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    पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआइ के लिए एक महीने का इंतजार, लौट रहे मरीज

    Updated: Sat, 05 Jul 2025 03:58 PM (IST)

    नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मस्तिष्क पेट हड्डी के जोड़ हृदय नेत्र गर्दन कान से जुड़ी बीमारियों के साथ ही लीवर किडनी गुर्दे गर्भाशय समेत अन्य आंतरिक अंगों की जांच के लिए एमआरआइ कराने अस्पताल आने वाले मरीजों को लौटना पड़ रहा है। एक महीने की प्रतीक्षा के बाद जांच हो पा रही है।

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    पटना एनएमसीएच स्थित एमआरआइ जांच केंद्र। जागरण

    जागरण संवाददाता, पटना सिटी। नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था लगातार चर्चा में है। मस्तिष्क, पेट, हड्डी के जोड़, हृदय, नेत्र, गर्दन, कान, से जुड़ी बीमारियों के साथ ही लीवर, किडनी, गुर्दे, गर्भाशय समेत अन्य आंतरिक अंगों की जांच के लिए मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआइ) कराने अस्पताल आने वाले मरीजों को लौटना पड़ रहा है।

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    मरीजों को एमआरआइ के लिए लगभग एक महीना आगे की तारीख दी जा रही है। परेशान मरीजों की जांच कराने के लिए स्वजनों को कई स्तर पर पैरवी करनी पड़ रही है। अधिकांश मरीज अस्पताल के बाहर निजी जांच घरों में अधिक कीमत पर एमआरआइ कराने को विवश हो रहे हैं।

    एनएमसीएच स्थित जांच केंद्र से लौट रहे फतेहपुर के मनोज कुमार समेत कई मरीजों ने बताया कि एमआरआइ के लिए एक महीना बाद की तिथि दी जा गयी है। कर्मचारियों द्वारा बताया जा रहा है कि मरीज अधिक पहुंच रहे हैं और जांच सिस्टम छोटा है।

    सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच में विलंब होने से आगे का इलाज करने में चिकित्सकों को समस्या आ रही है। जांच के इंतजार में मरीजों का रोग गंभीर होने की संभावना बन जाती है। स्वजन ने बताया कि अस्पताल के पुर्जा पर आधे शुल्क में ही जांच हो जाती लेकिन बाहर में पूरी राशि देनी होगी। गरीब मरीजों के लिए बड़ी समस्या है।

    जांच बढ़ाने को विकसित की जाएगी व्यवस्था

    एनएमसीएच में पीपीपी मोड पर जांच करने वाले केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि सीटी स्कैन करने में कोई वेटिंग नहीं है लेकिन एमआरआइ के लिए लगभग एक महीना बाद की तारीख देना मजबूरी है। प्रतिदिन लगभग बीस मरीजों का एमआरआइ होता है जबकि तीन गुणा अधिक मरीज पहुंचते हैं।

    अस्पताल में भर्ती, ओपीडी के अलावा बाहर के भी मरीज आते हैं। एमआरआइ जांच की संख्या बढ़ाने के लिए मशीन की क्षमता और व्यवस्था को विकसित किया जाएगा। एक जनवरी 2025 से 31 मई 2025 तक एनएमसीएच में 2313 मरीजों का एमआरआइ किया गया।

    बीते दिन एनएमसीएच में पटना प्रमंडल के आयुक्त सह अध्यक्ष डा. चंद्रशेखर के नेतृत्व में रोगी कल्याण समिति की हुई बैठक में एमआरआइ पर बातचीत हुई थी। पीपीपी मोड पर होने वाली एमआरआइ जांच की व्यवस्था के संबंध में उनसे बात करूंगी। बैठक की प्रोसीडिंग अभी प्राप्त नहीं हुई है।

    - डा. प्रो. रश्मि प्रसाद, अधीक्षक, एनएमसीएच