'प्रधानमंत्री की जाति को पिछड़ी जाति में शामिल करने की अधिसूचना दो बार क्यों', जदयू ने किया सवाल, राजद ने भी बोला बड़ा हमला
बिहार में प्रधानमंत्री मोदी की जाति को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। जदयू ने जहां भाजपा नेताओं पर फरेब करने का आरोप लगाया है वहीं राजद ने जातिगत जनगणना को लेकर भाजपा पर हमला बोला है। जदयू नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री जिस मोढ़ घांची जाति से आते हैं वह गुजरात में ऐतिहासिक तौर पर सामाजिक और शैक्षणिक रूप से ऊंचे स्तर पर हैं।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में प्रधानमंत्री की जाति को लेकर जदयू और राजद लगातार भाजपा पर हमला बोल रही है। जदयू ने जहां भाजपा से सवाल करते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति मोढ़ घांची को पिछड़ी जाति में शामिल किए जाने को लेकर दो बार अधिसूचना क्यों जारी की गयी? वहीं राजद ने कहा कि जाति आधारित गणना रिपोर्ट जारी होने से भाजपा की तिलमिलाहट बढ़ गई है।
पीएम की जाति को पिछड़ा वर्ग में लाने के लिए फरेब किया जा रहा: जदयू
प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार समेत अन्य प्रवक्ताओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की जाति को पिछड़ा वर्ग में शामिल किए जाने को लेकर फरेब किया गया है। जब गुजरात में अति पिछड़ा समुदाय है ही नहीं तो फिर प्रधानमंत्री ने 27 अप्रैल, 2019 को यूपी के कन्नौज में खुद को अति पिछड़ा कैसे घोषित कर दिया?
भाजपा के नेता पीएम मोदी का अपमान कर रहे
जदयू प्रवक्ताओं ने यह सवाल किया कि क्या यह सच नहीं है कि भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान किया जा रहा? प्रधानमंत्री जिस मोढ़ घांची जाति से आते हैं वह गुजरात में ऐतिहासिक तौर पर सामाजिक और शैक्षणिक रूप से ऊंचे स्तर पर हैं। भाजपा देश में जाति आधारित गणना इसलिए नहीं कराना चाहती है कि नरेंद्र मोदी के नाम पर किए गए जातिगत फर्जीवाड़े का खुलासा हो जाएगा।
जाति आधारित गणना रिपोर्ट जारी होने से बढ़ गयी है भाजपा की तिलमिलाहट: राजद
राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने सोमवार को कहा कि जाति आधारित गणना की रिपोर्ट जारी होते ही भाजपा नेताओं की तिलमिलाहट बढ़ गयी है। इसी वजह से भाजपा नेताओं के बयानों में विरोधाभास व असहजता दिख रही। राजद प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा के कई नेता बोलने के क्रम में भाषाई मर्यादा को भूल जाते हैं। भाजपा यह नहीं चाहती कि पिछड़ों और दलितों को उनका हक और अधिकार मिले। जनसंघ और आज के भाजपा के गठन के बुनियाद में ही पिछड़ा और दलित का विरोध रहा है। भारतीय संविधान के लागू होने के समय से ही समानता और आरक्षण का विरोध तत्कालीन जनसंघ द्वारा किया जाता रहा है।
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