पटना, जेएनएन। सफेद दाग एक सामान्य बीमारी है और इसका पूर्णत: इलाज संभव है। यह बीमारी विश्व के दो फीसद लोगों में पाई जाती है। परंतु भारत में इसका प्रकोप काफी व्यापक रूप से देखा जाता है। भारत में इस बीमारी से लगभग 8 फीसद लोग प्रभावित होते हैं। इसका गंभीर सामाजिक प्रभाव भी देखा जाता है।

छुआछूत से नहीं होती यह बीमारी

अब तक के रिसर्च से स्पष्ट हो गया है कि सफेद दाग को लेकर भ्रम रहता है कि यह बीमारी छुआछूत से होती है। खासकर गांवों में सफेद दाग को लेकर काफी भ्रम रहता है। इस बीमारी में शरीर के कुछ भाग का रंग उड़ जाता है। इससे जान का कोई खतरा नहीं है।

मेलानिन के कारण तय होता शरीर का रंग

शरीर का रंग मेलानिन के कारण निर्धारित होता है। सफेद दाग वाले व्यक्ति के शरीर में एंटी बॉडी का विकास होता है, जिससे मेलानोसाइट्स नष्ट होने लगते हैं। इसी के कारण सफेद दाग की समस्या उत्पन्न हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि सभी दाग ल्यूकोडर्मा नहीं होते हैं। कई बार एलर्जी के कारण भी सफेद दाग की समस्या होती है। इसके अलावा एक्जीमा, फंगल संक्रमण के कारण भी त्वचा का रंग सफेद हो जाता है।

आनुवांशिक नहीं होता सफेद दाग

चिकित्सकों का कहना है कि सफेद दाग आनुवांशिक बीमारी नहीं है। यह कुष्ठ रोग भी नहीं है। सफेद दाग वाले परिवारों में आसानी से शादी की जा सकती है। खान-पान से भी इस बीमारी का कोई लेना-देना नहीं है। आप चिकित्सक की सलाह से कुछ भी खाना खा सकते हैं।

इलाज में एक्साइमर लेजर काफी कारगर

पीएमसीएच के चर्म रोग विशेषज्ञ डा. अभिषेक झा का कहना है कि सफेद दाग के इलाज में एक्साइमर लेजर काफी कारगर तकनीक है। इससे मरीज को परेशानी काफी कम होती है। इसके अलावा दवाओं के माध्यम से मरीज के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जाती है। इससे बीमारी को नियंत्रित करने में काफी मदद मिलती है। इसके अलावा फोटो थेरापी तकनीक से भी सफेद दाग का बेहतर तरीके से इलाज किया जाता है। इस बीमारी के इलाज में स्कीन ग्राफ्टिंग भी बेहतर तकनीक है। सफेद दाग के मरीजों को हमेशा खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। तनाव से यह बीमारी काफी गंभीर हो जाती है।

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