मेडिकल छात्रों के लिए खुशखबरी, NMCH में UG की 50 और PG की 20 सीटें बढ़ेंगी
नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) पटना में एमबीबीएस की 50 और पीजी की 20 सीटें बढ़ सकती हैं, जिसके लिए ...और पढ़ें

HighLights
एनएमसीएच में एमबीबीएस की 50, पीजी की 20 सीटें बढ़ेंगी।
सीट बढ़ोतरी के लिए एनएमसी टीम का कभी भी औचक निरीक्षण।
सहायक प्राध्यापकों और सीटी स्कैन की कमी बड़ी चुनौती।
अहमद रजा हाशमी, पटना सिटी। नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमबीबीएस में पचास तथा पांच विषयों में पीजी की बीस सीटें बढ़ सकती हैं। इसके लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की टीम कभी भी अस्पताल एवं कॉलेज का औचक निरीक्षण करने पहुंच सकती है।
कॉलेज प्रशासन के साथ विभागीय स्तर पर तैयारियों की जा रही हैं। विभागीय कमियों को चिह्नित कर उसे दूर करने की कवायद तेज हो गयी है। माना जा रहा है कि वर्ष 2026 में हुई नीट यूजी की परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को एनएमसीएच में बढ़ने वाली सीट पर नामांकन लेने का अवसर मिल सकता है।
एनएमसीएच की प्राचार्या प्रो. डॉ. उषा कुमारी ने बताया कि यूजी की अभी 150 और पीजी की 117 सीटें हैं। यूजी में पचास सीटें बढ़ा कर दो सौ सीटें तथा पीजी में 40 सीटें बढ़ा कर 157 करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
कई विभागों में उपकरणों एवं संसाधनों से जुड़ी कमियों को दूर किया गया है। कुछ जरूरी संसाधन विभाग को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। सीट बढ़ोतरी के लिए आवश्यक एक-एक लेक्चर हाल अस्पताल एवं सेंटर आफ एक्सीलेंस में विकसित तथा व्यवस्थित किया गया है।
उन्होंने बताया कि सीट बढ़ोतरी के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की टीम अस्पताल और कॉलेज का कभी भी औचक निरीक्षण कर उपलब्ध संसाधनों के साथ शैक्षणिक व्यवस्था का आंकलन कर सकती है।
प्राचार्य ने बताया कि पैथोलाजी विभाग, माइक्रोबायोलाजी विभाग, शिशु रोग विभाग, स्त्री एवं प्रसूति विभाग, निश्चेतना विभाग में पीजी की चार-चार सीटें बढ़ाने के लिए एनएमसी में आवेदन किया गया है।
वर्तमान में 20 विषयों में पीजी की 117 सीटों पर विद्यार्थियों का नामांकन हो रहा है। प्राचार्य ने बताया कि वर्तमान में पैथोलाजी विभाग में पीजी की तीन, माइक्रोबायोलाजी की पांच पीडिया की 12, गायनी की 15, निश्चेतना विभाग की दस सीटों के लिए नामांकन हो रहा है।
सहायक प्राध्यापक व सीटी स्कैन-एमआरआई की बड़ी कमी
एनएमसीएच में सहायक प्राध्यापक की बेहद कमी है। यह कमी यूजी और पीजी सीट की बढ़ोतरी में बड़ी रुकावट बन सकती है।सीटी स्कैन और एमआरआइ की जांच व्यवस्था अस्पताल में अपनी नहीं है।
यह सुविधा मरीजों के लिए पीपी मोड पर उपलब्ध है। एनएमसी की टीम पूर्व के निरीक्षण में इसे बड़ी कमी बताती रही है। पीजी विद्यार्थियों का कहना है कि सीटी स्कैन एवं एमआरआइ व्यवस्था निजी संस्थान की होने के कारण प्रशिक्षण लेने में उन्हें परेशानी होती है।
