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    नौकरी लेने नहीं, जाब देने वालों की लगेगी कतार, एआइसीटीई के विशेष पाठ्यक्रम पर डालें नजर

    By Akshay PandeyEdited By:
    Updated: Tue, 05 Jul 2022 05:54 PM (IST)

    अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने विशेष पाठ्यक्रम पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट- इनोवेशन इंटरप्रेन्योरशिप एंड वेंचर डेवलपमेंट (पीजीडीएम-आइईवी) चलाने की अनुमति दी है। एआइसीटीई द्वारा अनुमोदित पीजीडीएम-आइईवी कार्यक्रम शुरू करने वाला सीआइएमपी बिहार का पहला संस्थान होगा।

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    एआइसीटीई के विशेष पाठ्यक्रम से होगा काफी लाभ।

    जागरण संवाददाता, पटना : अब युवा नौकरी लेने के लिए कतार नहीं लगाएं, अब सभी नौकरी देने के लिए नए द्वार खोलेंगे। इसके लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने विशेष पाठ्यक्रम पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट- इनोवेशन, इंटरप्रेन्योरशिप एंड वेंचर डेवलपमेंट (पीजीडीएम-आइईवी) चलाने की अनुमति दी है। यह बातें चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट पटना (सीआइएमपी) के निदेशक प्रो. राणा सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में कहीं। उन्होंने कहा कि एआइसीटीई द्वारा अनुमोदित पीजीडीएम-आइईवी कार्यक्रम शुरू करने वाला सीआइएमपी बिहार का पहला संस्थान होगा। यह पूरी तरह नवाचार, उद्यमिता और उद्यम विकास के क्षेत्र में प्रबंधन से जुड़ा पीजी पाठ्यक्रम होगा। इससे अभ्यर्थियों में स्व-रोजगार की क्षमता वृद्धि होगी। इसमें 30 सीटों पर पढ़ाई होगी। दो वर्षों में छह लाख रुपये पाठ्यक्रम में खर्च होंगे। नामांकन के लिए कार्यक्रम सितंबर के महीने में शुरू किया जाएगा और संभावित उम्मीदवार अधिक जानकारी के लिए सीआईएमपी की वेबसाइट  देख सकते हैं। मौके पर संस्थान के मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी कुमुद कुमार भी थे। 

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    • - सीआइएमपी में इस सत्र से पीजीडीए-आइईवी पाठ्यक्रम आरंभ करने वाला बिहार का पहला संस्थान
    • - एआइसीटीई ने इस वर्ष 10 नए संस्थानों को दिया है कोर्स के लिए मान्यता

    नवाचार के लिए मिलेगा सहयोग

    निदेशक ने बताया कि पूरे भारत में केवल 25 बिजनेस स्कूलों में एआइसीटीई ने पढ़ाई के लिए मंजूरी दी है। इसमें एक झारखंड व बिहार का एकमात्र संस्थान सीआइएमपी हे। यहां पढऩे वाले छात्रों को यहां के इंक्यूबेशन सेंटर से भी पूरा सपोर्ट मिलेगा। इससे उन्हें नवाचार में सहयोग मिलेगा। इसमें संस्थान स्टूडेंट को विचार निर्माण, पूर्व-ऊष्मायन सुविधा (प्री -इन्क्यूबेशन), अवधारणा के प्रमाण (पीओसी) परीक्षण, ऊष्मायन समर्थन (इन्क्यूबेशन सपोर्ट), प्रोटोटाइप विकास, परीक्षण और व्यावसायीकरण के लिए भी आवश्यक सहयोग देगा।