बिहार: यहां लिट्टी-चोखा का बनता है प्रसाद, मैदान में जुटते हैं हजारों लोग
बक्सर जिले में पंचकोसी परिक्रमा जो तीन दिन का आयोजन होता है, इसमें अंतिम दिन लोग गंगा स्नान कर लिट्टी चोखा का प्रसाद बनाते हैं और ग्रहण करते हैं।
पटना [जेएनएन]। बिहार का बक्सर जिला, जहां पंचकोसी परिक्रमा के अंतिम दिन श्रद्धालु गंगा स्नान करे के बाद किला मैदान में खुले में उपले जलाकर लिट्टी-चोखा बनाते हैं और उसका प्रसाद ग्रहण करते हैं। अहले सुबह से बिहार के कोने-कोने से पहुंचे लोग यहां लिट्टी चोखा बनाकर खाना अपना सौभाग्य समझते हैं। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
पंचकोसी परिक्रमा का पांचवां व अंतिम पड़ाव बक्सर का चरित्रवन है, जहां रविवार को पहुंचकर श्रद्धालुओं ने लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण किया। कहा जाता है कि यहां भगवान राम ने अपनी यात्रा के पांचवें दिन लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण किया था। उसी मान्यता के अनुसार पांचवें पड़ाव पर श्रद्धालु किला मैदान पहुंचते हैं और लिट्टी चोखा बनाते हैं।
पंचकोसी परिक्रमा के पांचवें व अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान करने के बाद महर्षि विश्वामित्र आश्रम में पहुंच कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद चरित्रवन में लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण किया।
पंचकोसी परिक्रमा समिति के सचिव डॉ रामनाथ ओझा ने कहा कि कोई भी यात्रा या परिक्रमा तभी पूर्ण होती है, जब वह पुनः उसी बिंदु पर आकर समाप्त हो जाए। उन्होंने बताया कि पांच दिनों पहले से शुरू हुई पांच कोस की यात्रा में विभिन्न ऋषियों के आश्रम से लौटने के पश्चात् महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में लिट्टी-चोखा खिला कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण का स्वागत किया गया था।
उन्होंने बताया कि चरित्रवन स्थित महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में भोजन के पश्चात भगवान ने बसांव मठिया के पास स्थित विश्राम कुंड के पास रात्रि विश्राम किया था। अगले दिन प्रातः काल में उनकी विदायी की गयी थी।
कई लोगों ने गंगा घाट के किनारे हीं लिट्टी बनाना शुरू कर दिया। इसके अलावे जिले भर में लोगों ने अपने घरों में भी लिट्टी-चोखा बनाया।
गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक
इस भीड़ में किला मैदान के सामने स्थित दरगाह दरिया शहीद परिसर में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष लिट्टी-चोखा बना रहे थे। पंचकोशी परिक्रमा के पांचवें दिन अहले सुबह ही दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने रामरेखा घाट पर गंगा स्नान करने के बाद लोग किला मैदान, नाथ मंदिर, एमवी कॉलेज, नौलखा मंदिर, परिसदन, नहर कॉलोनी, गंगा पम्प नहर कार्यालय समेत नगर के चरित्रवन स्थित अन्य जगहों पर लिट्टी बनाने में लग गए।
स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है लिट्टी-चोखा
विभिन्न व्यंजनों में शुमार भोजपुरी व्यंजन लिट्टी-चोखा केवल धार्मिक महत्ता ही नहीं रखता बल्कि, इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। चिकित्सकों का कहना है कि यह सुपाच्य के साथ-साथ भूख को भी बढ़ाता है।
इस बाबत डॉ. एडी उपाध्याय ने बताया कि उपले में पकाई गई लिट्टी कोलेस्ट्राल रहित तो होती ही है। इसमें प्रयुक्त होने वाला सत्तू चूंकि चने से निर्मित होता है और चने में प्रोटीन तथा कैल्सियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इस कारण इसका सेवन किया जाना लाभप्रद है।
श्री उपाध्याय का कहना है कि देशी चिकित्सा में अपच की शिकायत होने पर सत्तू का प्रयोग सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है। उन्होंने कहा कि यह कब्जियत से भी राहत देता है। फिलहाल, लिट्टी की तासीर गर्म होने से इस मौसम में इसका सेवन और भी उपयोगी सिद्ध होता है।
सार्वजनिक स्थलों पर जले उपले, सिंकी लिट्टी
आस्था का अनूठा मेला पंचकोसी परिक्रमा का बक्सर में विशेष महत्व है। इसके महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यात्रा के अंतिम दिन रविवार को महोत्सव में आम व खास सबों ने लिट्टी-चोखा का भरपूर आनंद लिया। गंगातट किनारे लोग भोजपुरी व्यंजन सुप्रसिद्ध लिट्टी-चोखा का महाप्रसाद बनाने में जुटे हुए थे।
पंचकोसी परिक्रमा के अंतिम दिन बक्सर शहर का नजारा अपने आप में अनूठा नजर आ रहा था। जहां चारों तरफ उपलों से उठते धुंए के गुबार के बीच हर आम व खास प्रसन्नचित व उल्लासित नजर आ रहा था। इस दौरान किला मैदान से लेकर पूरे चरित्रवन में दूर-दूर तक लोग लिट्टी सेंकते नजर आ रहे थे।
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