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    ब्लड बैंक खोलकर शहर में चला रहे रक्तदान की मुहिम

    By Nandlal SharmaEdited By:
    Updated: Tue, 10 Jul 2018 06:00 AM (IST)

    पटना के राजेंद्र नगर में रहने वाले डॉ. विनय मूल रूप से आरा के रमना मैदान के मूल निवासी हैं। 74 वर्ष की उम्र में भी वह रेडक्रॉस सोसाइटी में निशुल्क सेवा दे रहे हैं।

    इलाज के दौरान अस्पतालों को रक्त की कमी का सामना करना पड़ता है। लोगों में भी जागरुकता की कमी है, जिसके कारण वे पर्याप्त मात्रा में रक्तदान करने से बचते हैं। शहर की इसी कमी को पहचानते हुए डॉ. विनय बहादुर सिन्हा पूरे तन-मन से लगे हुए हैं। उनकी मुहिम के कारण लोगों में रक्तदान के प्रति जागरुकता भी बढ़ी है और इमरजेंसी में खून की कमी भी पूरी हुई है।

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    डॉ. सिन्हा बिहार रेडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष हैं। पटना के राजेंद्र नगर में रहने वाले डॉ. विनय मूल रूप से आरा के रमना मैदान के मूल निवासी हैं। 74 वर्ष की उम्र में भी वह रेडक्रॉस सोसाइटी में निशुल्क सेवा दे रहे हैं। इनकी अगुआई में रक्तदान के कई कार्यक्रमों का सफल संचालन हो रहा है। आज राजधानी में किसी को भी रक्त की जरूरत होती है, तो सबसे पहले वह गांधी मैदान स्थित रेडक्रॉस भवन ही आता है।

    डॉ. विनय कहते हैं, इमरजेंसी की स्थिति में बिना शर्त के ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। सामान्य परिस्थिति में ब्लड कार्ड या ब्लड डोनर साथ लाने पर रक्त की उपलब्धता कराई जाती है। रेडक्रॉस प्रतिदिन बुलेटिन जारी करता है कि कितना रक्त ब्लड बैंक में है। कितने लोगों ने रक्तदान किया। कितने लोगों को रक्त मुहैया कराया गया। रेडक्रॉस की ओर से जगह-जगह रक्तदान शिविर भी आयोजित किए जाते हैं। रेडक्रॉस सोसाइटी से ज्यादातर सेवानिवृत्त डॉक्टर जुड़े हैं।

     

    1991 में रक्तदान से जुड़े
    डॉ. विनय रक्तदान की मुहिम में 1991 से जुड़े हैं। वे कहते है, उस समय कैमूर जिले के मोहनिया रेफरल अस्पताल में प्रभारी था। जीटी रोड पर अस्पताल होने के कारण प्रतिदिन सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायल मरीज आते मगर खून की व्यवस्था नहीं रहने के कारण मरीजों को वाराणसी के लिए रेफर कर दिया जाता।

    कई बार सूचना मिलती कि मरीज ने वाराणसी जाने के क्रम में दम तोड़ दिया। इसके बाद ही ख्याल आया कि ब्लड बैंक की जरूरत कितनी बड़ी है। इसके बाद इस दिशा में काम करने लगा। कुछ ही सालों बाद कैमूर जिले के मोहनिया में ब्लड बैंक खोला। यह देश का पहला प्रखंड स्तर पर खुलने वाला ब्लड बैंक साबित हुआ।

    27 सालों में खोले 22 ब्लड बैंक
    डॉ. विनय कहते हैं, एक-एक रुपये चंदा लेकर प्रखंड स्तर पर पहला ब्लड बैंक खोला था। आज राज्य में 22 ब्लड बैंकों का संचालन हो रहा है। 2006 में पटना में रेडक्रॉस में ब्लड बैंक की स्थापना हुई। इसके लिए सांसद सह सिने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने 20 लाख और सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने 15 लाख रुपये की सहायता राशि दी। तत्कालीन पटना डीएम बी राजेंद्र ने भवन और उपकरण की खरीद जिला प्रशासन की देखरेख में कराई। तीसरे चरण में रेडक्रॉस सोसाइटी ने राज्य के 17 ब्लड बैंकों को 2009 में अपने अधीन ले लिया। अब 23वां ब्लड बैंक पटना सिटी में खोलने की तैयारी है।

    मुंबई ब्लास्ट के बाद भेजा 100 यूनिट ब्लड
    डॉ. विनय कहते हैं, 1993 में ब्लड बैंक खुलते ही मुंबई में बम बलास्ट हो गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री का निर्देश आया कि 100 यूनिट ब्लड मुंबई भेजिए। उस समय रक्तदान के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था। तत्कालीन डीएम आरके श्रीवास्तव पहले रक्तदाता बने। इसके बाद लोगों की कतारें लग गईं और 100 यूनिट रक्त मुंबई भेजा गया। ऐसे कई किस्से हैं।

    सिवान जिले के रमेश श्रीवास्तव बताते हैं कि पटना में 2014 में सड़क दुर्घटना में मेरा भाई बुरी तरह से घायल हो गया था। ऑपरेशन के लिए खून की जरूरत थी। उस समय रेडक्रॉस पहुंचे और तत्काल रक्त मिल गया। इस कारण मेरे भाई का जीवन बच गया।

    अब आई हॉस्पिटल खोलने की योजना

    डॉ. विनय बहादुर सिन्हा कहते हैं, गांधी मैदान स्थित रेडक्रॉस भवन में कई तरह की सुविधाएं शुरू की गई हैं। अभी बच्चों के टीकाकरण की निशुल्क व्यवस्था है। जल्द ही यहां अर्बन सेंटर खुलने वाला है। जुलाई से ही आई हॉस्पिटल शुरू होने वाला है। मात्र 200 रुपये में आंखों की जांच कर पावर का चश्मा उपलब्ध कराया जाएगा।डॉ. विनय पीएमसीएच और जयप्रभा ब्लड बैंक जैसे सरकारी ब्लड बैंकों को रेडक्रॉस के हवाले करने की मांग राज्य सरकार से कर चुके हैं। वे कहते हैं, कम संसाधन में हम इन ब्लड बैंकों में और बेहतर सुविधाएं देंगे।