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    ब्रेन कैंसर से बचाई जा सकती है लोगों की जान, IGIMS में न्‍यूरो सर्जरी विभाग की वर्षगांठ पर बोले डाक्‍टर

    By Vyas ChandraEdited By:
    Updated: Mon, 19 Sep 2022 09:39 AM (IST)

    IGIMS के न्‍यूरो सर्जरी विभाग के 27वें वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में विभाग की उपलब्धियों की चर्चा की गई। बताया गया कि यहां इंडोस्‍कोपी सर्जरी पर महज 40 हजार रुपये खर्च होते हैं जबकि बाहर इसका खर्च पांच गुना ज्‍यादा।

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    27 वर्ष का हुआ आइजीआइएमएस का न्‍यूरो सर्जरी विभाग। जागरण

    पटना,  जागरण संवाददाता। इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (IGIMS) का न्यूरो सर्जरी विभाग 27 वर्षों में गंभीर बीमारियों की उपचार सफलतापूर्वक कर रहा है। इसके आगे बढ़ने में यदि जरूरत हुई तो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भी मदद करेगा। यह बातें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (Indian Medical Association) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सहजानंद प्रसाद सिंह ने कहीं। वह न्यूरो सर्जरी विभाग (Neuro Surgery Department) के 27 वर्ष होने पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आइजीआइएमएस निदेशक डा. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से भी काफी मरीज लाभांवित हो रहे है। न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. समरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पूरे बिहार में सबसे अधिक ब्रेन आपरेशन यहां किए गए। यहां एमसीएच की पढ़ाई आरंभ हो चुकी है, पहला बैच पास भी हो चुका है।

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    महज 40 हजार में इंडोस्‍कोपी सर्जरी  

    चिकित्सा अधीक्षक डा. मनीष मंडल ने कहा कि हाल के दिनों में इमरजेंसी की समुचित व्यवस्था की वजह से कई गंभीर मरीजों की हालत में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि 2016 से न्यूरो सर्जरी विभाग ने इंडोस्कोप सर्जरी (Endoscopy Operation) आरंभ किया था, महज 40 हजार में यह आपरेशन यहां होता है, जबकि निजी अस्पतालों में दो लाख रुपये तक खर्च होते है। पूर्व विभागाध्यक्ष डा. अनुज सिंह ने स्थापना से अब तक की विकास की सराहना की।

    शरीर के अन्‍य हिस्‍सों की तरह होता है ब्रेन में भी कैंसर 

    महावीर कैंसर संस्थान (Mahavir Cancer Hospital) के मेडिकल निदेशक डा. मनीषा सिंह ने शरीर के अन्य भाग के कैंसर की तरह ब्रेन में भी कैंसर होती है। आपरेशन कर इसमें मरीजों की जान बचाई जा सकती है। कार्यक्रम का संचालन डा. नीरज कनौजिया ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा. ब्रजेश कुमार ने की। मौके पर डा. ओम प्रकाश गुप्ता, डा. राकेश कुमार, डा. रत्नशील, डा. अजय, डा. अभिनव भी थे।