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    सावधान! सोशल मीडिया पर नहीं करें लिमिट क्रॉस, नहीं तो जा सकते जेल ...जानिए

    By Kajal KumariEdited By:
    Updated: Mon, 20 Aug 2018 11:54 PM (IST)

    भारत में भी साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। सरकार ऐसे मामलों को लेकर काफी गंभीर है। अब साइबर अपराध से जुड़े मामलों में आइपीसी की सख्त धाराएं लगाई जा सकती हैं।

    सावधान! सोशल मीडिया पर नहीं करें लिमिट क्रॉस, नहीं तो जा सकते जेल ...जानिए

    पटना [राज्य ब्यूरो]। जुर्म की दुनिया में अपराधी हमेशा कानून को चकमा देने के लिए नए-नए तरीके ढूंढता है। सूचना क्रांति के इस युग में अब अपराध भी ऑनलाइन हो रहे हैं। जिसे साइबर क्राइम के रूप में जाना जाता है। लेकिन इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले अधिकतर लोगों को साइबर अपराध से जुड़े मामलों में आइपीसी की कितनी सख्त धाराएं लगाई जा सकती हैं, इसका अंदाजा नहीं होगा।

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    साइबर क्राइम करने वाले अपराधियों के लिए आइपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामूली जुर्माने से लेकर आजीवन कैद तक के प्रावधान किए हैं। भारत में भी साइबर क्राइम मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। सरकार ऐसे मामलों को लेकर काफी गंभीर है।

    भारत में साइबर क्राइम के मामलों में सूचना तकनीक कानून, 2000 और सूचना तकनीक (संशोधन) कानून, 2008 लागू है। लेकिन इसी श्रेणी के कई मामलों में भारतीय दंड संहिता (आइपीसी), कॉपीराइट कानून, 1957, कंपनी कानून, सरकारी गोपनीयता कानून और यहां तक कि आतंकवाद निरोधक कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

    क्या है साइबर क्राइम 

    आज कंप्यूटर और इंटरनेट के युग में कंप्यूटर और इंटरनेट के बिना किसी भी काम को अंजाम देना संभव नहीं है। ऐसे में अपराधी भी तकनीक के सहारे हाइटेक हो चुके हैं। वे जुर्म करने के लिए कंप्यूटर, इंटरनेट, डिजिटल डिवाइसेज और वल्र्ड वाइड वेब आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑनलाइन ठगी या चोरी भी इसी श्रेणी में आता है। किसी की वेबसाइट को हैक करना या सिस्टम से डाटा चुराना साइबर अपराध की श्रेणी में आता है। 

    कई मामलों में लागू होता है आइटी कानून

    साइबर क्राइम के कुछ मामलों में आइटी डिपार्टमेंट की तरफ से जारी किए गए आइटी नियम, 2011 के तहत भी कार्रवाई की जाती है। इस कानून में निर्दोष लोगों को साजिशों से बचाने के इंतजाम किए गए हैं। लेकिन कंप्यूटर, इंटरनेट और दूरसंचार इस्तेमाल करने वालों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए कि उनसे जाने-अनजाने में कोई साइबर क्राइम तो नहीं हो रहा है।

    हैकिंग : धाराएं और सजा

    किसी कंप्यूटर, डिवाइस, इन्फॉर्मेशन सिस्टम या नेटवर्क में अनधिकृत रूप से घुसपैठ करना और डाटा से छेड़छाड़ करना 'हैकिंग' कहलाता है। यह हैकिंग उस सिस्टम की फिजिकल एक्सेस और रिमोट एक्सेस के जरिए भी हो सकती है। जरूरी नहीं है कि ऐसी हैकिंग के दौरान सिस्टम को नुकसान पहुंचा ही हो।

    अगर कोई नुकसान नहीं भी हुआ है तब भी घुसपैठ करना साइबर क्राइम में आता है। जिसके लिए सजा का प्रावधान है। आइटी (संशोधन) एक्ट, 2008 की धारा 43(ए), धारा 66, आइपीसी की धारा 379 और 406 के तहत अपराध साबित होने पर तीन साल तक की जेल या पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

    जानकारी या डाटा चोरी

    किसी व्यक्ति, संस्थान या संगठन आदि के किसी सिस्टम से निजी या गोपनीय डाटा या सूचनाओं की चोरी करना भी साइबर क्राइम है। अगर किसी संस्थान य संगठन के अंदरुनी डाटा तक आपकी पहुंच है, लेकिन आप अपनी उस जायज पहुंच का इस्तेमाल संगठन की इजाजत के बिना, उसके दुरुपयोग की मंशा से करते हैं, तो वह भी इसी अपराध की श्रेणी में आएगा। कॉल सेंटर या लोगों की जानकारी रखने वाले संगठनों में इस तरह की चोरी के मामले सामने आते रहते हैं।

    ऐसे मामलों में आइटी (संशोधन) एक्ट, 2008 की धारा-43(बी), धारा-66(डी), 67(सी), आइपीसी की धारा 379, 405, 420 और कॉपीराइट एक्ट के तहत दोष साबित होने पर अपराध की गंभीरता के हिसाब से तीन साल तक की जेल या दो लाख रुपये तक के जुर्माना हो सकता है।

    वायरस व स्पाइवेयर फैलाना

    अक्सर कंप्यूटर में आए वायरस और स्पाइवेयर को हटाने पर लोग ध्यान नहीं देते हैं। उनके सिस्टम से होते हुए यह वायरस दूसरों तक पहुंच जाते हैं। हैकिंग, डाउनलोड, कंपनियों के अंदरुनी नेटवर्क, वाइ-फाइ, कनेक्शनों और असुरक्षित फ्लैश ड्राइव, सीडी के जरिए भी वायरस फैल जाते हैं।

    वायरस बनाने वाले अपराधियों की पूरी इंडस्ट्रीज है, जिनके खिलाफ समय-समय पर कड़ी कार्रवाई होती रही है। लेकिन आमलोग भी कानून के दायरे में आ सकते हैं, यदि उनकी लापरवाही से किसी के सिस्टम में कोई खतरनाक वायरस पहुंच जाए और कोई बड़ा नुकसान कर दे।

    इस तरह के केस में आइटी (संशोधन) एक्ट, 2008 की धारा-43(सी), धारा-66 व आइपीसी की धारा 268 और देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के लिए फैलाए गए वायरस पर साइबर आतंकवाद से जुड़ी धारा-66(एफ) भी लगाई जाती है। दोष सिद्ध होने पर साइबर वॉर और साइबर आतंकवाद से जुड़े मामलों में उम्रकैद का प्रावधान है। जबकि अन्य मामलों में तीन साल की जेल या जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है।

    पहचान की चोरी

    किसी दूसरे शख्स की पहचान से जुड़े डाटा, गुप्त सूचनाएं आदि का इस्तेमाल करना भी साइबर क्राइम है। यदि कोई व्यक्ति दूसरों के क्रेडिट कार्ड नंबर, पासपोर्ट नंबर, आधार नंबर, डिजिटल आइडी, ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन पासवर्ड, इलेक्ट्रॉनिक्स सिग्नेचर आदि का इस्तेमाल करके  शॉपिंग या धन की निकासी करता है तो वह इस अपराध में शामिल हो जाता है।

    जब आप किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर या उसकी पहचान का आभास देते हुए कोई जुर्म करते हैं या उसका नाजायज फायदा उठाते हैं, तो यह जुर्म आइडेंटी थेफ्ट के दायरे में आता है।

    ऐसा करने वाले पर आइटी (संशोधन) एक्ट, 2008 की धारा-43, 66(सी), आइपीसी की धारा-419 लगाए जाने का प्रावधान है। जिसमें दोष साबित होने पर तीन साल की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

    ई-मेल स्पूकिंग और फ्रॉड

    अक्सर आपके इनबॉक्स या स्पैम बॉक्स में कई तरह के इनाम देने वाले या बिजनेस पार्टनर बनाने वाले, या फिर लॉटरी निकलने वाले मैसेज व मेल आते होंगे। ये सभी मैसेज व मेलकिसी दूसरे शख्स के ई-मेल या फर्जी ई-मेल आइडी के जरिए किए जाते हैं।

    किसी दूसरे के ई-मेल पते का इस्तेमाल करते हुए गलत मकसद से दूसरों को ई-मेल भेजना इसी अपराध के तहत आता है। हैकिंग, फिशिंग, स्पैम व वायरस और स्पाइवेयर फैलाने के लिए इस तरह के फर्जी ई-मेल का इस्तेमाल अधिक होता है। ऐसा काम करने वाले अपराधियों का मकसद ई-मेल पाने वाले को धोखा देकर उसकी गोपनीय जानकारी हासिल करना करना होता है।

    ऐसी जानकारियों में बैंक खाता नंबर, क्रेडिट कार्ड नंबर, ई-कॉमर्स साइट का पासवर्ड आदि आ सकते हैं। इस तरह के मामलों में आइटी कानून, 2000 की धारा-77(बी), आइटी (संशोधन) एक्ट, 2008 की धारा-66 (डी), आइपीसी की धारा-417, 419, 420 और 465 लगाए जाने का प्रावधान है। दोष सिद्ध होने पर तीन साल की कैद या जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है।

    पोर्नोग्राफी

    इंटरनेट के माध्यम से अश्लीलता का धंधा खूब फल-फूल रहा है। ऐसे में पोर्नोग्राफी एक बड़ा कारोबार बन गया है। जिसके दायरे में ऐसे फोटो, वीडियो, टेक्स्ट, ऑडियो और अन्य सामग्रियां आती हैं, जो यौन, यौन कृत्यों और नग्नता पर आधारित हो। ऐसी सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्रकाशित करवाने या भिजवाने पर पोर्नोग्राफी निरोधक कानून लागू होता है।

    दूसरों के नग्न या अश्लील वीडिया तैयार करने वाले या ऐसा एमएमएस बनाने वाले या इलेक्ट्रॉनिक्स माध्यमों से इन्हें दूसरों तक पहुंचाने वाले और किसी की मर्जी के खिलाफ अश्लील संदेश संदेश भेजने वाले लोग इसी कानून के दायरे में आते हैं।

    इसके तहत आने वाले मामलों में आइटी (संशोधन) कानून, 2008 की धारा 67(ए), आइपीसी की धारा-292, 293, 294, 500, 506 व 509 के तहत सजा का प्रावधान है। जुर्म की गंभीरता को देखते हुए पहली गलती पर पांच साल की सजा व दस लाख तक का जुर्माना तथा दूसरी बार गलती करने पर यह सजा सात साल की की होगी।

    चाइल्ड पोर्नोग्राफी 

    18 साल से कम उम्र के लोग बच्चों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे मामलों में आइटी (संशोधन) एक्ट, 2008 की धारा 67(बी), आइपीसी की धाराएं 292, 293, 294, 500, 506 और 509 के तहत सजा का प्रावधान है। इसमें पहले अपराध पर पांच साल की सजा तथा दस लाख का जुर्माना तथा दूसरी बार गलती करने पर सात सल की सजा व दस लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।

    बच्चों व महिलाओं को तंग करना

    सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट, ई-मेल, चैट आदि के जरिए बच्चों या महिलाओं को तंग करने के मामले में इस श्रेणी के साइबर अपराध में आते हैं। इस तरह के मामलों में आइटी (संशोधन) एक्ट, 2008 की धारा 66(ए), के तहत दोष साबित होने पर तीन साल की जेल की और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।