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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बिहार के चंपारण में तुषार गांधी के साथ दुर्व्यवहार, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

By Jagran News Edited By: Rajesh Kumar
Published: Mon, 14 Jul 2025 03:35 PM (IST)

बिहार में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा-जदयू सरकार पर महात्मा गांधी की विरासत का अपमान करने का आरोप लगाया है। चंपारण ...और पढ़ें

चंपारण में एक कार्यक्रम के दौरान गांधी जी के परपोते तुषार गांधी के साथ दुर्व्यवहार किया गया। फाइल फोटो
चंपारण में एक कार्यक्रम के दौरान गांधी जी के परपोते तुषार गांधी के साथ दुर्व्यवहार किया गया। फाइल फोटो

राज्य ब्यूरो, पटना। स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की जिस ऐतिहासिक धरती से महात्मा गांधी ने 1917 में अंग्रेजों के 'तीन कठिया' काले कानून के खिलाफ पहली बार सत्याग्रह का आह्वान किया था, आज उसी धरती पर भाजपा-जदयू सरकार के संरक्षण में बापू की गौरवशाली और वैभवशाली विरासत का अपमान किया गया, लेकिन इस बार वजह शर्मनाक है। 

ये आरोप कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान, विधान परिषद में पार्टी के नेता डॉ. मदन मोहन झा और राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने एक संयुक्त मीडिया बयान में लगाए।

चंपारण में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपिता के परपोते तुषार गांधी के साथ नेताओं द्वारा दुर्व्यवहार और उन्हें जबरन कार्यक्रम स्थल से बाहर निकालना बेहद शर्मनाक घटना है। बिहार कांग्रेस इस घटना की निंदा करती है।

घटना पश्चिमी चंपारण के तुरकौलिया इलाके की है। चंपारण सत्याग्रह की स्मृति में 12 जुलाई से पदयात्रा कर रहे तुषार गांधी रविवार को ऐतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे पहुंचे।

यह वही जगह है जहां से बापू ने कभी नील की खेती करने को मजबूर किसानों का दर्द सुना था। उन्होंने उस जगह पर माल्यार्पण किया और अतीत की उन भयावह घटनाओं को याद किया, जब अंग्रेज जमींदार किसानों को पेड़ों से बांधकर पीटते थे।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि भाजपा-जदयू सरकार की मानसिकता वाले पंचायत मुखिया विनय कुमार ने सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए जाने पर कार्यक्रम के बीच में ही तुषार गांधी को अपमानजनक तरीके से मंच से उतार दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही तुषार गांधी ने देश में फैले उन्माद, सामाजिक विभाजन और बिहार की राजनीतिक विफलताओं पर बोलना शुरू किया, मुखिया ने उन्हें अपमानजनक तरीके से मंच खाली करने को कहा। तुषार गांधी के साथ हुई इस घटना ने कई संवेदनशील सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या हम उस अहिंसक परंपरा और वैचारिक स्वतंत्रता को भूल रहे हैं जिसके लिए गांधी जी खड़े थे? कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हम सवाल उठाते हैं कि क्या नीतीश कुमार की राजनीति गांधी की विचारधारा से इतनी दूर जा चुकी है कि उनके वंशज भी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं?

क्या असहमति को शब्दों में दबाना एक नई "तीन कटिया" नीति बन गई है, जहाँ अब विचारों की स्वतंत्रता पर नियंत्रण किया जा रहा है? कांग्रेस पार्टी इस हिंसक घटना की कड़ी निंदा करती है।