पटना [अमित]। क्रियेटिविटी हो तो बेकार के कबाड़ से भी कमाल के समान बनाए जा सकते हैं। ऐसा ही दिखता है पटना के विद्युत भवन परिसर में बने अनोखे कैफे में। नाम के अनुरूप ही यह जबरदस्त एनर्जी देता है।

पटना के बेली रोड स्थित विद्युत भवन परिसर में चटख रंगों से सजा एक भवन बरबस ध्यान खींचता है। यह 'एनर्जी कैफे' है। यहां के सारे सामान और फर्नीचर बिजली विभाग के ख़राब हो चुके सामानों से बने हैं।

कैफे में बैठने के लिए कुर्सी और टेबल पुराने बेकार पड़े ड्रमों से निर्मित हैं। बेकार हो चुके इलेक्ट्रिक पैनल्स से बेंच बनाए गए हैं। पुरानी साइकिल के आधे हिस्से और कार का भी इस्तेमाल किया गया है। केबल रॉल की लकड़ियों को जोड़कर मेनू बोर्ड और दीवार घड़ी बनाई गईं।

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दरअसल, बिहार राज्य विद्युत बोर्ड कार्यालय में लंबे वक्त से कैंटीन नहीं थी। करीब छह महीने पहले बोर्ड के चेयरमैन प्रत्यय अमृत ने अनोखा कैंटीन बनवाने का फैसला लिया। उन्होंने कैंटीन के लिए कबाड़खाने में सालों से पड़ी चीजों के इस्तेमाल किया। कैफे में मौजूद हर चीज को कबाड़ से काफी अच्छे से ढंग से तैयार किया गया है। डस्टबीन तक को मॉडर्न आर्ट से सजाया गया है।

चीफ इंजीनियर (सिविल) सरोज कुमार सिन्हा कहते हैं कि इस कैफे का मूल आइडिया उर्जा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत का था। इसपर प्रोफेशनल आर्टिस्ट मंजीत और नेहा सिंह ने काम किया। मंजीत और नेहा ने इस कैफे को बनाने में अहम योगदान किया।

Posted By: Amit Alok

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