जयशंकर बिहारी, पटना। पूरे विश्व में उथल-पुथल मचा चुके कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए प्लान बन गया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) पटना के इंक्यूबेशन सेंटर ने कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों की सहजता से पहचान कर संक्रमण चक्र तोड़ने का फॉमूला इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आइटी मंत्रालय को दिया है। हरी झंडी मिलते ही सभी जिला मुख्यालयों में सेंटर एक्टिव किए जाएंगे। रैपिड टेस्ट एंड मैनेजमेंट सिस्टम (आरटीएमएस) के आधार पर घर बैठे संदिग्धों की जांच हो जाएगी।

कोरोना पीड़ित और संपर्क में आने वालों पर रहेगी नजर

आइआइटी पटना के इक्यूबेटर विभूति विक्रमादित्य ने बताया कि आरटीएमएस के माध्यम से एक-एक कोरोना पीड़ित और उसके संपर्क में आने वाले लोगों पर नजर रखी जा सकती है। गांव-गांव तक इंटरनेट और स्मार्ट फोन की उपलब्धता के कारण सिस्टम पूरे देश में काम करेगा। 10 लाख रुपये में ही एक्टिव हो जाएगा।

संदिग्धों की तीन स्तर पर जांच

विभूति विक्रमादित्य ने बताया कि संबंधित जिले के लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा। वीडियो या वाट्सएप कॉल कर इच्छुक डॉक्टर से संपर्क करेंगे। जांच टीम उनके घर जाकर रैपिड किट से जांच करेगी। लगभग 200-250 में प्रारंभिक जांच हो जाएगी। पॉजिटिव रिपोर्ट मिलने पर संदिग्ध को आइसोलेशन में रखकर संपर्क में रहने वाले सभी लोगों की जांच कराई जाएगी।

पीडि़तों का डेटा ऑनलाइन होगा उपलब्ध

तीसरे चरण में आइसीएमआर द्वारा मान्यता प्राप्त केंद्रों से आरटीपीसीआर जांच कराई जाएगी। मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार पॉजिटिव सभी पीडि़तों का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध होगा। कोई भी एक क्लिक कर देख सकेगा। इक्यूबेटर का कहना है कि बिहार में बड़ी संख्या में विदेश व दूसरे राज्यों से लोग पहुंचे हैं। बताते चलें कि कोरोना वायरस की चेन ने बिहार में भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। 24 घंटे के अंदर 19 पॉजिटिव मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया है। ऐसे में वायरस का प्रकोप खत्म हो इसके लिए ये प्रस्ताव कारगर साबित हो सकता है। 

Posted By: Akshay Pandey

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