पटना [जेएनएन]। बिहार में ट्रक परिचालन (Truck operation) का धंधा मंदा पड़ चुका है। तकरीबन साढ़े पांच लाख ट्रकों में से ढाई लाख से ज्यादा सड़कों से उतर गए हैं। ट्रक मालिकों ने सोमवार को विकास आयुक्त (Development Commissioner) के साथ वार्ता विफल होने के बाद 22 अक्टूबर की मध्य रात्रि से चक्का जाम का एलान कर दिया है। ट्रकों की आवाजाही पर अर्थव्‍यवस्‍था टिकी है, इसलिए हड़ताल के साथ बिहार की लाइफलाइन थम गई है। इस बीच परिवहन सचिव संजय अग्रवाल ने हड़ताल से निपटने के लिए सभी जिलों के डीएम, एसएसपी व एसपी को कार्रवाई का निर्देश जारी किया है।

हड़ताल के पीछे ये हैं कारण

आखिर वे कौन से कारण हैं, जिनसे ट्रक मालिकों को यह कदम उठाना पड़ रहा है? ऐसी परिस्थिति की वजह अधिकतर पुलों से भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होना और करों व जुर्माना राशि में वृद्धि है। बिहार में गंगा पार करने वाले अधिकतर पुलों के क्षतिग्रस्त होने से भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित है। भोजपुर का बबुरा-छपरा पुल ही एकमात्र ऐसा पुल है, जिससे ट्रकों का निरंतर आवागमन होता है। भागलपुर के विक्रमशिला पुल से ट्रकों का आवागमन तो होता है, पर समय-समय पर इसे भी भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया जाता है। 

भारी जुर्माने से टूटी ट्रक मालिकों की कमर

करों और जुर्माने में वृद्धि की वजह से भी ट्रक मालिकों की कमर टूटी हुई है। 10 चक्का ट्रकों को हर तीन माह पर 3900 और 12 चक्का ट्रकों को 4200 रुपये कर के रूप में देना होता है। तिथि लैप्स होने पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगता है। फिटनेस प्रमाणपत्र की तिथि फेल होने पर पचास रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगता है। राज्य में लगभग डेढ़ लाख ट्रकों पर कर और जुर्माने की राशि बकाया है।

विकास आयुक्त से वार्ता बेनतीजा

ट्रक एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु शेखर सिंह ने  बताया कि बिहार ट्रक ओनर एसोसिएशन को मुख्य सचिव ने वार्ता के लिए बुलाया पर उनकी अनुपस्थिति में विकास आयुक्त के साथ वार्ता हुई, जो बेनतीजा रही। इसलिए एसोसिएशन हड़ताल पर अडिग है। हालांकि, ट्रक मालिकों के कुछ संगठन हड़ताल से अलग भी हैं।

Posted By: Amit Alok

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