पटना, काजल। बिहार में मोकामा से निर्दलीय बाहुबली विधायक अनंत सिंह का अब जेल जाना तय है। कभी भी उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। नदावां स्थित उनके पैतृक घर से  AK-47 राइफल, हैंड ग्रेनेड और 26 राउंड गोलियां बरामद हुई हैं। बरामदगी के बाद अनंत सिंह बार बार यही कहा कि उन्हें सांसद ललन सिंह के इशारे पर फंसाया गया है और अब वे कोर्ट जाएंगे और वहीं से ही उन्हें न्याय मिलेगा। लेकिन इस बीच वे मौका देखकर फरार हो गए हैं।

कभी सीएम नीतीश के करीबी रहे थे अनंत सिंह
साल 2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर विधायक बने अनंत सिंह को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता था। बिहार में उनके नाम की तूती बोलती थी। लेकिन, बाढ़ में एक युवक की हत्या के सिलसिले में वे गिरफ्तार कर लिए गए। इसके बाद उनके खिलाफ दर्ज पुराने मामले एक-एक कर खुलते गए और बदले सत्ता समीकरण में जदयू में अनंत सिंह की राजनीतिक अहमियत कम होती गई।

हत्या और अपहरण मामले में हुई थी गिरफ्तारी
17 जून 2015 में बाढ़ थानाक्षेत्र में चार युवकों के अपहरण और हत्या के केस में अनंत सिंह पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसमें से एक युवक पुटुस यादव का शव अनंत सिंह के गांव लदावां से बरामद किया गया था। उसके बाद पुलिस ने अनंत सिंह के घर छापेमारी कर उन्हें अपने घर से गिरफ्तार किया था। 

विधायक बनने के बाद भी नहीं ले सके थे पद की शपथ
जब विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय ही मैदान में कूद पड़े और जदयू के प्रत्याशी के खिलाफ अपनी जीत दर्ज की और आज वे मोकामा विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक हैं।
विभिन्न मामलों में जेल में रहने के कारण अनंत सिंह चुनाव जीतने के बाद भी  विधायक पद की शपथ नहीं ले सके। बाद में अनंत ने विधानसभा में शपथ ग्रहण करने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई। उसके बाद हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद उन्हें शपथ दिलाई गई।
बता दें कि अनंत सिंह के घर पर राबड़ी देवी के कार्यकाल में भी छापेमारी हुई थी, जिसके दौरान घंटों तक दोनों तरफ़ से फ़ायरिंग हुई। लेकिन उस समय की राजनीतिक परिस्थिति में अनंत सिंह का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका था ।

नीतीश कुमार को चांदी के सिक्कों से तौला था अनंत ने
अनंत सिंह और नीतीश कुमार की  दोस्ती की नींव 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ी थी जब नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। उस वक्त अनंत सिंह की मदद से चुनाव लड़ा गया था और उस दौरान एक जनसभा का आयोजन किया गया था जिसमें चांदी के सिक्कों से अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को तौला था। इस कार्यक्रम का वीडियो फ़ुटेज भी काफ़ी चर्चित हुआ था।
उसके बाद नीतीश कुमार के सत्ता में आते ही अनंत सिंह के पौ बारह हो गए और उन्होंने पटना में औने-पौने दामों में संपत्ति खरीदना शुरू कर दिया था और सत्ता का संरक्षण मिलने से ही अनंत सिंह की तूती बोलती थी और कभी भी कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाया। 

हो गई गलतफहमी और सांसद बनने का देख लिया सपना
बाद में विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उसके बाद उन्हें यह ग़लतफ़हमी हो गई कि जब वो बिना किसी की मदद के निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत सकते हैं तो वो संसद सदस्य क्यों नहीं बन सकते? फिर क्या था उन्होंने उसी ललन सिंह के खिलाफ बिगुल फूंक दिया जिनकी छाया में उनका साम्राज्य फैला था।

दस साल पहले की गई थी शिकायत
उनके घर पर हथियारों का ज़ख़ीरा रहता था, यह बात पुलिस के  उच्चाधिकारियों को भी मालूम थी। क्योंकि 1994 बैच के आइएएस अधिकारी अमिताभ लाल दास ने दस साल पहले ही लिखित रूप से बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुधीर कुमार राकेश से इसकी शिकायत की थी कि अनंत सिंह के नदावां स्थित पैतृक घर  में एके 47 और AK 57 का स्टॉक रखा है। उस शिकायत को आज सही पाया गया। 

अनंत सिंह पर लगे हैं कई संगीन आरोप
मोकामा विधायक अनंत सिंह ने बाहुबली बनकर जो मन में आया वह किया। उन्होंने लोगों को डरा धमकाकर ज़मीन और मकान पर जबरदस्ती कब्जा किया। अंनत सिंह पर कई संगीन मामले दर्ज हैं, जिसमें हत्या, किडनैपिंग, फिरौती, डैकती जैसे मामले शामिल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के सिर्फ बाढ़ थाने में ही कुल 23 संगीन मामले दर्ज हैं।
साल 2005 में पहली बार चुनाव जीतने वाले मोकामा के इस ‘डॉन’ की सरकार अलग ही चलती है। इलाके में अनंत सिंह का इतना खौफ था कि जब भी इलाके में कोई घटना होती है तो लोग पुलिस से पहले उसके पास जाते हैं। 

कोई कितना भी बड़ा हो, कानून से बच नहीं सकता
ललन सिंह ने कुछ दिनों पहले कहा भी था कि कोई कितना भी बड़ा क्यों ना हो? कानून से ऊपर कोई नहीं है। उसका आतंक अब जल्द खत्म होगा और मोकाम को मुक्ति मिलेगी। इसके बाद अनंत सिंह ने एक आइपीएस अधिकारी पर अपनी हत्या की साजिश का भी आरोप लगाया था।
आज पुलिस जो भी कार्रवाई अनंत सिंह के ख़िलाफ़ कर रही है उसका श्रेय निश्चित रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जाता है, जिन्होंने एक बाहुबली के ख़िलाफ़ देर से ही सही, लेकिन कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाई है। 

Posted By: Kajal Kumari

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