बिहार राज्यसभा चुनाव: एक सीट के लिए RJD खटखटाएगा हर दरवाजा; बड़े कारोबारी पर नजर, कौन होगा प्रत्याशी?
Rajya Sabha Chunav: राजद राज्यसभा की अपनी दो रिक्त सीटों में से एक वापस पाने के लिए हर संभव प्रयास ...और पढ़ें

लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव तय करेंगे प्रत्याशी। फाइल

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्यसभा में रिक्त हो रही अपनी दो सीटों मेंं से राजद एक सीट किसी भी तरह वापस पाना चाहता है। उसके लिए पार्टी हर संभव उपाय करेगी।
राजनीति को छल-बल से कभी गुरेज रहा भी नहीं। ऐसे में राजद का प्रत्याशी भी दमदार होगा, जो एनडीए का मुकाबला हर स्तर पर बढ़-चढ़कर कर सके।
रविवार को हुई पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में इन सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। जीत के गणित में कमजोर होने के बावजूद एक सीट पर मुकाबले के लिए अंतिम सहमति बनी।
तय हुआ कि प्रत्याशी उसे ही बनाया जाए, जो संसदीय राजनीति में दक्षता के साथ आर्थिक चुनौतियों का भी सहजता से सामना कर सके। अंतत: प्रत्याशी चयन के लिए सुप्रीमो लालू प्रसाद और कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को अधिकृत कर दिया गया।
रिक्त हो रही सीटों की स्थिति
बिहार से राज्यसभा की कुल 5 सीटें रिक्त हो रही हैं, जिनमें 2 सीटें राष्ट्रीय जनता दल के कोटे की हैं।
रिक्त सीटें (पार्टीवार):
जनता दल (यूनाइटेड) : हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर
राजद : प्रेमचंद्र गुप्ता, एडी सिंह
राष्ट्रीय लोक मोर्चा : उपेंद्र कुशवाहा
एक सीट जीतने का गणित
एक राज्यसभा सीट के लिए जरूरी वोट : 41
महागठबंधन के कुल विधायक : 35
यानी राजद प्रत्याशी को 6 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे।
विधानसभा में दलों की संख्या
एनडीए : 202 विधायक
भाजपा : 89
जदयू : 85
लोजपा (रामविलास) : 19
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा : 5
राष्ट्रीय लोक मोर्चा : 4
महागठबंधन : 35 विधायक
राजद : 25
कांग्रेस : 6
भाकपा-माले : 2
माकपा : 1
इंडियन इंक्लूसिव पार्टी : 1
अन्य : 6 विधायक
एआइएमआइएम : 5
बसपा : 1
चुनाव कार्यक्रम
नामांकन की अंतिम तिथि : 5 मार्च
नाम वापसी की अंतिम तिथि : 9 मार्च
मतदान व मतगणना : 16 मार्च
नोट : यदि प्रत्याशियों की संख्या पाँच से अधिक हुई, तभी मतदान और मतगणना होगी।
संघर्ष और संदेश
विधायकों की कम संख्या के बावजूद राजद चुनाव मैदान में उतर रही है, ताकि उस पर कमजोर विपक्ष होने की छवि न बने। हार की स्थिति में भी कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाएगा कि पार्टी हर राजनीतिक मुकाबले के लिए तैयार है।
परंपरा और परिवर्तन
पिछले दो दशकों से बिहार में विधानसभा कोटे से राज्यसभा सीटों पर बिना मतदान चयन की परंपरा रही है। इस बार परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि यह परंपरा टूट सकती है।
राबड़ी आवास पर हुई बैठक
राबड़ी देवी के सरकारी आवास (10, सर्कुलर रोड) पर देर शाम हुई बैठक में लालू-तेजस्वी सहित अधिसंख्य सांसद, विधायक, विधान पार्षद और पार्टी के वरीय रणनीतिकार उपस्थित रहे।
पहले राज्य संसदीय बोर्ड की बैठक हुई, जिसने प्रत्याशी चयन का निर्णय शीर्ष नेतृत्व के हवाले किए जाने का प्रस्ताव पारित किया।
उसके बाद हुई बैठक में केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने उस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी। प्रस्ताव राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने रखा।
राज्यसभा मेंं राजद के कोटे से प्रेमचंद्र गुप्ता और एडी सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनके साथ बिहार से तीन और सीटें रिक्त हो रही हैं, जो सत्ताधारी एनडीए की हैं।
विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से एनडीए चार सीटें सहजता से जीत सकता है। पांचवीं सीट पर उसे प्रथम वरीयता के तीन अतिरिक्त वोट चाहिए।
एआईएमआईएम से अनुरोध की संभावना
महागठबंधन के सभी 35 विधायक अगर राजद प्रत्याशी का समर्थन करते हैं, तो भी उसे छह अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। बसपा के एक और एआइएमआइएम के पांच विधायकों से वह अनुरोध कर सकता है, लेकिन समर्थन का पूर्ण भरोसा नहीं।
इसीलिए तय हुआ कि प्रत्याशी इतना दमदार हो कि समर्थन के लिए वह हर संभव दरवाजे को खटखटा सके। प्रारंभिक स्तर पर दो बड़े कारोबारियों के नाम पर सहमति बनी है। दोनों बैठक में उपस्थित थे। उनमें से किसी को एक को मैदान में उतारने का निर्णय अब लालू-तेजस्वी लेंगे।
