बाल कविताओं के जरिये आरा के रहने वाले सत्य नारायण लाल ने पाई राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति
कवि की पुण्यतिथि पर विशेष बाल साहित्य में आज भी बसते सत्यनारायण लाल राष्ट्रीय स्तर पर पाया सम्मान 30 नवंबर 1914 को भोजपुर जिले में हुआ था जन्म पटना के चौधरी टोला में नौ फरवरी 2004 को ली थी अंतिम सांस

पटना, जागरण संवाददाता। Famous Poet Death Anniversay Special: 'होली आई, होली आई, ले गुलाल की झोली आई...', देश हमारा भारत प्यारा, सब देशों से न्यारा है...', 'हे वीर तुम्हारा अभिनंदन ...' आदि गीतों की रचना करने वाले महाकवि सत्यनारायण लाल साहित्य, शिक्षा और व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे।
भोजपुर (Bhojpur News) जिले के शाहपुर (Shahpur) प्रखंड के ईश्वरपुरा (Ishwarpura) गांव में 30 नवंबर 1914 को जन्मे सत्यनारायण लाल (Satya Narayan Lal) ने राज्य के कई शिक्षण संस्थानों में अपनी सेवा दी। वह टीचर्स ट्रेनिंग स्कूल बिक्रम व पटना (Teacher's training college, Bikram and Patna) में प्राचार्य के पद पर नियुक्त हुए। 1973 में शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। वे पटना के चौधरी टोला में अपने आवास पर नौ फरवरी 2004 को दुनिया छोड़ विदा हुए, लेकिन वह स्वरचित गीतों में आज भी जीवित हैं।
हिंदी पाठ्य पुस्तकों के संपादन के साथ बने रहे परामर्शी
बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे कवि सत्यनारायण लाल के बारे में साहित्यकार वीरेंद्र भारद्वाज बताते हैं, उन्होंने बिहार पाठ्य पुस्तक मंडल व राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद में पुस्तक प्रकाशन में परामर्शी की भूमिका निभाई। बिहार सरकार के हिंदी पाठ्य पुस्तकें नवीन भारती, बाल भारती, भाषा सरिता, साहित्य सरिता आदि के संपादन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कहानीकार और निबंधकार के साथ समाजशास्त्री भी थे
कवि सत्यनारायण लाल एक गीतकार, कहानीकार व निबंधकार होने के साथ समाजशास्त्री भी थे। उन्होंने बाल साहित्यकार के रूप में अपनी पहचान बनाई। सत्यनारायण की लिखी कविताएं आज भी बिहार पाठ्य पुस्तकों में हैं, जिन्हें छात्र पढ़ते हैं।
बाल साहित्य लेखन के लिए मिले कई सम्मान
बाल साहित्य लेखन ने उन्हें राजभाषा विभाग द्वारा राजकीय सम्मान, प्राथमिक शिक्षक शिक्षा विद्यालय सम्मान, गुजरात हिंदी साहित्य सम्मान, अहमदाबाद से साहित्य वारिधि सम्मान दिलाया। उन्होंने अपने जीवनकाल में वीर कुंवर सिंह थाती, शहीद का स्मारक, व्यावहारिक व्याकरण, व्याकरण प्रदीप, भारतीय इतिहास के प्रेरक प्रसंग आदि कृतियां लिखीं।
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