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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 16, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bihar News: पुलिस स्टेशन में अधिवक्ता के साथ मारपीट, हाई कोर्ट ने डीजीपी को दिया जांच का निर्देश; इस तारीख तक देनी होगी रिपोर्ट

By Vikash Chandra Pandey Edited By: Mukul Kumar
Published: Tue, 16 Jan 2024 08:12 AM (IST)

Bihar Crime News अधिवक्ता के साथ मारपीट करने के मामले पर डीजीपी को जांच का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ...और पढ़ें

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर

HighLights

  1. याचिकाकर्ता ने सभी आरोपों को बताया मनगढ़ंत और निराधार
  2. मामले को आगे बढ़ाने पर खामियाजा भुगतने की धमकी

राज्य ब्यूरो, पटना। मोकामा पुलिस स्टेशन में अधिवक्ता के साथ कथित तौर पर मारपीट करने के मामले पर पटना हाई कोर्ट ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को जांच करने का निर्देश दिया है।

न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद की एकल पीठ ने आनंद गौरव की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप अंततः सही पाए जाते हैं, तो याचिकाकर्ता अधिवक्ता मुआवजे के हकदार होंगे।

अदालत ने कहा कि यह मामला डीजीपी के संज्ञान में लाया जाए, ताकि वे पूरे मामले की समीक्षा कर सक्षम अधिकारी द्वारा उचित जांच का आदेश पारित करें।

कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई छह सप्ताह की अवधि के भीतर की जाए और जांच के दौरान प्रस्तुत की गई रिपोर्ट 23 फरवरी तक हलफनामे के साथ अदालत के समक्ष दायर की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।

मोकामा पुलिस स्टेशन के एसआई की पिस्तौल छीनने का प्रयास

याचिकाकर्ता अधिवक्ता के विरुद्ध पुलिस ने भी प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया था कि उन्होंने मोकामा पुलिस स्टेशन के एसआई की पिस्तौल छीनने का प्रयास किया था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि एफआइआर में सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और निराधार हैं।

यह तर्क दिया गया कि पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज सिद्ध करेंगे कि याचिकाकर्ता वास्तव में मामले में पीड़ित था और प्रतिवादी पुलिस द्वारा उस पर हमला किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी द्वारा संबंधित सीसीटीवी फुटेज हटा दिया गया है।

पुलिस स्टेशन के परिसर में याचिकाकर्ता के साथ मारपीट का मामला

याचिकाकर्ता द्वारा दावा किया गया कि तत्कालीन एएसपी ने सीसीटीवी फुटेज देखा था, जिसमें यह स्पष्ट था कि प्रतिवादी ने पुलिस स्टेशन के परिसर में याचिकाकर्ता के साथ मारपीट की थी।

उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करने के लिए उनके द्वारा लिखित अनुरोध किया गया था, लेकिन तत्कालीन एएसपी द्वारा धमकी दी गई थी कि इस मामले को आगे बढ़ाने पर उन्हें खामियाजा भुगतना होगा।

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