पटना, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीवन के लिए जल और हरियाली को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि कार्ययोजना बनाकर प्रदेश में पर्यावरण को संरक्षित किया जाएगा। जल-जीवन-हरियाली अभियान को गांव-गांव पहुंचाना है। 15 दिन में कम से कम डेढ़ करोड़ पौधे लगाने हैं। स्कूलों में प्रतिदिन बापू कथा वाचन की तरह पर्यावरण संरक्षण के गीत भी गाए जाएंगे। सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य के हरित आवरण को 15 से बढ़ाकर 17 फीसद किया जाएगा। पशु विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में मुख्यमंत्री बुधवार को पौधे लगाकर वन महोत्सव की शुरुआत करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 

तुम याद करो कैसे वन में खुले ठहाके मारते थे
नीतीश कुमार ने सबको पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण से संबंधित एक गीत एवं फिल्म की प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव-गांव में इस गीत एवं फिल्म का प्रसारण होना चाहिए, ताकि जन जागरूकता आ सके। मुख्यमंत्री ने वनों के महत्व से संबंधित कविता के अंश को पढ़ते हुए कहा कि 'तुम याद करो कैसे वन में खुले ठहाके मारते थे। शेरों को डांटा करते थे। शेरों से बातें करते थे। सुख-दुख में साथ निभाते थे। कैसे फिर याद कराएंगे। 'आगे की पंक्तियों में 'बादल से मोहब्बत है तुझको तो पेड़ लगाओ जल के लिए। बच्चों से मोहब्बत है तुझको तो पेड़ लगाओ कल के लिए...हर आने वाली पीढ़ी भी बच्चे तेरा गुण गाएंगे।' मुख्यमंत्री ने कहा कि गीत के एक-एक शब्द को समझना होगा। मौके पर मौजूद विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार को सीएम ने गीत को जन-जन तक पहुंचाने का निर्देश दिया। 

पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक जन अभियान चलाने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 जुलाई को विधानमंडल की संयुक्त बैठक में सहमति बनी थी कि पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक जन अभियान चलाना होगा। साथ ही विस्तृत कार्ययोजना बनाकर काम करना होगा। वन महोत्सव भी इसी अभियान का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली का मतलब जल और हरियाली के बीच जीवन है। हमें ऐसा काम करना है कि पर्यावरण संरक्षण में बिहार एक उदाहरण बने। सड़कों, बांधों, तालाबों, पोखरों, पईनों और आहरों के किनारे पौधे लगाने की दिशा में काम किया जा रहा है। बच्चों में उत्सुकता है। युवाओं को भी आगे आना होगा। 

मेहनत से कमाने और लालच त्याग ने की दी सलाह

मुख्यमंत्री ने मेहनत से कमाने और लालच त्याग ने की सलाह देते हुए कहा कि पर्यावरण क्षति की भरपाई के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। लोगों को प्रेरित करना होगा। सौर ऊर्जा ही अक्षय ऊर्जा है। सभी सरकारी भवनों की छतों पर सोलर प्लेट लगाया जा रहा है। शुरुआत मुख्यमंत्री आवास से की गई है। सभी सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए काम किया जा रहा है, क्योंकि वर्षा की अनियमितता की वजह से पर्यावरण में बदलाव हो रहा है। ग्लोबल वार्मिंग से गर्मी बढ़ रही है। पृथ्वी पर खतरा उत्पन्न हो रहा है। कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, कृषि एवं पशु-मत्स्य संसाधन मंत्री प्रेम कुमार, वन पर्यावरण के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, विधान पार्षद सीपी सिन्हा, विकास आयुक्त सुभाष शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, पशु मत्स्य संसाधन विभाग की सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी, ग्रामीण विकास के सचिव अरविंद कुमार चौधरी, सूचना जनसंपर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार, पशु विज्ञान विवि के कुलपति प्रो. रामेश्वर सिंह, राज्य प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष एके घोष, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एसएस चौधरी समेत कई अधिकारी मौजूद थे। 

 

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Posted By: Rajesh Thakur

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