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    सत्‍ता संग्राम: सारण में राबड़ी-रुडी नहीं, राजद-भाजपा में होती है दिलचस्‍प लड़ाई

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Sun, 15 Jul 2018 09:25 PM (IST)

    सारण की सियासी पहचान वैसे तो पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय से भी जुड़ी है, किंतु संसदीय क्षेत्र की कहानी राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बिना पूरी नहीं हो सकती है।

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    सत्‍ता संग्राम: सारण में राबड़ी-रुडी नहीं, राजद-भाजपा में होती है दिलचस्‍प लड़ाई

    पटना [अरविंद शर्मा]। सारण की सियासी पहचान वैसे तो पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय से भी जुड़ी है, किंतु संसदीय क्षेत्र की कहानी राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बिना पूरी नहीं हो सकती है। बिहार में सबसे चर्चित चुनाव यहीं होता है। वर्तमान में यहां से भाजपा के राजीव प्रताप रुडी सांसद हैं। कभी लालू प्रसाद हुआ करते थे, किंतु कानूनी लफड़े में फंसने के बाद पिछले चुनाव में उन्होंने अपनी विरासत राबड़ी देवी को सौंप दी, जो बेहद करीबी मुकाबले में रुडी से हार गई थीं। अबकी परिवार में प्रत्याशी बदलने की चर्चा है। राबड़ी की नई बहू एवं तेजप्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या राय सारण से चुनाव लड़ सकती हैं।

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    नए परिसीमन के पहले सारण संसदीय क्षेत्र छपरा के नाम से जाना जाता था, जहां से 1977 में महज 29 वर्ष की उम्र में लालू ने लोकसभा की दूरी तय कर ली थी। बाद में भी लालू के सामने जब भी चुनौती आई, छपरा ने उनका साथ दिया। जब 2009 में वह सारण और पाटलीपुत्र दोनों जगह से लड़े थे और पाटलीपुत्र से हार गए थे, तब भी सारण ने ही सहारा दिया था। इसीलिए सारण को लालू परिवार से जोड़कर देखा जाता है। कानूनी रोक की वजह से लालू प्रसाद खुद चुनाव नहीं लड़ सकते। इसलिए परिवार की ओर से कोई न कोई मोर्चा संभालेगा। चर्चा तो लालू के समधी एवं परसा के राजद विधायक चंद्रिका राय की भी है, किंतु माना जा रहा है कि लालू अपने परिवार से सारण को अलग नहीं होने देंगे।

    राबड़ी ने अगर चुनाव लड़ने से इनकार किया तो एश्वर्या की दावेदारी सबसे प्रबल होगी। भाजपा सांसद राजीव प्रताप रुडी का समय थोड़ा विपरीत चल रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से छुट्टी के बाद कहा जा रहा था कि संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण ओहदा दिया जाएगा, किंतु उसका भी वक्त बीत गया। अब फुर्सत में हैं तो क्षेत्र में ही पसीना बहा रहे हैं। महाराजगंज के भाजपा सांसद जनार्दन सिग्रीवाल की सक्रियता को रुडी के समर्थक चुनौती मान रहे हैं। सिग्रीवाल पहले छपरा से ही विधायक हुआ करते थे। इसलिए सारण की परिक्रमा के कई अर्थ लगाए जा रहे हैं।

    भाजपा एमएलसी सच्चिदानंद राय की महाराजगंज में आना-जाना बढ़ गया है। सिग्रीवाल और सच्चिदानंद की व्यस्तता को जोड़कर देखा जा रहा है और दूसरी तरह की पटकथा तैयार की जा रही है। हालांकि राजपूत बहुल सारण में किसी के लिए भी राजीव प्रताप का विकल्प बनना आसान नहीं होगा, क्योंकि यहां जो भी होता है, उसे स्थानीय लोग चुनाव नहीं, लड़ाई बोलते हैं।

    अतीत की राजनीति 

    आजादी के पहले यहां से सत्यनारायण सिन्हा सेंट्रल एसेंबली के लिए चुने गए थे। छपरा क्षेत्र से राजेंद्र सिंह, राम शेखर प्रसाद सिंह, सत्यदेव सिंह, रामबहादुर सिंह, हीरालाल राय, राजीव प्रताप रुडी और लालू प्रसाद चुने जाते रहे हैं। सारण जगलाल चौधरी, सैयद महमूद, सत्यनारायण सिंह, पशुपति, दारोगा प्रसाद राय जैसे नेताओं का क्षेत्र रहा है। दारोगा राय मुख्यमंत्री भी बने थे। लोक गायक भिखारी ठाकुर का जन्म भी इसी जिले के कुतुबपुर गांव में हुआ था। 1766 में लार्ड क्लाइव व नवाब शुजाउद्दौला की बैठक हुई थी, जिसमें मराठा आक्रमण रोकने को संधि हुई।