पटना, जेएनएन। टीबी (यक्ष्मा) मुक्त बिहार बनाने के लिए सरकार अब निजी डॉक्टरों के यहां इलाज कराने वालों को मुफ्त डायग्नोस्टिक सुविधा व दवाओं के अलावा निक्षय योजना के तहत पांच सौ रुपये देगी। इस प्राइवेट सेक्टर इंगेजमेंट प्रोग्राम को फिलहाल पटना के अलावा गया, भागलपुर, भोजपुर, बेगूसराय, गोपालगंज, समस्तीपुर, नालंदा, सिवान, कटिहार, मुंगेर, सहरसा, पश्चिमी चंपारण और वैशाली जिले में शुरू किया गया है।

निजी अस्पतालों में नहीं मिलती थी सुविधा

अभी सिर्फ सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे टीबी रोगियों को ही मुफ्त दवाएं, जांच सुविधा और पांच सौ रुपये मिलते थे। स्टेट टीबी पदाधिकारी डॉ. केएन सहाय ने बताया कि बड़ी संख्या में टीबी रोगी निजी डॉक्टर व अस्पतालों में इलाज कराते हैं। ऐसे में जरूरी था कि प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर को सहयोगी बनाया जाए। यह मॉडल टीबी रोगियों तक पहुंचने में खासा सफल रहा।

2019 में सरकार ने एक लाख 22 हजार 594 टीबी रोगियों को किया था पंजीकृत

वर्ष 2019 में सरकार ने एक लाख 22 हजार 594 टीबी रोगियों को पंजीकृत किया गया है। इसमें 44 हजार 568 की सूचना निजी क्षेत्रों ने दी थी। सरकार ने टीबी रोगियों को बेहतर उपचार सुविधा मुहैया कराने के लिए वल्र्ड हेल्थ पार्टनर्स और डॉक्टर्स फॉर यू जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं से अनुबंध किया है। बताते चलें कि वर्ष 2019 में 24.04 लाख टीबी रोगियों को पंजीकृत किया गया था। वहीं 2018 में यह आंकड़ा 21.5 लाख था। बिहार में टीबी मरीजों का संख्या अधिक है। अब नई व्यवस्था से लोग निजी डॉक्टरों से भी बीमारी का इलाज करा सकेंगे। इसके लिए सरकार निजी डॉक्टरों के यहां इलाज कराने वालों को मुफ्त डायग्नोस्टिक सुविधा व दवाओं के अलावा निक्षय योजना के तहत पांच सौ रुपये भी देगी। ये सुविधा बिहार की राजधानी पटना के साथ ही गया, भागलपुर, भोजपुर, बेगूसराय, गोपालगंज, समस्तीपुर, नालंदा, सिवान, कटिहार, मुंगेर, सहरसा, पश्चिमी चंपारण और वैशाली में मिलेगी।

 

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