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    Patna News: बुखार में पैरासिटामोल भी नहीं आ रही काम, बच्चों के गले में सूजन दिखने की क्या है वजह?

    Updated: Tue, 13 May 2025 05:22 PM (IST)

    पटना के पीएमसीएच एनएमसीएच आइजीआइएमएस समेत निजी अस्पतालों में गर्मीजनित रोगों से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। दवाओं से न उतरने वाला 103 से 104 डिग्री का तेज बुखार उल्टी दस्त से लेकर सन बर्न तक के मामले बच्चों में बढ़े हैं। बच्चों के गले में सूजन भी देखी जा रही है।

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    पटना में बच्चों को बुखार कर रहा परेशान। सांकेतिक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी पटना में पड़ रही भीषण गर्मी का दुष्प्रभाव बच्चों में दिखने लगा है। दवाओं से न उतरने वाला 103 से 104 डिग्री का तेज बुखार, उल्टी, दस्त से लेकर सन बर्न तक के मामले बच्चों में बढ़े हैं।

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    भूख हो जा रही खत्म

    पीएमसीएच, एनएमसीएच, आइजीआइएमएस समेत निजी अस्पतालों में गर्मीजनित रोगों से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। स्वजन की समस्या यह है कि पैरासिटामोल की डोज बढ़ाकर देने पर भी बुखार नहीं उतर रहा है। बच्चों की भूख बिल्कुल खत्म हो जा रही है। पीने के लिए पानी मांगते हैं, लेकिन पीते ही उल्टी हो जाती है। ऐसे में कई बच्चों को भर्ती तक कराना पड़ रहा है। 

    छोटे व स्कूल जाने वाले दोनों बच्चे हो रहे बीमार    

    आइजीआइसी के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. बीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि घरों में रहने वाले छह वर्ष से कम उम्र के बच्चे गर्मी के दुष्प्रभावों से ज्यादा पीड़ित हैं। गर्म हवा या धूप में खेलने से वे बीमार हो रहे हैं। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चे धूप के संपर्क में देर तक रहने व पानी कम पीने से बीमार हो रहे हैं।

    गले में सूजन की भी शिकायत

    कुछ बच्चे जिनके गले में सूजन की शिकायत है उसका कारण आइसक्रीम, बहुत ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक्स हैं। गत चार दिन में तेज बुखार, उल्टी, दस्त, शरीर में पानी की कमी, बुखार नहीं उतरना, बच्चे का खाना-पीना छोड़ना व वायरल संक्रमण की समस्याएं बढ़ी हैं। 

    बच्चा बीमार हो तो शरीर को करें ठंडा  

    यदि दवा से तेज बुखार कम नहीं हो रहा है तो शरीर को गीले कपड़े से तब तक पोछें जबतक तापमान कम नहीं हो जाए। बच्चा बड़ा है तो उसे नहला भी सकते हैं। बीमार होने पर बच्चों की भूख कम हो जाती है और पानी पीने का मन करता है, लेकिन उल्टी हो जाती है। ऐसे में बच्चे को उल्टी दवा देने के बाद खीरा तरबूज, अर्ध तरल भोजन देते रहें। स्कूल जाने वाले बच्चों को बिना नाश्ता कराए नहीं भेजें और पानी की बड़ी बोतल दें। साथ में टिफिन जरूर दें ताकि वह खाली पेट नहीं रहे। 

         बचाव को अपनाएं निम्न उपाय  

    -बच्चों को सुबह 11 बजे के बाद धूप में नहीं जाने दें। 

    -घर में अपेक्षाकृत ठंडे कमरे में रखें, पानी, नींबू पानी, छाछ, लस्सी, बेल शर्बत, ओआरएस आदि का भरपूर सेवन कराएं। 

    - बाहर या पैकज्ड भोजन के बजाय घर में बना ताजा सुपाच्य भोजन ही दें, सलाद व मौसमी सब्जियां अधिक खिलाएं।  

    - स्कूल से लौटते समय बच्चों के सिर को टोपी या गमछा से ढंक कर रखें।  

    - शिक्षकों से बात करें कि धूप तेज होने के बाद बच्चों को खुले मैदान संबंधी गतिविधियों से दूर रखें। 

    - बच्चों को दिन में दो बार नहलाएं व साफ सूती ढीले कपड़े पहनाएं।

    - तेज बुखार, उल्टी, दस्त या चक्कर की शिकायत हो तो डाक्टर के पास ले जाएं। 

    - स्कूलों में ठंडे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, कैंटीन में समोसे-जंकफूड की बिक्री फिलहाल बंद कराई जाए।