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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 05, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पहली लोकसभा के अंतिम सांसद कमल सिंह पंचतत्‍व में विलीन, अटल बिहारी वाजपेयी से थे गहरे संबंध

By Amit AlokEdited By:
Published: Sun, 05 Jan 2020 08:12 AM (IST)Updated: Mon, 06 Jan 2020 08:46 PM (IST)

पहली लोकसभा के एकमात्र जीवित सांसद व बिहार के डुमरांव राज के अंतिम महाराज कमल बहादुर सिंह नहीं रहे। उनका अंतिम संस्‍कार सोमवार की सुबह किया गया।

पहली लोकसभा के अंतिम सांसद कमल सिंह पंचतत्‍व में विलीन, अटल बिहारी वाजपेयी से थे गहरे संबंध
पहली लोकसभा के अंतिम सांसद कमल सिंह पंचतत्‍व में विलीन, अटल बिहारी वाजपेयी से थे गहरे संबंध

बक्सर [जेएनएन]। देश की पहली संसद (First parliament) के एकमात्र जीवित बचे सांसद (PM) व बिहार के डुमरांव राज (Dumrao Raj) के अंतिम महाराज कमल बहादुर सिंह (Maharaj Kamal Singh) का रविवार की सुबह निधन हो गया। वे 93 साल के थे। रविवार को भोजपुर स्थित कोठी पर उनका पार्थिव शरीर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। सोमवार की सुबह उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्‍मान के साथ किया गया।

राजकीय सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार

डुमरांव महाराज कमल बहादुर सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ सोमवार को किया गया। बड़े पुत्र युवराज चंद्रविजय सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के मौके पर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि मंत्री जयकुमार सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री व सांसद अश्विनी चौबे, पूर्व सांसद तेज नारायण सिंह, राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व सासंद जगदानंद सिंह, पूर्व सांसद नागेंद्रनाथ ओझा तथा सदर विधायक संजय कुमार तिवारी मौजूद रहे।

अटल बिहारी वाजपेयी से रहे गहरे संबंध

कमल सिंह का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ये घनिष्ठ संबंध थे और वाजपेयी के प्रभाव के कारण ही उन्होंने जनसंघ (Jansangh) की सदस्यता ग्रहण की थी। स्वतंत्रता के बाद शाहाबाद में शिक्षा और सामाजिक विकास में इनका अहम योगदान रहा।

गौरवशाली अतीत का अंत: अश्विनी चौबे

पूर्व सांसद महाराज कमल सिंह ने सुबह 5.10 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे शाहाबाद इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री व भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि एक स्वर्णिम और गौरवशाली अतीत का अंत हो गया।

पहली लोकसभा के लिए हुए थे निर्वाचित

कमल सिंह आजादी के बाद पहले आम चुनाव में शाहाबाद से सांसद निर्वाचित हुए थे । साल 1957 में दूसरे आम चुनाव में बक्सर संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया। यहां से भी जनता ने उन्‍हें अपना प्रतिनिधि चुनकर लोकसभा में भेजा।

समाज के लिए किए कई बड़े काम

कमल सिंह ने पुराने शाहाबाद जिला (अब बक्सर, सासाराम, भोजपुर, कैमूर) के अलावा उतर प्रदेश के इलाके में खास तौर पर शिक्षा एवं स्वास्थ के क्षेत्र में मुक्त हस्त से जमीन और संसाधन दान दिए। बक्सर में प्रतापसागर स्थित टीबी अस्पताल,  डुमरांव राज अस्पताल, नगर में दो बालिका विद्यालय तथा आरा स्थित महाराजा कालेज व एचडी जैन कालेज सहित दर्जनों स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, मंदिर, मठ-मठिया डुमराव उनकी देन हैं। वे अपने पीछे दो पुत्र युवराज चंद्रविजय सिंह एवम छोटे युवराज मानविजय सिंह का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।