ. मदन मोहन झा लगातार तीन चुनाव जीतकर चौथी बार मैदान में थे।

इस सीट को लेकर महागठबंधन सर्वाधिक आश्वस्त था, लेकिन यहां कांग्रेस की राह में दो सहयोगी दलों (राजद और माकपा) ने भी अपनी टांगें अड़ा दीं। परिणाम ने तीनों को निराश किया है।

पार्टी

प्रत्याशी

जीत

राजद

07

01

कांग्रेस

05

00

भाकपा

01

00

माकपा

01

00

माले

01

00

कुल

15

01

तिरहुत (शिक्षक) सीट पर आंतरिक कलह (राजद-कांग्रेस की निष्क्रियता) के कारण ही भाकपा के संजय कुमार सिंह हैट-ट्रिक लगाने से चूक गए।

इस सच्चाई को एक उदाहरण के साथ समझिए। दरभंगा (स्नातक) सीट पर भाजपा के सर्वेश कुमार 13280 मत पाकर विजयी रहे।

विधानसभा चुनाव में खींचतान से बुरे परिणाम से भी नहीं ली सीख

दूसरे स्थान पर राजद के अनिल कुमार झा रहे, जिन्हें 12096 मत मिले। कांग्रेस के रजनीकांत पाठक को मिले 3496 मत अगर जोड़ दें तो महागठबंधन के लिए 15592 मतों की संभावना थी, जो भाजपा के वोटों से अधिक होते।

समीकरण की इस सच्चाई से महागठबंधन आगे भी सीख ले, ऐसा प्रतीत नहीं होता, क्योंकि इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान भी उसने ऐसी कई कोताहियां कीं। तब 11 सीटों पर दोस्ताना संघर्ष हुआ था और वे सभी सीटें एनडीए की झोली में चली गई थीं।

सीटें आठ और प्रत्याशी 15

विधान परिषद के लिए शिक्षक और स्नातक कोटे की क्रमश: चार-चार सीटों के लिए चुनाव हुआ, जबकि महागठबंधन के 15 प्रत्याशी रहे।

उनमें राजद के सात, कांग्रेस के पांच, भाकपा, माकपा और भाकपा (माले) के एक-एक प्रत्याशी थे। इस कारण समर्थक द्वंद्व में उलझे रह गए।

वोटों का बिखराव हुआ सो अगल, तटस्थ मतदाताओं को भी वह आकर्षित नहीं कर पाया। ऐसी स्थिति में उनके लिए जन सुराज पार्टी (जसुपा) विकल्प बन गई। वोटों के इस बंटवारे ने एनडीए की राह अपेक्षाकृत सहज कर दी।

पराजय के तीन प्रमुख कारण

  1. सीट-शेयरिंग में तालमेल की कमी : सीट बंटवारे को लेकर मतभेद चुनाव से पहले ही सार्वजनिक हो गए। राजद ने एकतरफा निर्णय लेते हुए छह प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। बाद में वह कांग्रेस की सिटिंग सीट पर भी कूद गया।

  • सहयोगी दलों में एक-दूसरे के प्रति नाराजगी : राजद के रवैये से नाखुश कांग्रेस ने पांच सीटों पर प्रत्याशी उतार दिया। चूंकि घटक दल एकमत नहीं थे, लिहाजा कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच एकजुटता का संदेश नहीं गया।
  • बहुकोणीय संघर्ष और मतों का बिखराव : एनडीए एकजुट रहा। इसके अलावा, सभी सीटों पर लड़कर जसुपा ने मुकाबले को त्रिकोणीय-बहुकोणीय बना दिया। इस कारण महागठबंधन का पारंपरिक वोट बिखर गया।
  • भविष्य की तीन आशंका-संभावना

    1. महागठबंधन में अविश्वास बढ़ेगा। आगामी चुनावों में सीट-शेयरिंग की बातचीत अधिक जटिल हो जाएगी।
    2. एनडीए का मनोबल ऊंचा होगा। आपसी तालमेल से चुनाव लड़ने और बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ेगी।
    3. जसुपा अपना पांव जमाएगी। तटस्थ मतदाताओं के लिए महागठबंधन की तुलना में बेहतर विकल्प बनेगी।

    यह भी पढ़ें- ‘राहुल गांधी प्रधानमंत्री, प्रियंका गृह मंत्री और वाड्रा वित्त मंत्री’, कांग्रेस पर जीतन राम मांझी का कटाक्ष

    यह भी पढ़ें- Bihar MLC Election Result LIVE: बिहार की 8 में से 7 सीटों के नतीजे आए, दरभंगा में भारी बवाल