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    Bihar: महागठबंधन की मांग, वोटर लिस्ट रिवीजन में आधार-कार्ड, राशन-कार्ड, मनरेगा-कार्ड को भी मिले मान्यता

    Updated: Sat, 05 Jul 2025 07:00 AM (IST)

    राजद नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर आपत्ति जताई। उन्होंने आधार कार्ड जैसे अन्य दस्तावेजों को मान्यता देने की मांग की। तेजस्वी ने निर्वाचन आयोग के 11 दस्तावेजों की सूची पर सवाल उठाए और कहा कि अन्य दस्तावेज क्यों अस्वीकार्य हैं? मुकेश सहनी ने एसआईआर को मतदाताओं के साथ मजाक बताया और भाजपा पर मताधिकार छीनने का आरोप लगाया।

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    महागठबंधन की मांग, एसआइआर में आधार-कार्ड, राशन-कार्ड, मनरेगा-कार्ड को भी मिले मान्यता

    राज्य ब्यूरो, पटना। राजद नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम बिहार के मुख्य निर्वाचन (सीईओ) पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल से मुलाकात कर मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

    एसआईआर को महागठबंधन ने अव्यावहारिक और लोकतंत्र-विरोधी उपक्रम बताया। इसी के साथ आधार-कार्ड, राशन-कार्ड, मनरेगा-कार्ड को एसआईआर में मान्यता दिए जाने की मांग की। सीईओ ने उनके विचारों और उनकी मांगों से भारत निर्वाचन आयोग को अवगत कराने का आश्वासन दिया।

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    तेजस्वी ने पूछा कि क्या निर्वाचन आयोग को यह अधिकार है कि वह मतदाता-सूची में नाम जोड़वाने के लिए मात्र उन्हीं 11 दस्तावेजों को मान्य माने और किसी अन्य दस्तावेज को निरस्त कर दे? इसका संवैधानिक एवं कानूनी आधार क्या है?

    संविधान का अनुच्छेद-326 वयस्क मताधिकार का आधार तय करता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करता कि नागरिकता या आयु प्रमाणित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे। नागरिक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अंतर्गत नाम जोड़ने, हटाने, आपत्ति दर्ज करने आदि की प्रक्रिया की धाराओं में भी यह स्पष्ट निर्देश नहीं है कि मात्र कौन से दस्तावेज ही मान्य होंगे। यह अधिकार मुख्य रूप से चुनाव आयोग की प्रक्रिया और अधिसूचना के अधीन छोड़ा गया है।

    प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि निर्वाचन आयोग संविधान के अधीन एक स्वतंत्र संस्था है। इसे कानून के अधीन काम करना है, यह कानून से ऊपर नहीं। निर्वाचन आयोग स्पष्ट रूप से यह बताए कि इन 11 दस्तावेजों का चयन किस विधिक शक्ति या धारा के अंतर्गत किया गया। आयोग विशेषकर ग्रामीण और वंचित वर्ग के हित में अन्य प्रामाणिक दस्तावेजों को भी स्वीकार्य बनाने पर पुनर्विचार करे, अन्यथा सड़क पर आंदोलन होगा।

    प्रतिनिधिमंडल में सहभागी:

    राजद की ओर से तेजस्वी यादव, प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल, सांसद मनोज कुमार झा, संजय यादव, पूर्व मंत्री आलोक कुमार मेहता, प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन, कार्यालय प्रभारी मुकुंद सिंह, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता शकील अहमद, संजय पाण्डेय, वीआइपी के मुकेश सहनी, भाकपा-माले के कुमार परवेज, भाकपा के रामनरेश पाण्डेय और माकपा के ललन चौधरी प्रतिनिधिमंडल में सम्मिलित रहे।

    प्रतिनिधिमंडल के प्रश्न:

    • क्या निर्वाचन आयोग को मात्र उन्हीं 11 दस्तावेज स्वीकार करने का विशेषाधिकार प्राप्त है?
    • सरकार द्वारा जारी अन्य दस्तावेज (आधार-कार्ड, राशन-कार्ड, मनरेगा जाब-कार्ड आदि) एसआइआर में अस्वीकार्य क्यों है, भले ही वे पहचान या निवास सिद्ध करें?
    • आंखों की पुतली, फिंगर-प्रिंट्स सहित पहचान और आवास के कई दस्तावेज के आधार पर आधार-कार्ड बनता है। फिर सरकार आधार-कार्ड को क्यों छांट रही है?
    • यदि जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम अथवा संविधान में ऐसा कोई स्पष्ट प्रविधान नहीं है तो यह 11 दस्तावेजों की सूची किस प्रक्रिया से तय हुई? क्या यह न्यायसंगत है?
    • बिहार के चार करोड़ से अधिक निवासी अन्य राज्यों में स्थायी और अस्थायी कार्य करते हैं। क्या 18 दिनों में वे अपना सत्यापन कर-करा पाएंगे? क्या सरकारी स्तर पर उन्हें बिहार लाने की कोई योजना है अथवा उनके वोट काटना ही उद्देश्य है?
    • सत्यापन कार्य में मतदाता को सफेद पृष्ठभूमि के साथ अपनी रंगीन तस्वीर लगानी है। क्या सभी घरों/परिवारों में तस्वीर उपलब्ध हैं? क्या अन्य दस्तावेजों की फोटोकापी उपलब्ध है?
    • निर्वाचन आयोग बताए कि प्रतिदिन कितने मतदाताओं का अब तक सत्यापन हुआ? कितने मतदाताओं के नाम अस्वीकृत हुए? डैश-बोर्ड के माध्यम से रियल टाइम अपडेट हो।

    संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा को ध्वस्त कर रही केंद्र सरकार : सहनी

    महागठबंधन के प्रतिनिधिमंडल में सम्मिलित रहे विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक मुकेश सहनी ने कहा कि एसआइआर मतदाताओं के साथ भद्दा मजाक है। लोकतंत्र में सबसे अधिक शक्तिशाली मतदाता हैं, लेकिन इन्हें ही अधिकारों से वंचित करने का षड्यंत्र चल रहा है। एसआइआर के विरुद्ध वीआइपी शुरू से है। हम लोग लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को समाप्त नहीं होने देंगे।

    विधानसभा चुनाव में अपनी हार के अंदेशे से निर्वाचन आयोग का सहारा लेकर भाजपा व एनडीए में सम्मिलित दूसरी पार्टियां सुदूर गांव और मलिन बस्तियों के गरीब, वंचित एवं शोषित वर्ग के मतदाताओं से मताधिकार छिनने का षड्यंत्र रच रही हैं।