राज्यसभा के लिए तेजस्वी यादव के नाम की चर्चा क्यों? RJD का प्लान A और B रेडी
Bihar Politics: तेजस्वी यादव के राज्यसभा जाने की चर्चा बिहार में विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पांच ...और पढ़ें
HighLights
तेजस्वी की उम्मीदवारी से विपक्ष की सीट सुरक्षित होगी।
महागठबंधन विधायकों के वोटों की गारंटी, एकता सुनिश्चित।
निर्विरोध चुनाव की संभावना बढ़ेगी, 'धन खेल' रुकेगा।
राज्य ब्यूरो, पटना। Rajya Sabha Chunav: विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के राज्यसभा में जाने की चर्चा अकारण नहीं है। रास की पांच में से एक सीट को बचाने की विपक्ष की रणनीति का यह हिस्सा है।
आकलन यह है कि विपक्ष के नेता को छोड़ राजद के किसी और को उम्मीदवार बनाया गया तो यह जरूरी नहीं है कि महागठबंधन के घटक दलों के सभी विधायकों का एकमुश्त वोट उस उम्मीदवार को मिल ही जाए।
तेजस्वी की उम्मीदवारी पर वोट की गारंटी
जबकि तेजस्वी अगर उम्मीदवार बनते हैं तो महागठबंधन के सभी 35 (राजद-25, कांग्रेस-06, भाकपा माले 02, माकपा-01 एवं आइपीपी 01) विधायकों के वोट की गारंटी होगी।
भाजपा को रोकने के नाम पर एआईएमआईएम के पांच विधायकों के वोट भी उन्हें मिल सकते हैं। बसपा के एक विधायक के वोट की भी गारंटी हो सकती है।
उम्मीदवारों के दूसरे विकल्पों में तेजस्वी जैसी एकजुटता संभव नहीं है। राजद का कोई दूसरा उम्मीदवार मैदान में होता है तो फिर धन का खेल शुरू होगा।
निर्विरोध निर्वाचन की कैसे बनेगी संभावना
ऐसे में एनडीए भी पांचवी सीट पर किसी धनी को उतार सकता है। वैसी स्थिति में धन और सत्ता के मिश्रण से एनडीए का उम्मीदवार कहीं अधिक ताकतवर बन कर मैदान में मुकाबला करेगा।
तेजस्वी अगर उम्मीदवार बनते हैं तो संभव है कि पांचवी सीट के लिए एक अन्य उम्मीदवार मैदान में आने से परहेज करे।यह स्थिति चुनाव को टाल सकती है।
तब पांच रिक्ति के मुकाबले पांच उम्मीदवार रहने के कारण चुनाव की नौबत ही नहीं आएगी। सभी उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे।
आम तौर कोई भी दल राज्यसभा और विधान परिषद का निर्विरोध निर्वाचन चाहता है। क्योंकि अंतिम समय में मुकाबले में आया कोई धनी उम्मीदवार किसी भी दल का समीकरण बदल देता है। इसका अनुभव सभी दलों को है।
तेजस्वी को दिल्ली भेजने में विपक्ष की एकजुटता जरूरी
इस बार पांच सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर जीत की गारंटी के लिए प्रथम वरीयता का 40.5 वोट चाहिए। हरेक विधायक को प्रथम वरीयता का एक वोट देने का अधिकार होता है।
इस हिसाब से महागठबंधन और विपक्षी दलों के कुल 41 वोटों का योग तेजस्वी को आसानी से राज्यसभा में भेज सकता है।
राजद संसदीय बोर्ड ने उम्मीदवार चयन के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद को अधिकृत कर दिया है। रिटायर होने जा रहे राजद के दोनों राज्यसभा सदस्य एडी सिंह और प्रेमचंद्र गुप्ता भी नाॅमिनेशन के लिए तैयार हैं। अगर तेजस्वी चुनाव नहीं लड़ते हैं तो इन्हीं में से एक को उम्मीदवार बनाया जाएगा।
क्या है प्लान A और B?
प्लान A: महागठबंधन की रणनीति यही है कि तेजस्वी यादव के नाम पर सभी की सहमति बन जाए, ताकि ओवैसी की पार्टी का समर्थन आसानी से मिल जाए। BJP को रोकने के नाम पर यह संभव भी दिख रहा।
प्लान B: तेजस्वी यदि चुनाव नहीं लड़ते हैं तो रिटायर होने जा रहे एडी सिंह या प्रेमचंद गुप्ता का नाम आगे लाया जा सकता है। इसकी संभावना भी तलाशी जा रही है।
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